आकर्षक, लेकिन खर्चीले हैं चाइल्ड प्लान
Source: मनीष कुमार मिश्र न | Last Updated 03:11(17/05/10)
फायदा चाइल्ड प्लान के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम को गंभीर बीमारी व दुर्घटना बीमा सहित टर्म इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंडों में लगाया जाए तो अधिक सुरक्षा के साथ मिल सकता है बेहतर रिटर्न भी।
टेलीविजन पर सचिन तेंदुलकर को बच्चों की बीमा योजना (चाइल्ड प्लान) का विज्ञापन करते लगभग हर किसी ने देखा होगा। ऐसा नहीं है कि चाइल्ड प्लान लेने से बच्चे सचिन जैसे खिलाड़ी बन जाएंगे, लेकिन इसके जरिए उनके भविष्य को कुछ हद तक सुरक्षित किया जा सकता है। विशेषज्ञों की माने तो चाइल्ड प्लान बच्चों का भविष्य आर्थिक दृष्टि से सुरक्षित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एक आम आदमी के लिए चाइल्ड प्लान बेहतर विकल्प है। उनका यह भी कहना है जो व्यक्ति वक्त निकाल कर चाइल्ड प्लान के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम को गंभीर बीमारी एवं दुर्घटना बीमा सहित टर्म इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंडों में लगाता है, उसे अधिक सुरक्षा के साथ बेहतर रिटर्न भी मिल सकता है। वित्तीय योजनाकार कहते हैं कि चाइल्ड प्लान खर्चीले हैं। आर्क फाइनेंशियल प्लानर के प्रमाणित वित्तीय योजनाकार हेमंत बेनिवाल कहते हैं, नि:संदेह जीवन बीमा कंपनियों के चाइल्ड प्लान कई सुविधाएं देते हैं, लेकिन यह मत भूलिए कि इनके लिए आपको अच्छा-खासा शुल्क चुकाना होता है। चाइल्ड प्लान काफी खर्चीले हैं।
मुंबई स्थित एक अन्य वित्तीय योजनाकार का मानना है कि एडीडी और क्रिटिकल इलनेस राइडर सहित टर्म इंश्योरेंस के साथ दीर्घावधि के लिए इक्विटी या इक्विटी से जुड़े विकल्पों में निवेश करना सबसे बेहतर है। बेनिवाल कहते हैं, चाइल्ड प्लान खासियतों की वजह से भले आकर्षक दिखते हों, लेकिन पर्याप्त बीमा कवर पाने के लिए भारी प्रीमियम देना पड़ता है। इसके एक-चौथाई प्रीमियम में दोगुना टर्म इंश्योरेंस कवर पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अगर चाइल्ड प्लान के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम का शेष हिस्सा पीपीएफ में भी लगाया जाए तो रिटर्न कहीं अधिक मिलेगा। वैसे, दीर्घकालिक निवेश के नजरिये से इक्विटी पर सबसे ज्यादा रिटर्न मिलता है।
चाइल्ड प्लान में माता या पिता या अभिभावक का जीवन बीमा किया जाता है और बच्चा नामित होता है। पॉलिसी अवधि के दौरान बीमाधारक की मृत्यु होने या उसके अपंग होने की दशा में बीमा कंपनियां बीमा राशि (सम एश्योर्ड) का भुगतान करती हैं और अधिकांश योजनाओं में शेष प्रीमियम माफ कर दिए जाते हैं। परिपक्वता पर मिलने वाला लाभ यथावत बना रहता है। पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यशीष दहिया की माने तो अवीवा लाइफ इंश्योरेंस की यंग स्कॉलर पॉलिसी सबसे बेहतर है। उनका कहना है, यंग स्कॉलर पॉलिसी काफी लचीली है। सबसे अच्छी खासियत यह है कि पॉलिसीधारक की असमय मृत्यु होने पर भविष्य के प्रीमियम एकमुश्त जमा करवा दिए जाते हैं। सम एश्योर्ड का भुगतान तो कर ही दिया जाता है, परिपक्वता पर मिलने वाला लाभ भी सुनिश्चित रहता है। उन्होंने बताया कि इस पॉलिसी के तहत सम एश्योर्ड भी अपेक्षाकृत अधिक मिल जाता है। इस पॉलिसी के तहत पांच साल बाद आंशिक कर मुक्त निकासी की जा सकती है। पॉलिसी अवधि के दौरान प्रीमियम का नियमित भुगतान करने पर परिपक्वता पर फंड वैल्यू का 0.5 से 2 प्रतिशत तक मैच्योरिटी एडिशन के तौर पर मिलता है।
दहिया ने बताया कि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की स्मार्ट किड एश्योर पॉलिसी के तहत भी पॉलिसीधारक को कमोबेश ये लाभ मिलते हैं, लेकिन असमय मृत्यु की दशा में भविष्य के प्रीमियम का भुगतान कंपनी एकमुश्त करने के बजाय नियमित अंतराल पर करती है। दोनों पॉलिसियों में इनकम बेनिफिट राइडर है जिसके तहत नामित व्यक्ति को सम एश्योर्ड का 10 प्रतिशत परिपक्वता अवधि तक प्राप्त होता रहता है। दहिया के अनुसार एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ का चिल्ड्रेन प्लान, एसबीआई लाइफ का स्कॉलर-2, भारतीय जीवन बीमा निगम का जीवन अनुराग और कोटक लाइफ इंश्योरेंस का कोटक चाइल्ड एडवांटेज प्लान भी काफी प्रचलित हैं। वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि बीमा एवं निवेश दोनों अलग-अलग चीजें हैं और इन्हें मिलाना नहीं चाहिए। बीमा पॉलिसियां निवेश के उचित विकल्प नहीं हो सकतीं। इनका इस्तेमाल बीमा के लिए ही किया जाए तो बेहतर है।