बढिय़ा गवर्नेंस वाली कंपनियों को ही मिलेगा बैंक लाइसेंस

नई दिल्ली - आरबीआई ने तय किया है कि बैंकिंग प्रणाली को काफी गंभीरता से लेने वाली कंपनियों को ही नया बैंक खोलने की इजाजत दी जाएगी। शुक्रवार को जारी अधिसूचना में प्रमोटर और प्रमोटर समूहों के लिए योग्यता का मापदंड सख्त रखा गया है।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि लाइसेंस सिर्फ उनको ही दिया जाएगा, जिनका कॉर्पोरेट गवर्नेंस रिकॉर्ड अच्छा रहा है। आरबीआई ने नॉन-ऑपरेटिव फाइनेंस होल्डिंग कंपनी (एनओएफएचसी) के कॉरपोरेट ढांचे पर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इनमें कहा गया है कि किसी व्यक्तिगत या उसके रिश्तेदारों का वोटिंग राइट या फिर कंपनी में मौजूद रिश्तेदारों का वोटिंग राइट अगर 50 फीसदी से कम नहीं है तो एनओएफएचसी में उसकी वोटिंग इक्विटी 10' से ज्यादा नहीं हो सकती है। इसके अलावा, प्रमोटर समूह से बनी कंपनियों, जिसमें पब्लिक होल्डिंग 51 फीसदी से कम नहीं है, में आम लोगों का हिस्सा 51' से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि बैंक और समूह की कंपनियों की अन्य वित्तीय सेवाओं पर एनओएफएचसी का ही अधिकार होगा। इन सभी पर आरबीआई तथा वित्तीय नियामकों का नियंत्रण होगा। इसलिए केवल गैर वित्तीय सेवाओं वाली कंपनियों और नॉन-ऑपरेटिव फाइनेंस होल्डिंग कंपनियों में शामिल प्रमोटर ही एनओएफएचसी में शेयरधारक बन सकते हैं।
इसमें कहा गया है कि फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियां, जिनमें एनओएफएचसी की हिस्सेदारी है, वे नॉन-ऑपरेटिव फाइनेंस होल्डिंग कंपनी में शेयरधारक नहीं बन सकती हैं।








