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राज्यों की मांगें शामिल होंगी खाद्य सुरक्षा बिल में

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Feb 15, 2013, 02:44AM IST
 
 


राज्यों पर नहीं बल्कि केंद्र पर खाद्य सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा : थॉमस

संशोधित खाद्य सुरक्षा बिल में खाद्यान्न आवंटन और गरीबों की संख्या निर्धारण के लिए राज्यों की मांगों पर गौर किया जायेगा। गुरुवार को खाद्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. के वी थॉमस ने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल से राज्यों पर सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।

संशोधित खाद्य सुरक्षा बिल को बजट सत्र में संसद में पेश किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल पर राज्यों के साथ सकारात्मक बैठक रही। कई राज्यों ने अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) को लेकर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा कि संशोधित खाद्य सुरक्षा बिल में एएवाई श्रेणी के लाभार्थियों के हितों की रक्षा की जायेगी। एएवाई श्रेणी के परिवारों को वर्तमान में हर महीने 35 किलो खाद्यान्न का आवंटन किया जाता है इसके तहत गेहूं का आवंटन 2 रुपये और चावल का 3 रुपये किलो की दर से किया जाता है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल के लागू होने से राज्यों पर सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा।

केंद्र सरकार पर जरूर सब्सिडी का भार 20,000 करोड़ रुपये बढ़कर 1.20 लाख करोड़ रुपये हो जायेगा। उन्होंने तमिलनाडु समेत सभी राज्यों ने खाद्य सुरक्षा बिल का स्वागत किया है हालांकि खाद्यान्न आवंटन में कई राज्यों की अलग-अलग राय है जिन पर और विचार किए जाने की आवश्यकता है।

लाभार्थियों की पहचान के लिए राज्य सरकार को पूरी आजादी दी जायेगी। उन्होंने कहां कि खाद्य सुरक्षा बिल लागू होने के बाद राज्यों को खाद्यान्न आवंटन में कमी नहीं आयेगी।
उन्होंने बताया कि संसदीय समिति ने लाभार्थियों को हर महीने 5 किलो अनाज देने की सिफारिश की है जबकि खाद्य सुरक्षा बिल के मूल प्रारूप में बीपीएल परिवार के लाभार्थी को 7 किलो अनाज आवंटन का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि समिति ने खाद्य सुरक्षा विधेयक के उस प्रावधान पर मुहर लगाई है जिसमें 75 फीसदी ग्रामीण और 50 फीसदी शहरी आबादी को राशन दुकानों के माध्यम से रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की सिफारिश की है जिससे देश की 67 फीसदी आबादी को इसका लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल लागू होने के बाद कुल 600 से 620 लाख टन खाद्यान्न की आवश्यकता होगी जबकि इस समय 550 लाख टन खाद्यान्न का आवंटन किया जाता है।

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संशोधित खाद्य सुरक्षा बिल में खाद्यान्न आवंटन और गरीबों की संख्या निर्धारण के लिए राज्यों की मांगों पर गौर किया जायेगा।

 

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