समूचे उत्तर भारत में इस साल जोरदार सर्दी गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य पंजाब और हरियाणा में सर्दी के मौसम से गेहूं की बंपर पैदावार की संभावना बढ़ गई है। इन दोनों ही राज्यों में गेहूं का कुल उत्पादन 274.61 लाख टन के लक्ष्य से भी ज्यादा रहने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल गेहूं की फसल में रतुआ रोग जैसी कोई बड़ी बीमारी न होने से भी ज्यादा पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है। पंजाब कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस साल गेहूं की बेहतर पैदावार रहने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि जनवरी के दौरान मौसम फसल के लिए उपयुक्त रहा है। दूसरी वजह यह है कि इस साल फसल में रतुआ रोग लगने की कोई खबर नहीं आई।
विशेषज्ञों के अनुसार कड़ाके की सर्दी से गेहूं की फसल के विकास में मदद मिलती है। सर्दी के चलते गेहूं के पौधे में कई जड़े विकसित होती हैं और पौधा घना होने के साथ ज्यादा बालियां लगती हैं और उत्पादन बढ़ जाता है। पंजाब और हरियाणा में तापमान सामान्य से 5-6 डिग्री सेल्सियस कम चल रहा है।
हरियाणा में भी मौसम अनुकूल रहने के कारण गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार रहने की उम्मीद है। हरियाणा कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमने राज्य में 47.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं का उत्पादन होने का अनुमान गया है लेकिन उपयुक्त मौसम को देखते हुए पैदावार 47.50 क्विटंल प्रति हेक्टेयर तक रह सकती है। यह पैदावार हरियाणा में अब तक की सबसे ज्यादा उत्पादकता होगी।
पंजाब ने 35.15 लाख हेक्टेयर रकबा में 156 लाख टन गेहूं का उत्पादन होने का अनुमान लगाया है लेकिन अच्छे मौसम से उत्पादन बढ़कर 164.72 लाख टन तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर हरियाणा में 118.61 लाख टन गेहूं का उत्पादन होने की संभावना है। वहां 25.05 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर अगले कुछ महीनों में तापमान में अनायास बढ़ोतरी नहीं होती है और आंधी-तूफान नहीं आते हैं तो इन राज्यों में गेहूं का उत्पादन बढऩे की पूरी संभावना है। करनाल स्थित गेहूं अनुसंधान निदेशालय की प्रोजेक्ट डायरेक्टर इंदु शर्मा ने कहा कि मार्च व अप्रैल के दौरान आंधी नहीं आई और तापमान ज्यादा नहीं बढ़ा तो पूरे देस में गेहूं का उत्पादन ज्यादा रहने की संभावना है।