पेट्रो मंत्रालय ने सब्सिडी कटौती पर कंपनियों से मांगी रिपोर्ट

मोइली ने कहा
ऑयल मार्केंटिंग कंपनियों ने विमानन कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले ईंधन (एटीएफ) के लिए संयुक्त भंडारण सुविधा के बारे में बातचीत की है
डीजल के बल्क खरीदारों के लिए नीति में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसमें सिर्फ मछुआरों के लिए बदलाव किया गया है, किसी और के लिए नहीं
रिलायंस-कैग का मामला ऑडिटिंग का है, जिससे बचा नहीं जा सकता। लेकिन छोटी सी बात के लिए पूरे पेट्रोलियम प्रोजेक्ट को लटकाना ठीक नहीं होगा
पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) से सब्सिडी कटौती पर रिपोर्ट मांगी है। वित्त मंत्रालय ने फ्यूल प्राइसिंग मानकों में बदलाव के जरिए सब्सिडी में कटौती का प्रस्ताव रखा है। इसी बारे में पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से रिपोर्ट मांगी है।
इस बारे में पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि इससे पहले सी. रंगराजन तथा विजय केलकर कमेटी ने मामले की छानबीन कर अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
लेकिन अब इनकी समीक्षा की जरूरत है। इसलिए मैंने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ इस बारे में बातचीत की है और उन्हें रिपोर्ट सौंपने को कहा है। मोइली ने कहा कि कंपनियों से रिपोर्ट मिलने के बाद वित्त मंत्रालय के साथ फ्यूल प्राइसिंग मानकों में बदलाव के जरिए सब्सिडी में कटौती के मसले पर बातचीत की जाएगी।
मोइली का कहना था कि उनका मंत्रालय वित्त मंत्रालय के साथ सब्सिडी कटौती के बाद की स्थिति के बारे में लगातार विचार-विमर्श कर रहा है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री एक्सपोर्ट पैरिटी प्राइस तय कर देना चाहते हैं और इस मामले पर काम किया जाना जरूरी है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से एथनॉल का टेंडर जल्द से जल्द तय कर देने की मांग की है। इस बारे में मोइली का कहना था कि टेंडरिंग प्रक्रिया तय कर दी गई है, क्योंकि ऑयल के साथ एथनॉल की अधिकतम फीसदी मिलाने का बाध्यकारी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि कंपनियां पहले ही टेंडर मंगा चुकी हैं। एक बार टेंडर आ जाएं, तो इस बारे में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अंतिम फैसला ले लेंगी।
एक अन्य सवाल के जवाब में मोइली ने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने विमानन कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले ईंधन (एटीएफ) के लिए संयुक्त भंडारण सुविधा के बारे में बातचीत की है। उन्होंने यह भी कहा कि डीजल के बल्क खरीदारों के लिए नीति में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। हमने इसमें सिर्फ मछुआरों के लिए बदलाव किया है, किसी और के लिए नहीं।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी/कैग) और देश की सबसे बड़ी निजी गैस उत्पादक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के बीच चल रही खींचतान के बारे में मोइली ने कहा कि कंपनी के साथ बातचीत के जरिए यह मामला सुलझा लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह ऑडिटिंग का मामला है, जिसका जवाब दिया जाना जरूरी है।इससे बचा नहीं जा सकता, और समस्या का समाधान जरूरी है। लेकिन छोटी सी बात के चलते पूरे पेट्रोलियम प्रोजेक्ट को लटकाया जाना ठीक नहीं होगा।








