सिरेमिक व ग्लास हब के लिए गैस आपूर्ति को तैयार गेल

गेल को केवल भूमि व पर्यावरण मंजूरी लेनी है
750 एकड़ में रीको की ओर से घिलोठ में विकसित किए जा रहे सिरेमिक एंड ग्लास हब में गैस आपूर्ति के लिए सुल्तानपुर-नीमराणा (एसएनएलपी) का विस्तार किया जा रहा है
5.0 एमएमएससीएमडी सुल्तानपुर-नीमराना गैस लाइन के पहले व दूसरे चरण की क्षमता है जहां पर टी होने से घिलोठ हब के लिए पाइपलाइन से गैस आपूर्ति में समस्या नहीं होगी
10 करोड़ का कोष स्थापित होगा
जयपुर - राजस्थान में सेरामिक और ग्लास क्षेत्र में कौशल विकास के लिए 10 करोड़ रुपये का कोष बनाया जाएगा। यह राशि से इस क्षेत्र के विकास के लिए खर्च होगी। राजस्थान के उद्योग व खनन मंत्री राजेंद्र पारीक ने सेरा ग्लास के समापन पर यह घोषणा की। (ब्यूरो)
गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (गेल) ने राजस्थान औद्योगिक विकास व विनिवेश निगम लिमिटेड (रीको) की ओर से अलवर जिले के घिलोठ में प्रस्तावित सिरेमिक व ग्लास हब में प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है। इसके लिए सुल्तानपुर-नीमराना गैस पाइप लाइन का विस्तार किया जाएगा।
कंपनी के क्षेत्रीय विपणन महाप्रबंधक एसएन कुमार ने बताया कि रीको की ओर से घिलोठ में 750 एकड़ जमीन में विकसित किए जा रहे सिरेमिक एंड ग्लास हब में गैस आपूर्ति के लिए सुल्तानपुर-नीमराणा (एसएनएलपी) का विस्तार किया जा रहा है। क्योंकि मौजूदा पाइपलाइन नेटवर्क सुल्तानपुर-नीमराना सीजेपीएल बढ़ोतरी की संभावना से युक्त लाइन है, जो वर्तमान में 82 किलोमीटर क्षेत्र में है। इसको आसानी से घिलोठ के सिरेमिक एंड ग्लास हब की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।
सुल्तानपुर-नीमराना गैस लाइन के पहले व दूसरे चरण की क्षमता 5.0 एमएमएससीएमडी है। यहां पर टी होने के चलते घिलोठ हब के लिए इस पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि सिरेमिक एंड ग्लास उद्योग के लिए प्राकृतिक गैस सबसे अधिक उपयुक्त ईंधन है। क्योंकि अन्य ईंधन के मुकाबले यह सस्ता पड़ता है। कम कीमत के चलते सिरेमिक एंड ग्लास उद्योग के लिए आर्थिक रूप से वहन योग्य है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक गैस भी आदर्श है, क्योंकि यह एक स्वच्छ जीवाश्म ईंधन है। इससे कोई प्रदूषण नहीं होता है।
इस गैस से सल्फर उत्सर्जन नहीं होने और कॉम्पेक्ट संयंत्र के आकार के लिए यह बेहतर विकल्प है। हालांकि गेल को घिलोठ में गैस ग्रिड की स्थापना के लिए केवल भूमि व पर्यावरण मंजूरी लेनी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में मौजूदा पाइपलाइन नेटवर्क के बारे में कहां कि विजयपुर-बोरेली-गढ़ेपान नेटवर्क का कोटा तक विस्तार किया जाएगा।
इसके बाद इसे चित्तौडगढ़़ और भीलवाड़ा के लिए बढ़ाया जाएगा। गेल ने राजस्थान सरकार के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत भूमिगत कोयला गैसीकरण की एक पायलट परियोजना (सीबीएम) की स्थापना बाड़मेर में की जाएगी। गेल जैसलमेर रामगढ़ में एक पांच मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर रहा है।







