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खरीदारी में डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को दें तवज्जो

उत्तम नायक | Jan 27, 2013, 11:42AM IST
खरीदारी में डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को दें तवज्जो

सावधानी भी जरूरी
अपना डेबिट कार्ड का पिन नंबर और नेट बैंकिंग का पासवर्ड किसी से  न बांटे
किसी वेबसाइट से शॉपिंग करने से पहले उसकी वैधता अवश्य जांचें। आपको उसी वेबसाइट से शॉपिंग करनी चाहिए जिसमें वैरिफाइड बाई वीजा या अन्य सिक्योर पेमेंट गेटवे मौजूद है
जब आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं उस वक्त ब्राउजर में सेव पासवर्ड का विकल्प हमेशा बंद कर दें और कंप्यूटर की मेमरी से कैशे हटा दें
लोगों को सुरक्षित माहौल में कैशलेस ट्रांजेक्शन करने के लिए प्रोत्साहित करने से भारत में इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का विकास होगा। अगर हम थोड़ी सावधानी बरतें तो ऑनलाइन शॉपिंग करने मजेदार और सुरक्षित है

पिछले कुछ सालों में ई-कॉमर्स के उपभोक्ताओं की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और यह इंडस्ट्री काफी रफ्तार से बढ़ रही है। इस बदलाव का कारण यह है कि उपभोक्ता काफी रफ्तार से रिटेल से ईटेल की ओर बढ़ रहे हैं। लिहाजा पारंपरिक तरीके से कारोबार करने वाले लोग भी अब अपने कारोबार को ऑनलाइन बनाने में लगे हुए हैं।

एक्सेल पार्टनर की एक रिसर्च में पता चला कि साल 2012 के दौरान करीब 1.3 करोड़ उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन शॉपिंग की जिससे इस इंडस्ट्री का कारोबार करीब 80 करोड़ डॉलर रहा।

इसके साथ ही डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। फिलहाल ऐसे 30 करोड़ डेबिट कार्ड चलन में हैं। इनका इस्तेमाल रफ्तार से बढ़ रहा है और क्रेडिट कार्ड पीछे छूट गया है। कम शब्दों में कहें तो भारतीय लोगों को इसके माध्यम से भुगतान करना ज्यादा रास आता है।

जब भुगतान का माध्यम और ऑनलाइन भुगतान का तरीका एक हो जाता है तो क्या होता है? इससे ग्रोथ और संभावनाओं में इजाफा होता है। इससे भविष्य में ऐसे लेन-देन में कई गुना ज्यादा वृद्धि देखने को मिलेगी।

डेबिट कार्ड को तवज्जो क्यों
भारत में उपभोक्ताओं के ऑनलाइन खरीदारी के स्वभाव में काफी बदलाव आया है। भारतीय आम तौर पर स्वभाव से मितव्ययी होते हैं और आय से ज्यादा खर्च करने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं होती है। उन्हें कर्ज से भी डर लगता है जिसकी वजह से भुगतान करने के लिए क्रेडिट कार्ड के बजाय डेबिट कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है। जाहिर सी बात है कि हम उतने का ही भुगतान करना चाहते हैं जितना फंड हमारे बैंक अकाउंट में मौजूद है।

डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान की एक और वजह यह भी है कि इसमें उपभोक्ताओं को कई फायदे और इनाम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। तो ऐसे में जिन ग्राहकों को ऑनलाइन भारी छूट वाले ऑफर की चाह है वे इसका जबरदस्त इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के तौर पर कंपनियां चैनल एफिशियंसी  के जरिए उपभोक्ताओं को बेहतरीन डील और ऑफर उपलब्ध करा रही हैं।

ई-कॉमर्स में कारोबार के कई स्तर हैं। इसमें छोटे कारोबारी भी बड़ी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं क्योंकि इनके पास सेंट्रलाइज्ड लॉजिस्टिक, शिपिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की सुविधा मौजूद है जिससे लागत काफी कम हो जाती है।

ऐसे में टियर-1 शहरों की कीमत वाले प्रोडक्ट को छोटे शहरों के उपभोक्ता घर बैठे आसानी से खरीद सकते हैं। इससे सबको फायदा होता है। यही कारण है कि ऑनलाइन शॉपिंग करने से हमारी लागत काफी कम हो जाती है।

सुरक्षित माहौल तैयार करना
ऑनलाइन शॉपिंग करने में सबसे प्रमुख चीज है भरोसा। हालांकि आपने कई बार ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में नकारात्मक खबरें ही पढ़ी होंगी इसके  बावजूद एशिया प्रशांत के अन्य इलाकों की तुलना में भारत में ऑनलाइन फ्रॉड के काफी कम मामले आते हैं।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और उपभोक्ताओं के बीच बढ़ रही जागरूकता के चलते ऑनलाइन फ्रॉड के मामले 0.01 फीसदी से भी कम स्तर पर पहुंच गए हैं।

इतनी कड़ी सुरक्षा, नियमन और तकनीक के मेल से लाई जा सकी है। कई बैंक, टेलीकॉम ऑपरेटर, पेमेंट-टेक्नालॉजी कंपनियों ने ऑनलाइन घोटालों से निबटने के भारी निवेश किया है।

इसके तहत घोटाला रोकने के लिए कई स्तर पर इंतजाम किया गया है। कार्ड के इस्तेमाल के डेटा का विश्लेषण रियल टाइम में होता है इससे वित्तीय संस्थानों को घोटाले रोकने में काफी मदद मिलती है।

रिजर्व बैंक ने भी बैंकिंग और पेमेंट की ढांचागत सुविधाओं को पुख्ता करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। साल 2009 में रिजर्व बैंक ने ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन के लिए 2 फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2एफए) अनिवार्य कर दिया जिसके तहत अतिरिक्त लेयर का ऑथेंटिकेशन जरूरी है।

2एफए वो प्रक्रिया है जिसके तहत ट्रांजेक्शन में यूजर की दो जानकारियों की जरूरत पड़ती है। उदाहरण के तौर पर पिन नंबर, स्मार्ट कार्ड नंबर या फिर बायोमीट्रिक डीटेल्स। रिजर्व बैंक ने सभी कार्ड पर आधारित आईवीआर ट्रांजेक्शन के लिए 2एफए को जरूरी बना दिया है।

आप सुरक्षित माहौल में ऑनलाइन शॉपिंग करें यह सुनिश्चित करना केवल नियामक और इंडस्ट्री की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें हर व्यक्ति की अहम भूमिका है। कुछ आसान तरीकों से आप अपनी ऑनलाइन शॉपिंग को सुरक्षित और मजेदार बना सकते हैँ।
उत्तम नायक - लेखक वीजा के ग्रुप कंट्री मैनेजर (भारत और दक्षिणी एशिया) हैं।

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पिछले कुछ सालों में ई-कॉमर्स के उपभोक्ताओं की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और यह इंडस्ट्री काफी रफ्तार से बढ़ रही है।

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