कॉरपोरेट घरानों के साथ एनबीएफसी भी खोल सकेंगी नया बैंक

देश के कॉरपोरेट घराने भी नए बैंक खोल सकेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को नए बैंक लाइसेंसों पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी करने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया। अब देश में जल्द ही नए बैंकों की बहार नजर आ सकती है। आरबीआई ने निजी और सार्वजनिक सेक्टर के साथ-साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी बैंकिंग क्षेत्र में उतरने का मौका दे दिया है।
आरबीआई ने जारी अधिसूचना में कहा है कि पूर्ण स्वामित्व वाली नॉन-ऑपरेटिव फाइनेंस होल्डिंग कंपनी (एनओएफएचसी) के जरिए प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां या समूह, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) अब बैंक खोल सकती हैं।
बैंक खोलने की इच्छुक कंपनियों के पास आवेदन करने के लिए आगामी 1 जुलाई तक का समय है। आरबीआई ने कहा है कि नए बैंक खोलने के लिए न्यूनतम 500 करोड़ रुपये की पेड-अप कैपिटल जरूरी है। नए बैंकों में विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 49 फीसदी तय की गई है जिसे पांच साल तक बरकरार रखना अनिवार्य है।
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि योग्य पाई जाने वाली एनबीएफसी अपने-आपको बैंक में भी बदल सकती हैं।
वित्तीय सुरक्षा के बारे में आरबीआई ने कहा कि किसी प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप का न्यूनतम 10 साल तक वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा रहने और 10 साल तक कारोबारी प्रदर्शन बेहतर होने पर ही उसे नया बैंक खोलने के लिए योग्य माना जाएगा।
इसके अलावा, कंपनियों के बिजनेस प्लान में 25 फीसदी बैंक शाखाएं ग्रामीण इलाकों या गैर-बैंकिंग क्षेत्रों में खोलना अनिवार्य होना चाहिए। हालांकि, आरबीआई ने कहा है कि प्रमोटेड बैंक, जिनकी 40 फीसदी से ज्यादा परिसंपत्ति या आय गैर-वित्तीय कारोबार से आ रही है, उनके लिए 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पेड-अप इक्विटी कैपिटल जुटाने के लिए अनुमति लेना जरूरी है।
इसके अलावा, अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि बैंक के बोर्ड में अधिकांश निदेशक स्वतंत्र होने चाहिए। नियामक ढांचे पर आरबीआई ने कहा है कि सभी नए बैंक आरबीआई के अधिनियम 1934 के प्रावधानों के तहत आएंगे, यानी सभी बैंकों पर आरबीआई का ही नियंत्रण रहेगा।
एनओएफएचसी को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के रूप में आरबीआई से पंजीकृत होना पड़ेगा और इसके लिए आरबीआई द्वारा अलग से निर्देश जारी किए जाएंगे। विदेशी हिस्सेदारी पर रिजर्व बैंक ने कहा है कि लाइसेंस जारी होने से लेकर पांच साल तक अनिवासी भारतीयों और विदेशी संस्थागत निवेशों की इसमें हिस्सेदारी 49 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती।
किसी भी एनआरआई शेयरधारक को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बैंक खोलने की मंजूरी मिलने की तिथि से लेकर पांच साल तक 5 फीसदी से ज्यादा पेड-अप वोटिंग इक्विटी कैपिटल रखने की इजाजत नहीं है। साथ ही, आरबीआई ने कहा है कि प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप द्वारा बनाई गई एनओएफएचसी के कुल वोटिंग शेयर में व्यक्तिगत वोटिंग इक्विटी शेयर 10 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकते हैं।
मंजूरी - पब्लिक सेक्टर व कॉरपोरेट घरानों के साथ एनबीएफसी भी खोल सकेंगी नया बैंक
कड़ी शर्त - वित्तीय दृष्टि से मजबूत और न्यूनतम दस वर्षों का सफल व विश्वसनीय बिजनेस ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाली प्राइवेट कंपनियां ही खोल सकेंगी नया बैंक
कौन आगे - अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा ग्रुप, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलआईसी और आदित्य बिड़ला ग्रुप
कोई पाबंदी नहीं! - रियल्टी कंपनियां, ब्रोकरेज फर्म और सार्वजनिक उपक्रम भी खोल सकेंगे नए बैंक, अंतिम गाइडलाइंस में इन सभी को इजाजत न देने का कोई जिक्र नहीं
अभी तय नहीं - कितने नए बैंक लाइसेंस जारी किए जाएंगे, इसका कोई जिक्र नहीं हैं फाइनल गाइडलाइंस में
इससे पहले कब - आरबीआई ने वर्ष 1993 में प्राइवेट बैंकों को इजाजत दी थी। रिजर्व बैंक ने इससे पहले वर्ष 2001 में कोटक महिंद्रा बैंक और यस बैंक को इसके लिए लाइसेंस दिए थे।
लास्ट डेट - नए बैंक खोलने के बारे में आवेदन करने की अंतिम तिथि है 1 जुलाई
नई गाइडलाइंस
प्रमोटर के पूर्ण स्वामित्व वाली गैर संचालित फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी के जरिए खुलेंगे नए बैंक
नए बैंकों को अपनी 25% शाखाएं ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में खोलनी होंगी जो बैंकिंग सेवाओं से वंचित हैं
नए बैंक में विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा होगी 49 फीसदी
नए बैंक के लिए न्यूनतम चुकता पूंजी 500 करोड़ रुपये तय
संचालन शुरू होने के तीन साल के भीतर लिस्टिंग जरूरी








