निवेश का उपयुक्त समय

निवेश नजरिया
सुनील सिंघानिया हेड-इक्विटी, रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट
एफएमसीजी व फार्मा तथा खपत आधारित सुरक्षात्मक सेक्टरों की कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।
ऊंची ब्याज दरों से भी इन कंपनियों को अच्छा माहौल मिला है। चूंकि अब ब्याज दर कम होने के माहौल बन रहे हैं और व्यवस्था में भरोसा धीरे-धीरे लौट भी रहा है इसलिए उम्मीद की जारी है कि ब्याज दर संवेदनशील, कैपेक्स ड्रिवेन और ग्रोथ सेक्टर जैसे पावर, ऑटो और बैंक में जल्दी ही अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है
वर्ष 2012 बहुत दिलचस्प रहा जिसमें तकरीबन सभी परिसंपत्ति वर्गों जैसे रियल एस्टेट, गोल्ड, फिक्स्ड इनकम के साथ-साथ इक्विटी में बढ़ती वैश्विक और घरेलू फंडामेंटल चुनौतियों के बावजूद सकारात्मक प्रदर्शन देखा गया। सभी प्रकार के भय व अनिश्चितताओं, जिनसे कि एक समय तो ऐसा लग रहा था कि 2008 का दुखद इतिहास फिर न दोहराया जाने लगे, के बावजूद दुनिया भर के शेयर बाजारों में सकारात्मक प्रदर्शन का दौर रहा।
हालांकि, इस दौरान बाजार में नकारात्मक ताकतों का बोलबाला भी रहा। विभिन्न सूत्रों से बाजार में आ रही खबरों की वजह से शेयर बाजार में नकारात्मक सेंटिमेंट को भी हवा देने की कोशिशें की गईं, निवेशकों में बड़े पैमाने पर कन्फ्यूजन की खबरें भी आईं ताकि वे शेयर बाजारों से दूर रहें। पर बेहतरीन बात यह है कि इन सब को अफवाहें मानकर बाजार ने खारिज कर दिया।
इसके अलावा भी जो आज का निवेशक समुदाय है उसे यह बात अच्छी तरह से पता है कि क्या सच्चा है और क्या अफवाह है। निवेशकों को इस बात की जानकारी है कि फिस्कल क्लिफ, लांग टर्म रिफाइनेंसिंग ऑपरेशन्स-एलटीआरओ, क्वांटीटिव ईजिंग, पॉलिसी पैरालिसिस आदि टर्म का बाजार पर शार्ट टर्म ही असर होता है।
पर यह भी अच्छा रहा कि उपरोक्त मामलों ने खरीदारी के बेहतरीन मौके मुहैया कराए क्योंकि उनसे बाजार में त्वरित गिरावट का कुल मिलाकर बाजार पर सकारात्मक असर रहा। इक्विटी में निवेश करने वाले फायदे में रहे। यहां पर यह सारी बातें बताने का मतलब सिर्फ इतना ही है कि निवेशक सावधान रहें और प्रतिकूल हालातों में भी निवेश करने का अवसर खोजने के प्रति जागरूक बन जाए।
नीतिगत सुधारों के मोर्चे पर कोई कदम न उठाने की वजह से बहुत सारी आलोचनाओं को झेलने के बाद सरकार ने सितंबर के बाद से कई नवीन नीतिगत सुधारों की घोषणा करके निवेशकों को आश्चर्यचकित कर दिया और इससे कुल मिलाकर बाजार का सेंटिमेंट सुधरा।
इन महत्वपूर्ण सुधारों में खुदरा, विमानन, प्रसारण और पावर एक्सचेंज में एफडीआई को कैबिनेट की मंजूरी, एसईबी प्रतिबंध को मंजूरी, सार्वजनिक क्षेत्र की 7 कंपनियों के विनिवेश को मंजूरी, ईसीबी व एफसीसीबी पर विदहोल्डिंग कर में कमी, एफएसए करार के जरिए बिजली निर्माताओं को कोयले की उपलब्धता और गार व डीटीसी पर स्पष्टता आदि शामिल रहे।
हालांकि सभी नीतिगत कार्यवाहियों को तेज गति से लागू नहीं किया गया और कार्यान्वयन की धीमी गति से इक्विटी निवेश में थोड़ा सा जोखिम भी हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर है कि मामले में क्या प्रगति होती है।
पर यह बात तय है कि इन अत्यावश्यक सुधारों को लागू करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जो है वह हतोत्साहित करने वाली है। हालांकि पिछले साल कुछ मामूली वजहों से बाजार दबाव में था पर उम्मीद है कि इस साल ऐसा नहीं होने वाला। हमारा मानना है कि साल 2013 बेहतर मजबूत साल होगा।
साल 2008 के वैश्विक संकट के बाद से, पिछले साल 2012 में इक्विटी बाजारों ने मजबूत वापसी की। सेंसेक्स ने साल के लिए तकरीबन 25 फीसदी से ज्यादा रिटर्न जेनरेट किया और इस साल इसमें बढ़ोतरी की आशा प्रबल है।
चूंकि सरकार द्वारा घोषित किए गए ताजातरीन सुधारों से निवेश के सेंटिमेंट में सुधार हो रहा है, लिहाजा हमें आशा है कि साल 2013 भारतीय अर्थव्यवस्था, कॉरपोरेट प्रॉफिट व इक्विटी के लिए अच्छा साल होगा।
इक्विटी बाजारों का भविष्य बढिय़ा लगता है और हमें यह भी आशा है कि 2013 में इक्विटी अन्य परिसंपत्ति वर्गों की तुलना में बेहतरीन प्रदर्शन करेगी।
एफएमसीजी व फार्मा तथा खपत आधारित सुरक्षात्मक सेक्टरों की कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। ऊंची ब्याज दरों से भी इन कंपनियों को अच्छा माहौल मिला है।
चूंकि अब ब्याज दरें कम होने के माहौल बन रहे हैं और व्यवस्था में भरोसा धीरे-धीरे लौट भी रहा है लिहाजा हमें आशा है कि ब्याज दर संवेदनशील, कैपेक्स ड्रिवेन व ग्रोथ सेक्टरों मसलन पॉवर, ऑटो, बैंक में जल्दी ही अच्छा सुधार होने की उम्मीद है।










