सेबी ने दी सभी शेयरों में प्री-ओपन कॉल ऑक्शन की इजाजत

क्या है कॉल ऑक्शन - कॉल ऑक्शन के तहत आम तौर पर बाजार खुलने से पहले खरीदार किसी शेयर के लिए अधिकतम भाव की बोली लगाता है, जबकि बेचने वाला इसके लिए न्यूनतम भाव तय करता है।
मौजूदा स्थिति - अभी केवल बीएसई सेंसेक्स व एनएसई निफ्टी में शामिल शेयरों में पायलट आधार पर प्री-ओपन कॉल ऑक्शन होता है। आईपीओ व दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों में भी कॉल ऑक्शन की सुविधा है।
अब क्या होगा - सेबी प्री-ओपन कॉल ऑक्शन की सुविधा को सभी सूचीबद्ध शेयरों के लिए शुरू करने का फैसला किया है। यह सुविधा सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर दी जाएगी। सुविधा 1 अप्रैल, 2013 से शुरू होगी।
पूंजी बाजार नियामक सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने प्री-ओपन कॉल ऑक्शन की सुविधा को सभी सूचीबद्ध शेयरों के लिए शुरू करने का फैसला किया है। यह सुविधा सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर दी जाएगी।
सेबी द्वारा यहां गुरुवार को जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, यह सुविधा 1 अप्रैल, 2013 से शुरू होगी। सेबी ने समय-समय पर इल-लिक्विड यानी ऐसे शेयर जिनमें कारोबार नहीं के बराबर होता है, में भी कॉल ऑक्शन की सुविधा देने का फैसला किया है।
कॉल ऑक्शन के तहत आम तौर पर बाजार खुलने से पहले खरीदार किसी शेयर के लिए अधिकतम भाव की बोली लगाता है, जबकि बेचने वाला इसके लिए न्यूनतम भाव तय करता है। इस समूची कवायद का मुख्य मकसद बाजार में तेज उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाना है।
मौजूदा समय में केवल बीएसई सेंसेक्स व एनएसई निफ्टी में शामिल शेयरों में पायलट आधार पर प्री-ओपन कॉल ऑक्शन होता है। साथ ही, प्रारंभिक पब्लिक ऑफर (आईपीओ) व दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों में भी कॉल ऑक्शन की सुविधा दी गई है।
सेबी के सर्कुलर में कहा गया है कि सेबी ने इक्विटी मार्केट के सभी अन्य शेयरों में प्री-ओपन सत्र शुरू करने का फैसला किया है।
साथ ही, इल-लिक्विड शेयरों में भी समय-समय पर कॉल ऑक्शन की सुविधा देने का फैसला लिया गया है। सर्कुलर के मुताबिक, प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर इल-लिक्विड शेयरों को छोड़कर सभी शेयरों पर लागू होगा। इन सत्रों के प्राइस बैंड सामान्य मार्केट में लागू होंगे।
इल-लिक्विड शेयरों के मामले में सेबी ने कहा है कि अगर किसी स्टॉक में किसी तिमाही के दौरान रोजाना की औसत ट्रेडिंग 10,000 शेयरों या ट्रेड की औसत संख्या 50 से कम रहती है तो उस स्टॉक को इल-लिक्विड माना जाएगा।
प्रत्येक तिमाही की शुरुआत में स्टॉक एक्सचेंज इन इल-लिक्विड शेयरों की पहचान करेंगे। ऐसे शेयरों को कॉल ऑक्शन से निकालकर सामान्य ट्रेडिंग में डाल दिया जाएगा।
किसी स्टॉक को कॉल ऑक्शन में शामिल करने या निकालने से दो सत्र पहले इस बारे में बाजार में नोटिस देना होगा। इल-लिक्विड शेयरों के पीरियोडिकल कॉल ऑक्शन का आयोजन कारोबारी सत्र के दौरान ही एक-एक घंटे के लिए किया जाएगा।
इस तरह का पहला कॉल ऑक्शन सत्र 9.30 बजे शुरू होगा। कॉल ऑक्शन के तहत शेयरों का प्राइस बैंड अधिकतम 20 फीसदी होगा। हालांकि, स्टॉक एक्सचेंज अपने सर्विलांस के आधार पर प्राइस बैंड को सम्मिलित रूप से कम कर सकेंगे।
अगर किसी खरीदार द्वारा शेयर के लिए लगाया गया भाव उसे बेचने वाले द्वारा तय किए गए भाव के बराबर या उससे ज्यादा होता है और इस आधार पर ट्रेडिंग हो जाती है तो स्टॉक एक्सचेंज इस पर जुर्माना लगाएंगे।
जुर्माने की गणना स्टॉक एक्सचेंज करेंगे और इसकी वसूली दैनिक आधार पर की जाएगी। जुर्माने की यह राशि निवेशक सुरक्षा कोष में जमा होगी।










