नई दिल्ली. क्या चिदंबरम जी को मालूम है कि उनके ड्राइवर की तनख्वाह क्या है? मालूम होता तो वे इस मद में दी जा रही कर छूट की सीमा निश्चित रूप से बढ़ा देते। जो अभी सिर्फ 900 रुपए मासिक है। यह प्रावधान 1997 में किया गया था और तब से ऐसे ही चला आ रहा है। ऐसे कई और प्रावधान हैं, जिनकी प्रासंगिकता अब खत्म हो चुकी है।
भोपाल के सीए राजेश बताते हैं कि ये सभी प्रावधान केवल नौकरीपेशा लोगों के लिए हैं, व्यापारियों के लिए नहीं। वे तो ड्राइवर की तनख्वाह से लेकर हर मद में ज्यादा से ज़्यादा खर्च दिखा सकते हैं और आयकर बचा सकते हैं। ये सभी उनके निजी खर्च न होकर उनकी कंपनी या फर्म के खाते में दिखाए जाते हैं।