बोफोर्स तोप में लगे मप्र की इकाई के कंपोनेंट

हेवा इलास्टिक्स में बने रबर बुशिंग तोप के प्रोपेलर के अंदर लांचर में लगे
मध्य प्रदेश की लघु एवं मध्यम इकाइयों (एसएमई) के लिए गर्व करने का क्षण आया है। स्विस बोफोर्स तोपों के देश में तैयार किए जा रहे स्वदेशी संस्करण में पहली बार उज्जैन की एक एसएमई के कंपोनेंट का इस्तेमाल किया गया है। यहीं नहीं इंदौर की भी एक लघु एवं मध्यम इकाई को कंपोनेंट सप्लाई के ऑर्डर जल्द मिलने वाले हैं।
गुणवत्तापूर्ण और सक्षम उत्पाद बनाने के मामले में आम तौर पर संदेह से देखे जाने वाले एसएमई क्षेत्र की उज्जैन की हेवा इलास्टिक्स ने बोफोर्स तोप के स्वदेशी संस्करण के मार्फत सफलता का यह धमाका किया है। हेवा में बने रबर बुशिंग तोप के प्रोपेलर के अंदर लांचर में लगे है, जो तोप को सस्पेंशन प्रदान करते है। हेवा के 2 और कंपोनेंट का बोफोर्स के स्वदेशी संस्करण की तैयार 2 तोपों में किया गया है। हेवा इलास्टिक्स के सीईओ फजल कोठारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि गत अक्टूबर में उन्हें कंपोनेंट सप्लाई का ऑर्डर मिला था।
कोठारी ने बताया कि पिछले साल इंदौर में आयोजित इंड-एक्सपो में पेश उनके कम्पोनेंट्स में जबलपुर स्थित रक्षा उत्पादन मंत्रालय के उपक्रम गन कैरेज फैक्ट्री (जीसीएफ) के अधिकारियों ने रूचि दिखाई थी। गौरतलब है कि हेवा इलास्टिक्स मध्य प्रदेश की एसएमई क्षेत्र की पहली इकाई है जिसके कंपोनेंट का इस प्रतिष्ठापूर्ण परियोजना के लिए चयन हुआ है।
इंदौर की एक इकाई सुप्रीम रोल्स एंड शीयर्स प्रा. लि. भी मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी को इसी तरह का गौरव दिलाने जा रही है। सुप्रीम ने जीसीएफ को 10 कंपोनेंट दिए थे, जिसमें से 9 के सप्लाई के लिए एप्रूवल मिल गई है। सुप्रीम रोल्स एंड शीयर्स के एमडी राजीव गुप्ता ने बताया कि हमें जीसीएफ की ओर से इसी हफ्ते ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
गुप्ता ने बताया कि उनकी इकाई के एलॉय-स्टील कम्पोनेंट्स को एप्रूवल मिली है। इनमें प्रमुख है- लार्जर, पिन, बुश, डेम्पर, लिंक और रीम्ड। इनमें से बुश और डेम्पर का उपयोग तोप से गोले के फायर होने के बाद शॉक को एब्जार्व करने में होता है।
एसएमई इकाइयों की प्रतिनिधि संस्था एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के इस प्रोजेक्ट के लिए डेवलपमेंट एक्जीक्यूटिव राहुल शर्मा ने बताया कि जीसीएफ ने इस मामले में गहरी रुचि दिखाई थी।







