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होम लोन में मूलधन की हिस्सेदारी बढ़ा कर जल्द पाएं कर्ज से निजात

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Aug 23, 2013, 12:25PM IST
होम लोन में मूलधन की हिस्सेदारी बढ़ा कर जल्द पाएं कर्ज से निजात

बैंकों ने पिछले कुछ महीनों में ब्याज दरें घटाई हैं। ईएमआई घटाने की जगह लोन की अवधि घटाने को दें तरजीह

कुछ वर्ष पहले तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर था लेकिन महंगाई दरों में नरमी और उद्योग जगत को सस्ता कर्ज उपलब्ध कराते हुए देश की अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के ख्याल से भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ महीनों में प्रमुख दरें घटाई और यही वजह है कि अब बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की होम लोन की ब्याज दरें पिछले 8-9 महीनों में कम हुई हैं। लेकिन, इसका तात्कालिक फायदा होम लोन लेने वालों को नहीं मिल रहा।

दिल्ली के अजय का उदाहरण लीजिए। उनके होम लोन की मासिक किस्त 20 वर्षों के लिए 22,000 रुपये थी। उन्होंने 11.25 प्रतिशत की दर पर एक हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। अभी यही हाउसिंग फाइनेंस कंपनी 10.75 प्रतिशत पर होम लोन दे रही है लेकिन अजय की मासिक किस्त और ब्याज दरें पूर्ववत ही हैं। अब यही होम लोन उन्हें बोझ लगने लगा है।

दूसरी तरफ, बहुत ऐसे होम लोन ग्राहक भी होंगे जो ब्याज दरों में इजाफे के बाद बढ़ाई गई मासिक किस्त के अनुसार खुद को एडजस्ट कर चुके होंगे। अब, ब्याज दरों में जब कमी का दौर शुरू हुआ है तो होम लोन ग्राहकों को ऐसी क्या नीति अपनानी चाहिए जो उनके लिए लाभ का सौदा साबित हो?

इसके लिए सबसे पहले होम लोन के मूलभूत बातों की समझ जरूरी है। होम लोन में तीन चीजें- मूलधन (कर्जदाता से उधार लिए गए पैसे), ब्याज (उधार लेने की लागत, मूलधन जितना अधिक होगा ब्याज भी उतनी ही अधिक होगा) और अवधि (जिस अवधि में उधार चुकाना है, अवधि जितनी अधिक होगी ब्याज भी उतना ही अधिक होगा) शामिल होती हैं।

संभव है तो बढ़ाएं ईएमआई
एक खास अवधि के दौरान मूलधन और ब्याज के भुगतान को बराबर हिस्से में बांट कर मासिक किस्तों की गणना की जाती है। मासिक किस्तों के भुगतान के दौरान मूलधन के एक हिस्से का भुगतान भी किया जाता है। चूंकि ब्याज दर पहले से ही तय होती है इसलिए मासिक किस्त में इसकी हिस्सेदारी भी तय होती है। अगर आप मासिक किस्तों में इजाफा करते हैं तो अतिरिक्त राशि मूलधन के पुनर्भुगतान के तौर पर जाती है। होम लोन से जल्द मुक्ति पाने का यह तरीका उन लोगों के लिए ज्यादा अच्छा है जिनके पास प्रति माह अतिरिक्त राशि का पक्का स्रोत हो।

होम लोन की अवधि करें कम
प्री-पेमेंट के जरिये या मासिक किस्तों में बढ़ोतरी कर होम लोन की अवधि घटाने का प्रयास अच्छा रहेगा। कुछ बैंकों ने ब्याज दरें घटाई हैं। अगर आप बढ़ी हुई मासिक किस्त का भुगतान करने में सक्षम हैं तो अपने होम लोन की मासिक किस्त घटाने की जगह अवधि घटाने के विकल्प का चयन कीजिए। अवधि घटने की वजह से आप कम ब्याज का भुगतान करेंगे। सामान्य सा सूत्र है कि आप 240 महीने की तुलना में 180 महीने में कम पैसों का पुनर्भुगतान करेंगे।

ब्याज दर घटाने की करें बात
नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बैंक विभिन्न दरों की पेशकश करते हैं। पुराने ग्राहकों की तुलना में यह दरें कम होती हैं। आप बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से नई दरों में माइग्रेशन के लिए बातचीत कर सकते हैं। आम तौर पर बैंक ऐसे विकल्पों की जानकारी नहीं देते हैं। बैंक से इस संदर्भ में पूछताछ करते रहना आपके हित में रहेगा। बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां नई दरों में शिफ्टिंग के लिए कुछ शुल्क ले सकते हैं लेकिन लंबी अवधि में आपके ब्याज भुगतान में कमी होती है।

प्री-पेमेंट का लें सहारा
अगर आप अपने होम लोन का पुनर्भुगतान 11.25 प्रतिशत के ब्याज दर के हिसाब से कर रहे हैं तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट, लिक्विड और डेट फंडों में 7-9 प्रतिशत के हिसाब से निवेश करना तर्कसंगत नहीं लगता। जिन निवेश पर आपको रिटर्न कम मिल रहा है उसे भुनाते हुए आपने होम लोन का प्री-पेमेंट कर सकते हैं। प्री-पेमेंट से सीधे तौर पर उधार लिए गए मूलधन में कमी आएगी और इस प्रकार आपकी मासिक किस्त में ब्याज की हिस्सेदारी कम हो जाएगी या लोन की अवधि कम हो जाएगी।

इंट्रेस्ट सेवर लोन बेहतर
इंट्रेस्ट सेवर लोन आपके बचत खाते से जुड़े होते हैं। आपके बचत खाते में पड़ी राशि प्री-पेमेंट की राशि समझी जाती है और ब्याज की गणना बकाए राशि पर की जाती है और इस प्रकार बोझ कुछ कम होता है। आपातकालीन परिस्थितियों के लिए अलग किए पैसों को आप बचत खाते में रख कर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। आपको जब जरूरत हो अपने बचत खाते से पैसों की निकासी कर सकते हैं।

री-फाइनेंसिंग पर करें विचार
री-फाइनेंसिंग का मतलब है कि आप अपनी अधिक लागत वाले लोन को नये और कम लागत वाले लोन में ट्रांसफर करते हैं।  इसका मतलब हुआ कि आप अपने मौजूदा लोन को समय से पहले बंद करवाते हुए दूसरे नये बैंक से नया लोन लेते हैं।

इस विकल्प पर विचार करना तब ज्यादा फायदे की बात है जब नये ऋणदाता केवल एक या दो साल के लिए कम ब्याज दर वाले लोन की पेशकश नहीं कर रहे हों। बल्कि लोन की ब्याज दरें लंबी अवधि के लिए कम हो। री-फाइनेंसिंग से पहले हर पहलू पर गौर कर लीजिए। दूसरा तरीका यह है कि आप मौजूदा बैंक से ही कम ब्याज दरों के लिए बातचीत कीजिए।

उपरोक्त कोई एक तरीका या कुछ तरीके आपको अपने होम लोन का बोझ कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन किसी भी विकल्प का चयन करने से पहले आपको अपनी मौजूदा आर्थिक स्थिति और भविष्य के अनुमानों का विश्लेषण कर लेना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर मासिक किस्तों में इजाफा करना तभी व्यवहार्य होगा जब आपको भविष्य में आय में बढ़ोतरी का पूरा भरोसा हो या भविष्य में खर्च में इजाफा न होने वाला हो। इसी प्रकार प्री-पेमेंट तभी करें जब आपने आपातकालीन परिस्थितियों और अन्य जोखिमों के लिए प्रावधान कर चुके हों।

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