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क्या है व्हाइट लेबल एटीएम?

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Jan 08, 2013, 02:24AM IST
 
 


गैर बैंकिंग निकाय की ओर से लगाए गए और चलाए जाने वाले एटीएम को व्हाइट लेबल एटीएम कहा जाता है। इन एटीएम में बैंकों के एटीएम की तरह ही सारी सहूलियतें होंगी लेकिन इन पर किसी बैंक का लेबल नहीं लगा होगा। जो एटीएम आप इस्तेमाल करते हैं, उनमें दो पक्ष शामिल होते हैं।

एक पक्ष बैंक होता है जिसका यह एटीएम होता है। यह एटीएम स्थापित करता है और इसका मालिक भी होता है। साथ ही यही इसे परिचालित भी करता है। इसके अलावा दूसरा पक्ष अधिकृत पेमेंट नेटवर्क ऑपरेटर मसलन वीजा या मास्टर कार्ड होता है। व्हाइट लेबल एटीएम में तीन पक्ष शामिल होंगे।

वह गैर बैंकिंग निकाय जो इसे लगाएगा। एक इसका मालिकाना हक वाला पक्ष और तीसरा इसे ऑपरेट करने वाला पेमेंट नेटवर्क। दरअसल इसमें जो स्पांसर बैंक होगा वह कैश मैनजमेंट का काम देखेगा। इसके अलावा उसे फंड सेटलमेंट और कस्टमर की शिकायत से जुड़े तंत्र को संभालना होगा।

साथ ही इसे अधिकृत पेमेंट नेटवर्क  का भी काम देखना होगा। कम से कम 100 करोड़ रुपये के नेटवर्थ वाला कोई भी गैर बैंकिंग निकाय इसकी स्थापना के लिए आवेदन कर सकता है। दूरदराज के इलाकों में आपको ज्यादा एटीएम न होने की शिकायत रहती है। लेकिन व्हाइट लेबल एटीएम खुलने से यह समस्या कुछ हद तक खत्म हो सकती है।

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गैर बैंकिंग निकाय की ओर से लगाए गए और चलाए जाने वाले एटीएम को व्हाइट लेबल एटीएम कहा जाता है।

 

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