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गुड़ में बिकवाली से कमा सकते हैं मुनाफा

आर. एस. राणा नई दिल्ली | Feb 09, 2013, 00:06AM IST
 
 


फायदे का सौदा
गुड़ की कीमतों में गिरावट के हैं आसार। इसलिए बिकवाली के जरिए कमाया जा सकता है मुनाफा
चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश में गन्ने का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है जबकि चीनी के दाम नीचे बने हुए हैं। ऐसे में चीनी मिलों द्वारा गन्ने की खरीद पिछले साल की तुलना में कम की जा रही है
कोल्हू संचालकों के पास ज्यादा गन्ने की आवक ज्यादा हो रही है। इसीलिए चालू पेराई सीजन में गुड़ की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है

एनसीडीईएक्स पर मार्च महीने के वायदा अनुबंध में गुड़ के भाव 31 जनवरी को 1,119 रुपये प्रति 40 किलो था जबकि शुक्रवार को इसका भाव घटकर 1,102 रुपये प्रति 40 किलो पर कारोबार करते देखा गया
गुड़ के प्रमुख खपत राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मांग सीमित बनी हुई है। इसलिए मार्च मध्य के बाद गुड़ की कीमतों में गिरावट बन सकती है

प्रमुख उत्पादक मंडी मुजफ्फरनगर में गुड़ का स्टॉक पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.23 लाख कट्टे (एक कट्टा-40 किलो) कम है लेकिन उत्पादक क्षेत्रों में मौसम साफ होने से आगामी दिनों में गुड़ की दैनिक आवक बढ़ेगी। वैसे भी चीनी के दाम नीचे ही बने हुए हैं।

ऐसे में वायदा बाजार में लंबी अवधि के निवेशक गुड़ में बिकवाली करके ही मुनाफा कमा सकते हैं। फेडरेशन ऑफ गुड़ ट्रेडर्स के अध्यक्ष अरुण खंडेलवाल ने बताया कि उत्पादक क्षेत्रों में मौसम खराब होने से गुड़ का उत्पादन और आवक दोनों प्रभावित हुई है लेकिन पिछले दो दिनों से मौसम साफ हो गया है।

ऐसे में उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक गुड़ की दैनिक आवक बढ़ जायेगी। जिससे इसकी मौजूदा कीमतों में मंदा आने की संभावना है। मुजफ्फरनगर मंडी में चालू पेराई सीजन में अभी तक 3.39 लाख कट्टों का ही स्टॉक हो पाया है जोकि पिछले साल के 4.62 लाख कट्टों से 1.23 लाख कट्टे कम है। पिछले साल मुजफ्फरनगर मंडी में गुड़ का कुल स्टॉक 14.7 लाख कट्टों का स्टॉक हुआ था।

खंडेलवाल ने बताया कि चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश में गन्ने का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है जबकि चीनी के दाम नीचे बने हुए हैं। ऐसे में चीनी मिलों द्वारा गन्ने की खरीद पिछले साल की तुलना में कम की जा रही है। जिससे कोल्हू संचालकों के पास ज्यादा गन्ने की आवक ज्यादा हो रही है। इसीलिए चालू पेराई सीजन में गुड़ की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है।

एनसीडीईएक्स पर मार्च महीने के वायदा अनुबंध में गुड़ के भाव 31 जनवरी को 1,119 रुपये प्रति 40 किलो था जबकि शुक्रवार को इसका भाव घटकर 1,102 रुपये प्रति 40 किलो पर कारोबार करते देखा गया।

ब्रोकिंग फर्म इंडियाबुल्स कमोडिटी लिमिटेड के अस्सिटेंट वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी) बदरुद्दीन ने बताया कि रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार वायदा बाजार में जिंसों के कारोबारियों को बैंकों से ऋण नहीं दिए जाने से स्टॉकिस्टों की खरीद कमजोर है।

वैसे भी उत्तर प्रदेश में गन्ने का उत्पादन पिछले साल से ज्यादा है जबकि चीनी के दाम नीचे ही बने हुए हैं। इसलिए वायदा बाजार में लंबी अवधि के निवेशक गुड़ में बिकवाली करके ही मुनाफा कमा सकते हैं।
गुड़ कारोबारी अनिल गुप्ता ने बताया कि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मौसम साफ हो गया है जिससे मध्य फरवरी तक गुड़ की दैनिक आवक बढ़ जायेगी।

गुड़ के प्रमुख खपत राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मांग सीमित बनी हुई है। इसलिए मार्च मध्य के बाद गुड़ की कीमतों में गिरावट बन सकती है। दिल्ली में गुड़ चाकू का भाव शुक्रवार को 2,800-2,900 रुपये और गुड़ पेड़ी का भाव 2,900-3,000 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

गुड़ के थोक कारोबारी हरिशंकर मुंदड़ा ने बताया कि मौसम खराब होने से मंडियों में गुड़ की दैनिक आवक घटी है जिसकी वजह से सप्ताहभर में गुड़ की कीमतों में 25 से 50 रुपये प्रति 40 किलो की तेजी आई है।

मुजफ्फरनगर मंडी में शुक्रवार को गुड़ चाकू का भाव 1,025 से 1,100 रुपये, लड्डू गुड़ का भाव 1,050 से 1,100 रुपये और खुरपापाड़ गुड़ का भाव 1,025 से 1,050 रुपये प्रति 40 किलो रहा।

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प्रमुख उत्पादक मंडी मुजफ्फरनगर में गुड़ का स्टॉक पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.23 लाख कट्टे (एक कट्टा-40 किलो) कम है

 

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