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अपनी जरूरत से मेल खाती पॉलिसी ही खरीदें

सुरेश अग्रवाल | Jan 19, 2013, 00:21AM IST
 
 


बीमा आप अपने व अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए लेते हैं ताकि मृत्यु, स्थाई अपंगता, वित्तीय आपातकाल या आय के नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके। इसलिए विभिन्न उत्पादों की तुलना के बाद करें चयन

दीर्घावधि में लाभ
बीमा उत्पाद लांग टर्म में लाभ देते हैं लिहाजा निवेशकों को इसमें ध्यान देना होगा कि वे पॉलिसी की पूरी अवधि तक बने रहें। पॉलिसी के अवधि से पहले सरेंडर आदि से उन्हें बचना होगा तभी उनके वित्तीय लक्ष्य पूरे होंगे अन्यथा नहीं।

भारत जैसे देश में सुरक्षा का जो कवच बीमा पॉलिसी उपलब्ध कराती है वह कवच अन्य किसी भी वित्तीय उत्पाद में नहीं होता।

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान-यूलिप सरीखी बीमा पॉलिसियां अच्छा रिटर्न देने वाली होती हैं, बशर्ते इसके टाइम-फ्रेम का पालन किया जाए यानी कि इनमें लांग टर्म तक अर्थात पूरे पालिसी टर्म तक रहा जाए।

देश के वित्तीय सेवा क्षेत्र में जीवन बीमा तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र होने के साथ ही आर्थिक सुरक्षा का एक उम्दा विकल्प भी है। आज की तारीख में बैंक डिपॉजिट के बाद परिवारों के बचत का एक बड़ा हिस्सा जीवन बीमा में आ रहा है।

जीवन बीमा में पारिवारिक बचत का हिस्सा साल 2008-09 में 21 फीसदी था जो कि 2009-10 में 22.6 फीसदी हुआ जबकि 2010-11 में 24.2 फीसदी पर पहुंच गया। ऐसा अनुमान है कि देश की आबादी का लगभग 20 फीसदी हिस्सा किसी न किसी रूप में जीवन बीमा से कवर्ड है।

वित्त वर्ष 2010-11 में भारत में जीवन बीमा के प्रीमियम में 4.2' की बढ़ोतरी (महंगाई समायोजित) दर्ज की गई जबकि वैश्विक औसत 3.3 फीसदी था। देश में जैसे-जैसे आर्थिक प्रगति रफ्तार पकड़ रही है वैसे-वैसे लोगों में वित्तीय जागरूकता बढ़ रही है और लोग बचत व निवेश में सक्रिय हो रहे हैं तथा वे जीवन बीमा के प्रति जागरूक भी हुए हैं।

विभिन्न तरह के प्रोडक्ट
जीवन बीमा कंपनियों ने बाजार में विभिन्न तरह के इंश्योरेंस प्रोडक्ट की बहार ला दी है। अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार परंपरागत उत्पादों, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप), टर्म प्लान आदि श्रेणियों में से अपने लिए उपयुक्त इंश्योरेंस पॉलिसी का चयन कर सकते हैं।


यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान
यूलिप इक्विटी में प्रोफेशनल तरीके से प्रबंधित निवेश का एक जरिया है जो दीर्घावधि में अच्छा रिटर्न दे सकता है। एक एसेट क्लास के रूप में इक्विटी ऐतिहासिक रूप से अच्छा रिटर्न देती आई है। यूलिप उच्च रिटर्न देने वाली होती है, बशर्ते इसकी समय-सीमा का पालन किया जाए यानी कि इनमें दीर्घावधि तक अर्थात पूरे पालिसी टर्म तक रहा जाए।

और ये पॉलिसियों ऐसे निवेशकों के लिए मुफीद रहेंगी जो कि उच्च जोखिम सहन करने की क्षमता रखते हों। वैसे बीमा नियामक के दिशानिर्देशों से यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान-यूलिप ज्यादा पारदर्शी हुए हैं और इनका रूप भी निखरा है। आज यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान का ग्राहक यह जान सकता है उसके पैसों का निवेश कहां किया जा रहा है और उसे कितना प्रभार चुकाना पड़ रहा है।

