जल्द घोषित होगी सेल के एफपीओ की तारीख

कवायद
वित्त मंत्रालय जल्द लेगा विनिवेश की तारीख पर फैसला
सिंगापुर में बड़े निवेशकों को आकर्षित करने की कवायद
हांगकांग, यूरोप व अमेरिका में भी इसी कवायद की योजना
सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को लांच करने की तारीख की घोषणा जल्द ही करने जा रही है।
इस एफपीओ के जरिए कंपनी की 10.82 फीसदी हिस्सेदारी का विनिवेश किया जाना है। इस विनिवेश प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सरकार ने विदेशी निवेशकों को लुभाने की कवायद भी तेज कर दी है।
इस्पात सचिव डी. आर. एस. चौधरी ने भारतीय स्टील इंडस्ट्री की संभावनाओं को लेकर यहां आयोजित निवेशकों की एक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि सेल की 10 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश की तारीख पर वित्त मंत्रालय जल्द ही फैसला करने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सेल का विनिवेश निकट भविष्य में ही होने जा रहा है। ऐसे में, यह बेहद महत्वपूर्ण है कि निवेशकों को देश के स्टील सेक्टर की पूरी तस्वीर के बारे में बताया जाए और उन्हें इस प्रक्रिया से जोड़ा जाए।
बढ़ते राजकोषीय घाटे पर लगाम लगाने की कवायद के तहत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के विनिवेश का दांव खेला है और इसके लिए निवेशकों को आकर्षित करने के नए-नए तरीके आजमाए जा रहे हैं। सेल के विनिवेश से सरकार की झोली में तकरीबन 4,000 करोड़ रुपये तक की राशि आ सकती है।
कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने जुलाई, 2012 में ही सेल में सरकार की 10.82' हिस्सेदारी के विनिवेश की योजना को मंजूरी दे दी थी। यह विनिवेश ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) रूट के जरिए किया जाना है। मौजूदा समय में सेल में सरकार की हिस्सेदारी 85.82 फीसदी के स्तर पर है।
हालांकि, बाजार की खराब परिस्थितियों के चलते सेल के विनिवेश को अच्छा समय आने तक के लिए होल्ड पर रख लिया गया था। लेकिन, अब बाजारों में अच्छी रैली देखी जा रही है और सरकार अपने 30,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए सेल की शेयर सेल को जल्द ही अंजाम दे सकती है।
भारत की स्टील उत्पादन क्षमता इस समय नौ करोड़ टन सालाना के करीब है। वर्ष 2020 तक इसके बढ़कर 20 करोड़ टन पर पहुंच जाने की संभावना है। इसके लिए 110 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।
चौधरी ने कहा कि ग्लोबल स्तर पर इंडस्ट्री में हुई 1.2-1.4 फीसदी की ग्रोथ की तुलना में बीते साल के दौरान भारतीय स्टील इंडस्ट्री की ग्रोथ पांच फीसदी की रही है।
सिंगापुर में चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर में तीन दिनों तक निवेशकों को आकर्षित करने की कवायद की। इसी तरह के प्रतिनिधिमंडल हांगकांग, यूरोप व अमेरिका में भी भेजे जाने की योजना है।








