हम अपनी जिंदगी में हर रोज 5, 10, 20, 50, 100, 500 और 1000 रुपये के नोट का इस्तेमाल करते हैं। जरूरी चीजों को खरीदने में खर्च करते हैं। उधर, भारत सरकार भी इन नोटों को छापने में भारी रकम खर्च कती है। साल दर साल ये खर्च बढ़ता जा रहा है। बढ़ती महंगाई और उससे कागज की ऊंची होती कीमतें इसका कारण है।
न दादा न भईया, सबसे बड़ा रुपईया..ये कहावत तो हम में से सभी ने सुनी होगी और इसका मतलब भी जानते होंगे। लेकिन दादा-भईया से बड़ा कहलाने वाले इस रुपईये को छापने में कितनी लागत आती है, ये हम में से चंद लोगों को ही पता है। पेश है इस बारे में जानकारी देता हुआ एक फोटो फीचर-