परंपरागत प्लान
कम जोखिम उठाने वाले निवेशक परंपरागत योजनाओं (एंडोमेंट प्लान) मेंं से अपनी जरूरत के अनुसार योजनाएं चुन सकते हैं। इसमें यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान की तुलना में इंश्योरेंस कंपोनेंट होता है साथ ही ये योजनाएं उच्चतम डेथ बेनीफिट व पॉलिसी अवधि में निवेश में कम जोखिम में ग्रोथ उपलब्ध कराती हैं। बीमा कंपनियां इन योजनाओं की रकम को मुख्य रूप से डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करती हैं।

टर्म प्लान
शुद्ध बीमा तो टर्म प्लान ही है। इसमें निवेश कंपोनेंट नहीं होता। ये योजनाएं सिर्फ जीवन बीमा कवर उपलब्ध कराती हैं। ये पॉलिसियां सस्ती होती हैं और कम प्रीमियम में उच्चतम कवर मुहैया कराती हैं।

पॉलिसी लेने से पहले होम वर्क
बीमा नियमित निवेश और दीर्घावधि की बचत को प्रोत्साहित करता हैं। बीमा लेने का पहला कारण यह है कि बीमा धारक की असामयिक मृत्यु की दशा में उसके आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो और वह परिवार बिना किसी तकलीफ के अपनी आर्थिक जरूरतों की पूर्ति करने में सक्षम बने। पर्याप्त बीमा कवर की राशि मानव जीवन मूल्य (ह्यूमन लाइफ वैल्यू) विधि से पता की जाती है।

अपने सपनों को करें साकार
अपने घर-परिवार जुड़े   सपनों को जीवन बीमा के जरिए पूरा किया जा सकता है। बीमा पॉलिसी से जीवन चक्र के दौरान के आपके मानवीय कर्तव्यों से जुड़े दीर्घावधि के आपके वित्तीय लक्ष्य पूरे किए जा सकते हैं। मसलन बच्चे की उच्च शिक्षा व शादी, घर खरीदना या रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त रकम आदि। यदि आपके पास बीमा पॉलिसी होगी तो आपको उनकी परिपक्वता से जो रकम हासिल होगी, उससे उपरोक्त काम किए जा सकते हैं।

उचित कंपनी का चुनाव
इस समय जीवन बीमा बाजार में 20 से ज्यादा जीवन बीमा कंपनियां सक्रिय हैं, सभी कंपनियों के पास उत्पादों की विशाल श्रृंखला है। पर ग्राहकों के सामने इतनी कंपनियां और इतने सारे प्रोडक्ट होते हैं कि वह उलझन में पड़ जाता है कि वह आखिर किस कंपनी का प्रोडक्ट खरीदे।

इसके लिए सलाह यह है कि कंपनी का प्रबंधन, कंपनी का ट्रैक रिकार्ड, पैरेंट ग्रुप का अनुभव, क्लेम भुगतान अनुपात भी देखें फिर उसके बाद उस कंपनी से इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का फैसला करें। ध्यान रखिए कि बीमा आप अपने व अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए लेते हैं। ताकि मृत्यु, स्थाई अपंगता, वित्तीय आपातकाल या आय का नुकसान के खिलाफ आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

तथा आप इसके जरिए ज्यादा खर्च वाले कार्यक्रमों की फंडिंग मसलन बच्चे की उच्च शिक्षा व शादी, घर खरीदना या रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त रकम आदि का नियोजित इंतजाम करते हैं। इसमें कर-लाभ भी मिलता है और बढिय़ा रिटर्न भी। लिहाजा यह सुरक्षा का एक अभिनव विकल्प भी है।
सुरेश अग्रवाल - लेखक कोटक लाइफ इंश्योरेंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष हैं।

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