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अच्छी पैदावार व भारी स्टॉक से चने में गिरावट

अंकित तिवारी जयपुर | Feb 16, 2013, 03:43AM IST
 
 


राजस्थान समेत चना उत्पादन के प्रमुख राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में बेहतर उत्पादन के संकेतों से चने की कीमतों में गिरावट आ गई है। पड़ोसी राज्यों से चने की मांग में गिरावट एवं आगामी रबी सीजन में बेहतर पैदावार की संभावना के चलते चना की कीमतों में गिरावट का दौर है।

वहीं, विदेशी चने की आवक से देशी बाजार में चने के भाव पर दबाव बना है। सप्ताहभर में कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश सहित देशभर की मंडियों में ऑस्ट्रेलिया एवं तंजानिया से आयातित चने की आवक बढ़ गई है। वहीं, पोर्ट पर भी विदेशी चने के दाम कम करके बोले जा रहे है।

उत्पादन बेहतर रहने की संभावना के चलते स्टॉकिस्ट भी जमा स्टॉक निकालने में रुचि ले रहे हैं। प्रदेश में करीब 10 लाख क्ंिवटल चने का स्टॉक उपलब्ध है। इसके मुकाबले मांग काफी कम है।
प्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में नई फसल मंडियों में पहुंचने लगेगी, ऐसे में गोदामों में जमा स्टॉक की बिकवाली तेज हो गई है। 

प्रदेश में चालू रबी सीजन में चना बिजाई पिछले साल के बिजाई रकबे के स्तर को पार कर चुकी है। प्रदेश में चना बिजाई रकबा 14.57 लाख हैं। पिछले साल यह 14.50 लाख हेक्टेयर था। हालांकि कृषि विभाग द्वारा इस सीजन में चना बिजाई लक्ष्य 16.50 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया था। इसका 88.3 फीसदी लक्ष्य विभाग हासिल कर चुका है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में इस साल चने की पैदावार करीब 16 लाख टन होने का अनुमान है। देशभर में इस सीजन में 83 लाख टन चना उत्पादन का अनुमान है।

अभी भी मंडियों में 10 लाख टन से अधिक चना मौजूद है। ऐसे में चना कीमतों में गिरावट जारी रहने की आस दिखाई दे रही है। मंडी कारोबारियों के अनुसार  एक महीने में कीमतें 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल कम हुई हैं।

सप्ताहभर में कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि शुक्रवार को कुछ क्षेत्रों में बारिश होने से कीमतों में 50 रुपये प्रति क्विंटल तक का उछाल दिखाई दिया क्योंकि इस बारिश से आवक थोड़ी लेट हो सकती है।

कृषि विभाग के मुख्य सांख्यिकी अधिकारी जी. सी. माथुर के अनुसार चना उत्पादन पिछले रबी सीजन में 14,75,811 टन रहा है।

इस बार खरीफ सीजन के अंत में पूरे प्रदेश में बेहतर बारिश का असर रबी सीजन में दिखेगा। आगामी रबी सीजन में चना उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 20 से 25 फीसदी तक बढऩे की संभावना है। उल्लेखनीय है कि सीमित बकाया स्टॉक व पड़ोसी राज्यों से जारी मांग के चलते चना कीमतों में पूरे सत्र से ही तेजी का माहौल रहा है।

चना कारोबारी सुभाष गोयल का कहना है कि वर्तमान में प्रदेश में करीब 3500  बोरी (प्रति बोरी 100 किलो) चना की मंडी आवक हो रही है।

गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश से मांग में गिरावट के चलते कीमतों में भी मंदी आई है। वहीं मध्य प्रदेश का नया चना भी मंडियों में पहुंच रहा है। अलवर के कारोबारी हीरालाल गुप्ता के अनुसार चना कीमतों में पड़ोसी राज्यों से लगातार मांग चालू माह में कम हुई है। ऐसे में सप्ताहभर में कीमतें 200 से 250  रुपए प्रति क्विंटल तक कम हुई है।  

गंगानगर के कारोबारी सुरेंद्र सोमानी का कहना है कि इस बार चने की फसल देरी से आने, उत्पादन में कमी व बकाया स्टॉक कम होने के चलते कीमतों में तेजी का अनुमान था। लेकिन मांग कम होने एवं बारिश होने से उत्पादन औसत 50 फीसदी बढऩे के अनुमान है। ऐसे में चना कीमतों में मंदा बने रहने की उम्मीद है।

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राजस्थान समेत चना उत्पादन के प्रमुख राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में बेहतर उत्पादन के संकेतों से चने की कीमतों में गिरावट आ गई है।

 

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