विज्ञापन
 
Home >> Bazaar >> Khabre Baazar ki >> Each Promoter Must Buy A Separate Calculation

प्रमोटरों की प्रत्येक शेयर खरीद की अलग गणना जरूरी

बिजनेस भास्कर/प्रेट्र नई दिल्ली | Feb 23, 2013, 03:11AM IST
 
 


मौजूदा दिशानिर्देश
सेबी के मौजूदा दिशानिर्देशों के हिसाब से प्रमोटर अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए क्रीपिंग अधिग्रहण यानी धीरे-धीरे शेयर खरीदने की प्रक्रिया को अपना सकते हैं। प्रमोटरों को एक वित्त वर्ष के दौरान कंपनी की इक्विटी हिस्सेदारी के अधिकतम पांच फीसदी शेयर खरीदने की इजाजत है।

पूंजी बाजार नियामक सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने स्पष्ट किया है कि बाजारों में सूचीबद्ध किसी कंपनी के शेयरों की प्रमोटरों द्वारा की जाने वाली प्रत्येक ख्ररीद की उक्त अधिग्रहण के समय ही अलग से गणना की जाएगी। बाद में, वित्त वर्ष के आखिर में रेगुलेटरी मानकों के तहत तय सीमा की गणना के लिए इन सभी खरीदारियों को सम्मिलित रूप से जोड़ा जाएगा।

सेबी के मौजूदा दिशानिर्देशों के हिसाब से प्रमोटर अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए क्रीपिंग अधिग्रहण यानी धीरे-धीरे शेयर खरीदने की प्रक्रिया को अपना सकते हैं। प्रमोटरों को एक वित्त वर्ष के दौरान कंपनी की इक्विटी हिस्सेदारी के अधिकतम पांच फीसदी शेयर खरीदने की इजाजत है।

कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 55 फीसदी के स्तर पर पहुंचने तक यह कवायद की जा सकती है। कंपनी में एक बार में दो फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी बढ़ाने की स्थिति में प्रमोटरों को डिसक्लोजर भी देना होता है।

अक्ष ऑप्टीफाइबर द्वारा मांगे गए एक अनौपचारिक दिशानिर्देश के तहत सेबी ने कहा है कि पांच फीसदी की लिमिट की यह गणना प्रमोटरों द्वारा कुल मिलाकर खरीदे गए शेयरों के आधार पर नहीं की जा सकती।

इसके बजाय, हर बार शेयरों का अधिग्रहण करने के समय ही उनकी हिस्सेदारी की गणना की जाएगी और इसके बाद वित्त वर्ष के आख्रिर में पांच फीसदी की तय सीमा के नियम का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इन सभी अधिग्रहणों को संकलित कर गणना की जाएगी।

जहां तक अक्ष ऑप्टीफाइबर की बात है तो इस कंपनी में 31 मार्च, 2012 को प्रमोटरों की हिस्सेदारी 30.05 फीसदी पर थी, जो कि 31 जुलाई, 2012 को बढ़कर 33.70 फीसदी पर पहुंच गई। कंपनी के प्रमोटरों ने 1 अप्रैल, 2012 से 31 जुलाई, 2012 के बीच पांच बार की गई शेयरों की खरीद के जरिए हिस्सेदारी में यह बढ़ोतरी की थी।

अक्ष ऑप्टीफाइबर ने सेबी से पूछा था कि पांच फीसदी की लिमिट की गणना के लिए 31 मार्च, 2012 की हिस्सेदारी को आधार माना जाएगा या फिर मौजूदा हिस्सेदारी को।
 

आपकी राय

 

पूंजी बाजार नियामक सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने स्पष्ट किया है कि..

 

आपके विचार
 
 
कोड:
1 + 10

 
Ad Link
विज्ञापन
 

मार्केट

 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment