कर-बचत के साथ पाएं अच्छा रिटर्न

आम तौर पर करदाता अंतिम समय में टैक्स प्लानिंग के बारे में सोचते हैं। टैक्स सेविंग के अच्छे विकल्पों के चयन के लिए वह अपने निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा कर देख सकते हैं कि उन्हें नफा कहां हुआ और इसे चयन का आधार भी बना सकते हैं
साल 2012 अधिकतर निवेशकों के चेहरों पर मुस्कान लाने में सफल रहा। हालांकि, पुराने साल की विदाई और नये साल के आगमन के जश्न की वजह से संभव है आपने अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग में टैक्स सेविंग को तवज्जो न दी हो। अपने पुराने निवेश के नफा-नुकसान को देखते हुए आप टैक्स सेविंग की प्रभावी योजना बना सकते हैं।
सामान्यतया निवेशक टैक्स-सेविंग को गंभीरता से नहीं लेते हैं तथा बाद में इसे जल्दबाजी में निपटा देना चाहते हैं, जो महज टैक्स रिटर्न की फाइलिंग की अंतिम समय सीमा में आनन-फानन में की जाने वाली खाना पूर्ति से अधिक नहीं है। हालांकि, पहले से कर-देनदारी की प्रभावी प्लानिंग करते हुए अगर आप कर-बचत के उचित विकल्पों का चयन करते हैं तो न केवल आप टैक्स-सेविंग का लाभ प्राप्त करेंगे बल्कि अच्छा रिटर्न भी प्राप्त करेंगे।
कैलेंडर वर्ष 2012 में लगभग सभी परिसंपत्ति वर्गों ने अपने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया। यहां हम कुछ प्रभावी टैक्स-सेविंग विकल्पों की चर्चा कर रहे हैं, जो आपको वर्ष 2013 में अपने कर संबंधी भार को कम करने में सहायता करेगा:
ईएलएसएस फंड्स
कर बचत से संबंधित म्यूचुअल फंड यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) तीन वर्षों की लॉक-इन अवधि वाली निवेश योजनाएं हैं। यह टैक्स-सेविंग के उन विकल्पों में से है जो इक्विटी एसेट क्लास के अंतर्गत आता है।
ईएलएसएस के खर्च भी कम हैं साथ ही इसमें पारदर्शिता भी है। इसके तहत एक निवेशक एक वर्ष में अधिकतम 1,00,000 रुपये तक निवेश कर सकता है तथा 500 रुपये प्रति माह के न्यूनतम निवेश से शुरुआत कर सकता है।
ये फंड ज्यादातर डाइवर्सिफायड इक्विटी फंड तथा विभिन्न क्षेत्रों के 30-80 शेयरों के पोर्टफोलियो में निवेश कर सकते हैं। नि:संदेह प्रस्तावित डीटीसी (डायरेक्ट टैक्स कोड) इन फंडों के बहुत अधिक पक्ष में नहीं है। लेकिन वर्तमान समय में यह बेहतर औसत जोखिम एवं कम लॉक-इन अवधि (तीन वर्ष से अधिक) के साथ निवेशकों के लिये सबसे अच्छे विकल्प के रूप में उभरा है।
जीवन बीमा
जीवन बीमा देश में फिक्स्ड डिपॉजिट के बाद टैक्स-सेविंग के पसंदीदा विकल्पों में शुमार रहा है। जीवन बीमा के प्रीमियम पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत छूट मिलती है। इसके अंतर्गत आप अपनी आय से एक लाख रुपये तक की छूट का दावा कर सकते हैं। जीवन बीमा में कर संबंधी लाभ को एक व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा के विचार को प्रोत्साहित करने की नीयत से शुरु किया गया था,
लेकिन जीवन बीमा का उपयोग केवल कर बचाने के उपकरण के रुप में किया जाने लगा और इस प्रवृत्ति के बढऩे से जीवन बीमा का वास्तविक उद्देश्य महत्वहीन नजर आने लगा। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने कर छूट के दावे के नियमों को संशोधित कर दिया, अब कर छूट के दावे को पेश करने के लिये एक ऐसा जीवन बीमा कवर खरीदना होगा जो आप के द्वारा भुगतान किए जाने वाली प्रीमियम राशि का 10 गुना होना चाहिए।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) वर्तमान समय में भारतीय निवेशकों के लिये टैक्स-सेविंग के विकल्पों में सबसे अधिक लोकप्रिय है।
पीपीएफ में निवेश की सभी अवस्थाओं में एवं निवेश के दौरान आप कर-लाभ प्राप्त कर सकते हैं। निवेश, निवेश पर प्राप्त आय एवं मैच्योरिटी पर मिलने वाले पैसे टैक्स-फ्री हैं। पीपीएफ से प्राप्त होने वाला रिटर्न अब फिक्स नहीं रहता, इसे मार्केट-लिंक्ड कर दिया गया है।
