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कपास के बढ़ते दामों से यार्न कीमतों में वृद्धि

बिजनेस भास्कर भोपाल | Aug 15, 2013, 00:06AM IST

एक माह से भी कम समय में यार्न के दाम 7 फीसदी तक बढ़े 

बढ़ोतरी
जुलाई माह की शुरुआत में कपास के दाम 42,000 रुपये प्रति कैंडी के स्तर पर थे, जो फिलहाल बढ़कर 46,000 रुपये प्रति कैंडी हो गए हैं
 
कपास के लगातार बढ़ते दाम का असर यार्न की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। पिछले एक माह में कपास के दाम करीब 10 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। इसको देखते हुए प्रदेश की टेक्सटाइल कंपनियों ने यार्न के दाम में पांच फीसदी की  वृद्धि कर दी है।    

जुलाई माह की शुरुआत में कपास के दाम 42,000 रुपये प्रति कैंडी के स्तर पर थे, जो फिलहाल बढ़कर 46,000 रुपये प्रति कैंडी हो गए हैं। इस साल की शुरुआत में कपास के दाम 34,000 रुपये प्रति कैंडी के स्तर पर थे। कपास की कीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए टेक्सटाइल कंपनियों ने यार्न के दाम 4-7 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। पिछले एक माह के दौरान प्रदेश में 30 काउंट यार्न के दाम 210 रुपये प्रतिकिलो से बढ़कर फिलहाल 220 रुपये प्रतिकिलो हो गए हैं।  

कंपनियों की परेशानी है कि निर्यात बाजार में खरीदार यार्न के बढ़े हुए दाम देने को तैयार नहीं होते हैं, बड़ी मुश्किल से यार्न की कीमतों में बढ़ोतरी की है। प्रतिभा सिंटेक्स के कार्यकारी निदेशक स्नेहकर बंसल ने बिजनेस भास्कर को बताया कि पिछले कुछ समय से कपास की कीमतों में जिस तरह से लगातार बढ़ोतरी हो रही है उसके चलते उत्पादन लागत बढ़ती जा रही थी।

कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ता जा रहा था। ऐसे हालात में यार्न की कीमतों में बढ़ोतरी करना कंपनियों की मजबूरी है। हालांकि जिस अनुपात में कपास की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है यार्न के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़ाए गए हैं।  

कपास की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह लगातार बढ़ता निर्यात है। चीन की ओर से की जा रही खरीदारी की वजह से जुलाई 2013 तक निर्यात 98 लाख गांठ तक पहुंच गया है, जबकि देश से औसत निर्यात 75-80 लाख गांठ सालाना ही होता है। पिछले कपास विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) में अप्रत्याशित रूप से 128 लाख गांठ का निर्यात हुआ था। चालू विपणन वर्ष में भी यह अभी औसत निर्यात से अधिक हो चुका है।

टेक्सटाइल कंपनियों का मानना है कि कपास निर्यात को सीमित करना चाहिए। मध्य प्रदेश टेक्सटाइल मिल एसोसिएशन के सचिव एमसी रावत के मुताबिक यदि देश के टेक्सटाइल उद्योग को बचाना है तो केंद्र सरकार को जल्द से जल्द कपास निर्यात के लिए एक नीति लानी चाहिए, जिसमें निर्यात का मासिक कोटा तय किया जाए। इससे दोनो पक्षों को परेशानी नहीं होगी।

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कपास के लगातार बढ़ते दाम का असर यार्न की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। पिछले एक माह में कपास के दाम करीब 10 फीसदी तक बढ़ चुके हैं।

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