'दिल्ली के सामूहिक दुष्कर्म ने समाज को झकझोरा'

पाक, हमारी दोस्ती की पहल को कमजोरी न समझे : प्रणब
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पाकिस्तान को आगाह किया है कि उसकी शह वाले आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेंगे। वह दोस्ती की हमारी पहल को कमजोरी न समझे। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक नीतियों के नतीजे गांवों, स्कूलों और अस्पतालों में दिखना चाहिए।
राजधानी दिल्ली में हुए बर्बर सामूहिक रेप और उसके बाद नाराज युवाओं के प्रदर्शन को जायज ठहराते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सवाल उठाया कि क्या देश की विधायिका उभरते भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है या इसमें मौलिक सुधार की जरूरत है। बतौर राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में मुखर्जी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता का भरोसा जीतना चाहिए।
युवाओं की व्यग्रता और अधीरता को तेजी और प्रतिष्ठा से पूरी व्यवस्था के साथ बदलाव की ओर निर्देशित करना होगा। उन्होंने अपने भाषण में राजधानी में युवती के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्या की वारदात की वारदात का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया।
राष्ट्रपति ने अफसोस जताया कि यह युवती दुष्कर्म और हत्या का शिकार बनी।लेकिन यह युवती इस बात की प्रतीक है कि नये भारत को किस तरह बनने की कोशिश करनी चाहिए। इस वारदात ने हमारे हृदय को छेद दिया और हमारे मन को बेचैन कर दिया। हमने एक अनमोल जीवन से ज्यादा खोया है।
दरअसल हमने एक सपना खोया है। राष्ट्रपति ने सवाल किया कि अगर आज का युवा भारतीय नाराज है तो क्या हम अपने युवाओं को कैसे दोषी ठहरा सकते हैं? मुखर्जी ने कहा कि देश का एक कानून है लेकिन एक उससे भी ऊंचा कानून है।
महिला की गरिमा उसी बड़े कानून का नीति निर्देशक सिद्धांत है जिसे भारतीय सभ्यता कहते हैं। हम जब भी किसी महिला के साथ बर्बरता करते हैं तो हम अपने देश की आत्मा को जख्मी करते हैं। बहरहाल, अब समय आ गया है कि देश अपने नैतिक नियमों को फिर से तय करे।
निराशावाद के प्रसार की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि समस्याओं का समाधान चर्चा और नजरियों के मेल-मिलाप से खोजा जाना चाहिए। जनता को भरोसा होना चाहिए कि शासन अच्छाई के लिए है और इसके लिए हमें अच्छा शासन देना चाहिए।









