विज्ञापन
 
Home >> Business Gyan >> What Is The Marginal Standing Facility?

क्या है मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी?

बिजनेस भास्कर | Mar 06, 2013, 15:06PM IST
 
 


रिजर्व बैंक ने इसकी शुरुआत 2011-12 के दौरान की थी। बैंक इसके जरिए आरबीआई से 8.25 फीसदी की ब्याज दर से कर्ज ले सकते हैं। यह दर लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी रेपो से एक फीसदी ज्यादा है। अगर किन्हीं कारणों से बैंकों के पास लिक्विडिटी में भारी कमी हो जाती है तो बैंक एमएसएफ के माध्यम से कर्ज ले सकते हैं।

इस सुविधा का उद्देश्य थोड़े समय के एसेट-लाइबिलिटी मिसमैच को ज्यादा प्रभावी तरीके से निपटाना है। बैंक एलएएफ रेपो रेट पर भी आरबीआई से कर्ज ले सकते हैं। इसकी दर फिलहाल 7.25 फीसदी है।

बैंकों को एलएएफ रेपो रेट पर कर्ज लेने के लिए एसएलआर को अनिवार्य रूप से 24 फीसदी बनाए रखते हुए अतिरिक्त सरकारी प्रतिभूतियों को गिरवी रखना पड़ता है। जहां तक एमएसएफ का सवाल है तो इस सुविधा का लाभ उठाकर बैंक 8.25 फीसदी की दर से अपनी नेट डिमांड और टाइम लायबिलिटी के एक फीसदी के बराबर कर्ज ले सकते हैं। इसमें भी एसएलआर को अनिवार्य रूप से 24 फीसदी बनाए रखना होगा।

इस तरह बैंक, सुबह में एलएएफ रेपो विंडो से 7.25 फीसदी की दर से कर्ज ले सकते हैं। दोपहर बाद नकदी की जरूरत होने पर उनको एमएसएफ से कर्ज लेना होगा। इसमें उनको 8.25 फीसदी का ब्याज चुकाना होगा। इससे बैंकों को एलएएफ रेपो विंडो के जरिए कर्ज लेने के सुबह का वक्त तय करना होगा। इससे पता चलेगा बाजार में लिक्विडिटी की क्या स्थिति है।

आपकी राय

 

रिजर्व बैंक ने इसकी शुरुआत 2011-12 के दौरान की थी। बैंक इसके जरिए आरबीआई से 8.25 फीसदी की ब्याज दर से कर्ज ले सकते हैं।

 

आपके विचार
 
 
कोड:
2 + 1

 
Ad Link
विज्ञापन
 

मार्केट

 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment