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वैश्विक मूल्य घटने से गिर सकता है कॉफी निर्यात

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Jan 26, 2013, 00:04AM IST
वैश्विक मूल्य घटने से गिर सकता है कॉफी निर्यात

कॉफी की अंतरराष्ट्रीय कीमत में लगातार हो रही गिरावट से चालू वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान कॉफी के निर्यात में कमी की आशंका है। कॉफी बोर्ड के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग है, लेकिन कॉफी के कई प्रमुख उत्पादक देशों में कॉफी के अधिक उत्पादन से भाव गिरे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव कम होने से भारतीय निर्यातकों के लिए सौदे करना फायदेमंद नहीं है। इसके कारण वे निर्यात में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। कॉफी निर्यात के प्रोत्साहन के लिए बोर्ड ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में निर्यातकों को मिलने वाले इंसेंटिव में बढ़ोतरी की भी मांग की है।

कॉफी बोर्ड के सचिव एम. चंद्रसेकर के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान 2.2 लाख टन कॉफी का निर्यात किया गया है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक यह निर्यात 2.6 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है।

वहीं, पिछले वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान 3.15 लाख टन कॉफी का निर्यात किया गया था। चंद्रसेकर ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान कॉफी निर्यातकों को चालू वित्त वर्ष के मुकाबले अच्छी कीमत मिल रही थी।

उन्होंने बताया कि कॉफी के घरेलू उत्पादन में कोई कमी नहीं आई है, लेकिन निर्यातक अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत का इंतजार कर रहे हैं। एक साल पहले उम्दा अरेबिका की कीमत 13,000 रुपये प्रति बैग (एक बैग- 50 किलोग्राम) थी जो वर्तमान में 7000 रुपये प्रति बैग के स्तर पर है।

रोबस्ता कॉफी के दाम में भी पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। कॉफी रिसर्च से जुड़े उप निदेशक एन. रामामूर्ति के मुताबिक ब्राजील में कॉफी के उत्पादन में खासी बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत नीचे आ गई। 70 फीसदी से अधिक कॉफी का निर्यात किया जाता है।

चंद्रसेकर के मुताबिक उन्होंने 12वीं पंचवर्षीय योजना में निर्यात के लिए वैल्यू एडिशन करने वाले निर्यातकों को 2 रुपये प्रति किलो की जगह 3 रुपये प्रति किलोग्राम की की दर से इंसेंटिव देने का प्रस्ताव रखा है।

वहीं हाई वैल्यू मार्केट में निर्यात करने वाले निर्यातकों को एक रुपये प्रति किलोग्राम की जगह दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से इंसेंटिव देने की सिफारिश की है।

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कॉफी बोर्ड के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग है, लेकिन कॉफी के कई प्रमुख उत्पादक देशों में कॉफी के अधिक उत्पादन से भाव गिरे हैं।

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