इसकी ब्याज दरें 10 वर्षीय सरकारी बांड की यील्ड के आधार पर प्रति वर्ष तय की जाती है। एक व्यक्ति निवेशित राशि पर कर छूट प्राप्त करने के लिये धारा 80 सी के अंतर्गत अपने पीपीएफ खाते में प्रति वर्ष एक लाख रुपये तक का निवेश कर सकता है। इसकी सहज उपलब्धता और सुविधा उन लोगों के लिये टैक्स-सेविंग का एक सर्वश्रेष्ठ विकल्प है, जो लंबी अवधि का निवेश करना चाहते हैं।
नेशनल पेंशन सिस्टम
नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) पीपीएफ का परिष्कृत रुप है। यहां पर भी आपको सरल उपलब्धता, कम लागत तथा मार्केट लिंक्ड रिटर्न के लाभ प्राप्त होते हैं। हालांकि, इस योजना के लिये कर छूट की स्थिति छूट-छूट-टैक्स की है।
इस स्कीम के अंतर्गत आपके सामने इक्विटी, कॉरपोरेट डेट और/ या सरकारी डेट में निवेश का विकल्प उपलब्ध है। एनपीएस के अंतर्गत यदि एक नियोक्ता कर्मचारी के मूल वेतन का 10 प्रतिशत एनपीएस में स्थानांतरित करता है, तो यह राशि एक अतिरिक्त कटौती होगी जिसे कर्मचारी अपनी आय से छूट के लिए दावा कर सकता है।
यह धारा 80 सीसीडी तथा 80 सीसीडी (2) के अंतर्गत नियमित पेंशन छूट के अतिरिक्त होगी। इस प्रकार यदि एक व्यक्ति का मूल वेतन 40,000 रुपये है, तो वह वार्षिक स्तर पर 48,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का हकदार बन जाता है। उच्चतम कर लाभ के दायरे में आने वाले व्यक्ति के लिये यह 14,400 रुपये के अतिरिक्त कर बचत का जरिया है।
फिक्स्ड डिपॉजिट
आप अपने बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट में जिन पैसों का निवेश करते हैं, उन पर धारा 80 सी के अंतर्गत कर छूट के हकदार बन जाते हैं। लेकिन कर छूट के लिये आपके फिक्स्ड डिपॉजिट की मैच्योरिटी अवधि पांच वर्ष होनी चाहिए।
यह एक मात्र ऐसा कर बचत उपकरण है, जो एक निश्चित रिटर्न उपलब्ध कराता है तथा मार्केट लिंक्ड नहीं है। इस विकल्प का इस्तेमाल उन लोगों द्वारा किया जा सकता है जो कर बचाने के लिये आखिरी क्षणों में निवेश करना चाहते हैं तथा वर्तमान निवेश दर के लाभों को उठाना चाहते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस
यदि आपके पास अपने तथा अपने परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस है, तो आप यहां भी अपनी कर योग्य आय में कर-छूट का दावा कर सकते हैं। यह प्रावधान आयकर अधिनियम की धारा 80डी में वर्णित है। यदि आप स्वयं तथा अपने परिवार (पत्नी व बच्चे) के लिये प्रीमियम का भुगतान कर रहे हैं तो आप 20,000 रुपये तक का दावा कर सकते हैं।
यदि आप अपने माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम का भी भुगतान कर रहे हैं, तो आप 15,000 रुपये का अतिरिक्त दावा भी प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार इस धारा के अंतर्गत कुल छूट की राशि 35,000 रुपये हो जाती है। इस प्रकार यह उच्चतम कर दाता वर्ग के एक व्यक्ति के लिये 10,500 रुपये तक की कर बचत का अतिरिक्त जरिया बन सकती है।
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी निवेश प्रमाण पत्र हैं। ये पांच अथवा 10 वर्षों की अवधि के होते हैं। इसकी ब्याज दरें निर्धारित हुआ करती थीं, लेकिन अब यह 5 वर्ष और 10 वर्ष के भारत सरकार के बांड के यील्ड से संबद्ध है।
इन बांडों की वर्तमान यील्ड 8.6 प्रतिशत से 8.9 प्रतिशत तक है। इस सर्टिफिकेट से प्रत्येक वर्ष प्राप्त होने वाली ब्याज को जोड़ दिया जाता है और इसका पुन: निवेश किया जाता है तथा उस विशेष वर्ष में इस पर कर-छूट का दावा भी किया जा सकता है।
राकेश गोयल - लेखक बोनांजा पोर्टफोलियो लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं।








