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4-जी टेक्नोलॉजी क्या है?

 
Source: बिजनेस भास्कर नई दिल्ली   |   Last Updated 00:31(20/01/12)
 
 
 

जब हम 4जी की बात करते हैं तो हमारा मतलब 4जी टेक्नोलॉजी से होता है। यह फोर्थ जेनरेशन टेक्नोलॉजी का संक्षिप्त रूप है। बुनियादी तौर पर 4जी टेक्नोलॉजी, 3जी टेक्नोलॉजी का ही विस्तार है। इसमें 3जी की तुलना में ज्यादा बैंडविड्थ और सर्विसेज होती है।


4जी टेक्नोलॉजी से विभिन्न इंटरनेट प्रोटोकॉल पर में हाई क्वालिटी ऑडियो और वीडियो का प्रसारण आसान हो जाता है। अलग-अलग तकनीकों की तासीर भी अलग होती है और उसमें कई पहलू जुड़े होते हैं।


4जी श्रेणी में यूएमटीएस, ओएफडीएम, एसडीआर, टीडी-एससीडीएम, एमआईएमओ और वाईमैक्स जैसी टेक्नोलॉजी आती है। 4जी टेक्नोलॉजी से डाटा रेट काफी ऊंचे हो जाते हैं। इस टेक्नोलॉजी के आने से टेलीकम्यूनिकेशन बाजार का काफी विस्तार होगा। कुछ कंपनियां 4जी मोबाइल कम्यूनिकेशन को 100 एमबीपीएस पर ले जाना चाहती हैं।


एलटीई से 4जी का क्या संबंध है?
दरअसल एलटीई लांग टर्म एवोल्यूशन का संक्षिप्त रूप है। यह आधुनिकतम वायरलेस मोबाइल ब्राडबैंड टेक्नोलॉजी है। इससे भविष्य में 4जी को ताकत मिलेगी। यह नेटवर्क अभूतपूर्व तेजी से डाटा ट्रांसमिशन करता है। यह डाटा ट्रांसमिशन के लिए उसी तरह स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करता है जिस तरह हम चौड़ी या कई लेन वाले एक्सप्रेसवे पर अपनी गाड़ी काफी तेज दौड़ाते हैं। स्पेक्ट्रम हाईवे की तरह होते हैं, जिस पर मोबाइल सिग्नल दौड़ते हैं। चूंकि एलटीई में चौड़े स्पैक्ट्रम का इस्तेमाल करते हैं।


इसलिए एटीई आधारित 4जी नेटवर्क 3जी की तुलना में चार गुना तेजी से डाटा भेजते हैं। उदाहरण के लिए आईपैड इस्तेमाल करने वाला एक यूजर 300 एमबीपीएस की स्पीड वाला वीडियो देख सकेगा और एक लैपटॉप इस्तेमाल करने वाला अपने स्क्रीन पर 25 एमबी की फाइल सेकेंडों में देख सकता है। एलटीई ऐसी वैंडविड्थ टेक्नोलॉजी है जो 2जी, और 3जी पर भी काम करती है। लिहाजा ऑपरेटर अपने नेटवर्क को एलटीई पर अपग्रेड कर सकता है।


एलटीई कब विकसित हुआ?
एलटीई नवंबर, 2004 में आया। इसे थर्ड जेनेरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट (टीजीपीपी) के तहत लाया गया। टीजीपीपी टॉप टेलीकॉम कंपनियों का अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ है। यूटीएमएस के बाद यह  नई पीढ़ी की टेक्नोलॉजी लाने की कोशिश में लगा है। 3जी टेक्नोलॉजी जीएसएम पर आधारित है।
क्या एलटीई वाईमैक्स से बेहतर है?


वायरलेस कम्यूनिकेशन जोड़ी और बगैर जोड़ी के स्पेक्ट्रम पर बढ़ते हैं। जोड़ी वाले स्पेक्ट्रम में वायुतरंगों के दो टुकड़े होते हैं। इससे सूचनाएं भेजी और प्राप्त की जाती है। जबकि बगैर जोड़ के स्पेक्ट्रम में ही एक टुकड़ा होता है। इससे सूचना सिर्फ या तो भेजी जा सकती है या प्राप्त की जा सकती। दोनों काम एक साथ नहीं हो सकते। वॉयस सिगनल जोड़े वाले स्पेक्ट्रम पर तेजी से चलते हैं।


जबकि डाटा कम्यूनिकेशन बगैर जोड़े वाले स्पेक्ट्रम पर बेहतर तरीके से काम करता है। जबकि वाईमैक्स में एक फायदा यह है कि यह अकेला वायरलेस टेक्नोलॉजी है गैर जोड़ी वाले स्पेक्ट्रम पर वाणिज्यिक तरीके से काम करता है।

 
 
 
 
 
 
 
 
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