सरकारी कंपनियों के शेयरों के बारे में सुधर रही बैंकरों की धारणा

कारोबार में सरकारी हस्तक्षेप की आशंका के मद्देनजर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को लेकर आम तौर पर निवेश सलाहकारों की धारणा नकारात्मक रहा करती है। लेकिन, अब इसमें बदलाव की बयार बहती दिखाई दे रही है।
इनवेस्टमेंट बैंकिंग दिग्गज मॉर्गन स्टैनली ने अपने ताजा नोट में सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू)शेयरों की रेटिंग बढ़ाने के संकेत दिए हैं। उधर, बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच ने पीएसयू बैंकों को अपग्रेड कर दिया है।
क्या कहा मॉर्गन स्टैनली ने
मंगलवार को जारी अपने नोट में मॉर्गन स्टैनली ने कहा है कि भारत की सरकारी कंपनियों की रेटिंग में जल्द ही बदलाव किया जा सकता है। बैंक ने कहा है कि सरकारी कंपनियों के शेयर इस समय एमएससीआई इंडिया इंडेक्स की तुलना में कई साल के निचले वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं।
साथ ही, आने वाले महीनों में इन शेयरों को डिफेंसिव पर साइक्लिकल्स में शिफ्टिंग का भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के स्टॉक्स के लिए एक एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) बनाए जाने से भी इन पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच की बैंकों पर राय
बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच ने मंगलवार को ही निजी क्षेत्र के कई बैंकों के साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों को अपग्रेड कर दिया। इसके तहत, बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच ने एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा व ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को खरीदने की राय दी है।
बैंक ने कहा है कि रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती किए जाने के मद्देनजर बांड यील्ड में आ रही गिरावट, लोन रिकवरी उम्मीद से बेहतर रहने और क्वालिटी का दबाव घटने के चलते इन बैंकों को अपग्रेड किया गया है।
साथ ही, बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच ने निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक व एक्सिस बैंक के लिए अपना प्राइस टार्गेट भी बढ़ा दिया है। बैंक ने आईसीआईसीआई बैंक को खरीदे जा सकने वाले बैंकिंग शेयरों की सूची में टॉप पर रखा है, जबकि एचडीएफसी बैंक व एक्सिस बैंक को प्राथमिकता वाले स्टॉक्स की सूची में रखा है।
तीनों ही बैंकों के शेयरों को खरीदने की राय दी गई है। बैंक ने कहा है कि विशेष रूप से मीडियम टर्म में निजी क्षेत्र के बैंक ज्यादा आय व मुनाफा अर्जित करते हुए नजर आ रहे हैं।
डेलॉय का सर्वे सकारात्मक
ग्लोबल कंसलटेंसी फर्म द्वारा किए गए एक सर्वे में भारत को एक आकर्षक निवेश गन्तव्य बताया गया है। हालांकि, सर्वे में यह भी कहा गया है कि टैक्स से जुड़े कुछ प्रावधानों को लेकर निवेशकों का रुख थोड़ा सतर्कता भरा है और इन्हें स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
डेलॉय ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वोडाफोन मामले में दिए गए फैसले के चलते दुनिया भर के निवेशकों की निगाह भारत के टैक्स प्रावधानों की तरफ मुड़ गई।
इसी वजह से, सर्वे में शामिल 53 फीसदी लोगों ने माना है कि टैक्स प्रावधानों को लेकर बनी अनिश्चितता भारत में कारोबार करने के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती है। साथ ही, 80 फीसदी लोगों का मानना है कि भारत में लगने वाले 20-30 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स को उचित स्तर पर लाया जाना चाहिए।
अगले पांच सालों के दौरान होगी 50 पीएसयू की लिस्टिंग
अगले पांच वर्षों के दौरान केन्द्र सरकार की 50 कंपनियों (पीएसयू) को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कराने की तैयारी है। दरअसल, स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के पूर्व अध्यक्ष एस के रूंगटा की अध्यक्षता में सीपीएसई रिफार्म पर बनी एक कमेटी ने एक रिपोर्ट दी थी, जिसे योजना आयोग ने मान लिया है और इसी को कार्यरूप देने में केन्द्रीय सार्वजनिक उद्यम विभाग इन दिनों जुटा है।
सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) के सचिव ओ. पी. रावत ने यहां मंगलवार को सार्वजनिक उद्यमों पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में बताया कि रूंगटा कमेटी की सिफारिश वर्ष 2011 में ही योजना आयोग के पास पहुंच गई थी।
योजना आयोग की तरफ से डीपीई के पास यह रिपोर्ट कार्रवाई के लिए मई 2011 में भेजा गया। इसका अध्ययन हो चुका है और अब इसके आधार पर कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले महीने तक यह प्रस्ताव कैबिनेट के पास पहुंच जाएगा।
रूंगटा कमेटी ने सुझाव दिया था कि तीन वर्ष में कम से कम 30 पीएसयू की लिस्टिंग हो और पांच साल में यह संख्या 50 से ऊपर पहुंच जानी चाहिए। इस समय सेल, भेल, गेल, इंडियन आयल, एमएमटीसी, कोल इंडिया लिमिटेड, मैगनीज ओर इंडिया लिमिटेड, हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड समेत 50 से भी ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं।
रावत ने बताया कि कमेटी ने बेहतर कारपोरेट गवर्नेंस, कारोबार में विस्तार, कामकाज में पारदर्शिता आदि के लिए 40 सुझाव दिए हैं। उसमें कहा गया है कि सरकारी कंपनियों के निदेशक मंडल को अधिक अधिकार मिले ताकि उनका काम निर्बाध तरीके से हो।
यही नहीं, कामकाज की बेहतरी के लिए यदि निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ गठजोड़ करना पड़ता है तो उसके लिए भी ज्यादा फाइल बाजी नहीं करनी पड़े, आसानी से अनुमति मिल जाए।
कार्यक्रम में उपस्थित एस के रूंगटा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि किसी भी पीएसयू की लिस्टिंग होती है तो उसके कामकाज में सुधार होता है। उस पीएसयू के निदेशक मंडल की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, क्योंकि उसके हर कदम पर बाजार नियामक और शेयर बाजारों की नजर होती है।








