बढ़ेगी अल्यूमीनियम खपत : रूसाल

उम्मीद - चीन, भारत और उत्तरी अमेरिका की अर्थव्यवस्था से बाजार को रफ्तार
विश्व बाजार
: चीन के बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट में निवेश से खपत बढ़ेगी
: भारत व उ. अमेरिका की मांग भी मूल्य को समर्थन देंगे
: कुल खपत बढ़कर 500 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान
: पिछले साल रूसाल का अल्यूमीनियम उत्पादन सुधरा
दुनिया की सबसे बड़ी अल्यूमीनियम उत्पादक कंपनी रूस की रूसाल ने संभावना जताई है कि चालू वर्ष 2013 के दौरान वैश्विक स्तर पर अल्यूमीनियम की मांग छह फीसदी बढ़ सकती है। चीन में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों में बड़े पैमाने पर निवेश होने से अल्यूमीनियम की खपत को बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार के कारण अल्यूमीनियम के लिए पिछला वर्ष काफी कठिन रहा था। इसके बाद रशिया युनाइटेड कंपनी रूसाल ने सकारात्मक उम्मीद जताई है। हालांकि उसने कहा है कि यूरोप का कर्ज संकट कुछ समय के लिए अल्यूमीनियम के मूल्य पर दबाव डाल सकता है। रूस के अरबपति ओलेग देरीपास्का के नियंत्रण वाली कंपनी रूसाल हांगकांग में सूचीबद्ध है।
कंपनी ने कहा कि भारत और उत्तरी अमेरिका में अल्यूमीनियम की मांग बढऩे के कारण मूल्य को समर्थन मिलेगा। अल्यूमीनियम का ज्यादा इस्तेमाल कोल्ड ड्रिंक्स कैन, एयरक्राफ्ट व आईपैड बनाने में होता है। हांगकांग स्टॉक मार्केट में पेश किए गए दस्तावेज में कंपनी ने कहा कि इस साल ये बाजार अल्यूमीनियम खपत के लिहाज से आगे रह सकते हैं।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के अलावा बड़े पैमाने पर इंफ्रा प्रोजेक्टों में निवेश के कारण मांग बढ़ेगी। इस साल अल्यूमीनियम की वैश्विक खपत बढ़कर 500 लाख टन तक पहुंच सकती है। कंपनी का अनुमान है कि इस साल भी चीन में अल्यूमीनियम की खपत सबसे तेज रहेगी।
वहां अल्यूमीनियम की खपत 9.5 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। इस तरह भारत में खपत 6 फीसदी और उत्तरी अमेरिका में 5 फीसदी की दर से बढऩे का अनुमान है। पिछले वर्ष 2012 के दौरान रूस की इस कंपनी का अल्यूमीनियम उत्पादन एक फीसदी बढ़कर 41.7 लाख टन हो गया।
जबकि अल्यूमिना (अल्युमीनियम का प्राइमरी उत्पाद) उत्पादन 8 फीसदी घटकर 74.8 लाख टन रह गया। कंपनी का अनुमान है कि इस साल करीब 10-15 लाख टन अल्यूमीनियम की खपत नहीं हो पाएगी।








