बांबे स्टॉक एक्सचेंज(बीएसई) में 202.37 अंक की गिरावट

रहेगी उथल-पुथल - मुख्य महंगाई दर के आंकड़े कल जारी होंगे और बाजार में खासी उथल-पुथल जारी रहने की संभावना है। साथ ही, घरेलू बाजारों पर वैश्विक घटनाओं का भी असर दिखाई देगा। - निधि सारस्वत, सीनियर रिसर्च एनालिस्ट, बोनांजा पोर्टफोलियो
रिजर्व बैंक पर दबाव- आरबीआई की 19 मार्च की बैठक से पहले बाजार की दिशा तय करने के लिहाज से डब्लूपीआई के आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण होंगे। अगर महंगाई दर में खासी गिरावट नहीं आती है, रिजर्व बैंक चालू खाता घाटा व सीपीआई के दबाव का हवाला देते हुए रेट कट को टाल सकता है। - अनीष श्रीवास्तव, सीआईओ, आईडीबीआई लाइफ इंश्योरेंस
गुरुवार को जारी होने वाले मुख्य महंगाई दर के आंकड़ों से ठीक पहले बुधवार को घरेलू बाजारों में मार्च माह की सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। विशेषरूप से बैंकिंग, ऑटो व कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में हुई भारी बिकवाली के दबाव में बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक 202.37 अंक की गिरावट के साथ एक सप्ताह के निचले स्तर 19,362.55 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स की यह चालू माह की सबसे तेज गिरावट रही। इस सप्ताह के पहले तीन कारोबारी सत्रों के दौरान सेंसेक्स 320.68 अंक टूट चुका है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) भी 62.90 अंक की गिरावट के साथ 5,900 अंक के स्तर को तोड़ते हुए 5,851.20 अंक पर बंद हुआ।
ब्रोकरों के मुताबिक, गुरुवार को जारी होने वाले थोक मूल्य सूचकांक (डब्लूपीआई) के आंकड़ों से पहले निवेशकों का रुझान बेहद सतर्कता भरा रहा। निवेशकों को आशंका है कि खुदरा क्षेत्र की महंगाई दर की तरह ही मुख्य महंगाई दर के आंकड़ों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो रिजर्व बैंक के लिए पॉलिसी दरों में कटौती करना खासा मुश्किल साबित हो सकता है।
जनवरी माह के दौरान औद्योगिक उत्पादन की ग्रोथ में बढ़ोतरी से रिजर्व बैंक पर पॉलिसी दरों में कटौती का दबाव पहले ही कम हो चुका है। उधर, मॉर्गन स्टैनली ने वित्त वर्ष 2013-14 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़ोतरी के अनुमान को 6.2 फीसदी से घटाकर छह फीसदी करने की घोषणा की। मॉर्गन स्टैनली ने इसके लिए कई घरेलू व बाहरी वजहों का हवाला दिया है।
इस खबर का भी बाजार की धारणा पर विपरीत असर पड़ा। रिजर्व बैंक द्वारा पॉलिसी दरों में कटौती किए जाने की संभावना घटने से विशेष रूप से ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील बैंकिंग व रियल्टी शेयरों में खासी बिकवाली देखी गई। बीएसई का बैंकेक्स 2.18 फीसदी और ऑटो इंडेक्स 1.53 फीसदी टूट गया।
बोनांजा पोर्टफोलियो की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निधि सारस्वत ने कहा कि मुख्य महंगाई दर के आंकड़े कल जारी होंगे और बाजार में खासी उथल-पुथल जारी रहने की संभावना है। साथ ही, घरेलू बाजारों पर वैश्विक घटनाओं का भी असर दिखाई देगा।
आईडीबीआई लाइफ इंश्योरेंस के सीआईओ अनीष श्रीवास्तव ने कहा कि आरबीआई की 19 मार्च की बैठक से पहले बाजार की दिशा तय करने के लिहाज से डब्लूपीआई के आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण होंगे। अगर महंगाई दर में खासी गिरावट नहीं आती है, रिजर्व बैंक चालू खाता घाटा व सीपीआई के दबाव का हवाला देते हुए रेट कट को टाल सकता है।
ग्लोबल स्तर पर देखें तो एशिया के अधिकांश बाजारों में गिरावट रही। चीन, जापान, सिंगापुर व हांगकांग के मुख्य इंडेक्स 0.44 फीसदी से लेकर 1.46 फीसदी तक टूट गए।
हालांकि, दक्षिण कोरिया व ताइवान के बाजारों में हल्की बढ़त रही। दोपहर बाद के कारोबार में यूरोपीय बाजारों की गिरावट और गहरी होती दिखाई दे रही थी। खबर लिखे जाते समय ब्रिटेन के एफटीएसई में एक फीसदी, जर्मनी के डेक्स में 0.20 फीसदी और फ्रांस के सीएसी में 0.54 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा था।
घरेलू स्तर पर बीएसई सेंसेक्स में शामिल 30 में से 22 कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही। हिंडाल्को का शेयर 3.67 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक का 3.25 फीसदी, बजाज ऑटो का 3.16 फीसदी, मारुति सुजुकी का 3.07 फीसदी, जिंदल स्टील का 2.84 फीसदी, भेल का 1.99 फीसदी, इंफोसिस का 1.89 फीसदी, एचडीएफसी का 1.77 फीसदी, गेल इंडिया का 1.68 फीसदी, एचडीएफसी बैंक का 1.20 फीसदी, टाटा मोटर्स का 1.15 फीसदी, सिप्ला का 1.07 फीसदी, टाटा स्टील का 1.07 फीसदी और एसबीआई का शेयर एक फीसदी टूट गया।
दूसरी ओर सन फार्मा में 1.25 फीसदी और आईटीसी में 0.89 फीसदी की मजबूती रही। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को घरेलू शेयरों में 733.25 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया।
ग्लोबल हालात - ग्लोबल स्तर पर देखें तो एशिया के अधिकांश बाजारों में गिरावट रही। चीन, जापान, सिंगापुर व हांगकांग के मुख्य इंडेक्स 0.44 फीसदी से लेकर 1.46 फीसदी तक टूट गए। हालांकि, दक्षिण कोरिया व ताइवान के बाजारों में हल्की बढ़त रही।
दोपहर बाद के कारोबार में यूरोपीय बाजारों की गिरावट और गहरी होती दिखाई दे रही थी। खबर लिखे जाते समय ब्रिटेन के एफटीएसई में एक फीसदी, जर्मनी के डेक्स में 0.20 फीसदी और फ्रांस के सीएसी में 0.54 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा था।








