क्या है डेट इक्विटी स्वैप

यह एक तरह का ट्रांजेक्शन होता है जिसमें किसी कंपनी का कर्जदाता कंपनी को दिए गए कर्ज को आंशिक या पूरी तरह से अतिरिक्त शेयर में बदलने को तैयार हो जाता है। यह कर्जदाता बैंक , कोई वित्तीय संस्थान या प्रमोटर्स भी हो सकते हैं।
लेकिन अब सवाल यह उठता है कि जो नए शेयर होंगे उनका मूल्य क्या होगा? डेट इक्विटी स्वैप के तहत कर्ज को जिन अतिरिक्त शेयरों में बदला जाता है उनका मूल्य कंपनी के शेयर के बाजार मूल्य के आसपास ही होता है या फिर इसे बातचीत के आधार पर तय किया जा सकता है।
इसमें किसी तरह का कोई कैश ट्रांजेक्शन नहीं होता है। इसका मतलब है कि कर्ज का खाता बंद कर दिया जाता है और उसकी जगह शेयर को जोड़ दिया जाता है।
कई बार ऐसा होता है कि कर्ज की राशि और शेयर की जो कीमत होती है उसमें अंतर आ जाता है। ऐसी स्थिति में इस अंतर को ब्याज का खर्च मान लिया जाता है और कई बार इसे भी बंद कर दिया जाता है। जब किसी कंपनी का कर्ज घट जाता है तो उसे इससे कई तरह के फायदे होते हैं।
कर्ज कम होने से बाजार में कंपनी की साख में बढ़ोतरी होती है और उसे नया फंड आकर्षित करने में इससे मदद मिलती है। इसके साथ ही कुछ अवधि के लिए कंपनी को वित्तीय संकट से भी राहत मिल जाती है। अगर तात्कालिक लाभ के रूप में देखा जाए तो कंपनी को ब्याज पर होने वाले व्यय से राहत मिल जाती है।








