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औद्योगिक क्षेत्र में कॉमर्शियल प्लॉट हो सकेंगे फ्री होल्ड

सचिन यादव नई दिल्ली | Feb 01, 2013, 15:41PM IST
 
 


राजधानी दिल्ली के कॉमर्शियल औद्योगिक प्लॉटों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के प्रस्ताव को उपराज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना ने अपनी मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी मिलने के बाद औद्योगिक इलाकों में विकास कार्य को और अधिक तेजी मिलने की उम्मीद है। साथ ही पीपीपी मॉडल के तहत विकास में निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ सकती है।



 



डीएसआईआईडीसी की तरफ से जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक औद्योगिक इलाकों में बने हुए कॉमर्शियल प्लॉट को लीज होल्ड से फ्री होल्ड में बदलने की मंजूरी मिल गई है। सर्कुलर के मुताबिक, उन्हीं औद्योगिक प्लॉटों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड में तब्दील किया जा सकेगा जिनके पास कॉमर्शियल प्लॉट पर बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन पूरा होने का सर्टिफिकेट डी होगा। उन्हीं लोगों को इस बाबत मंजूरी दी जाएगी।



 



लीज होल्ड से फ्री होल्ड में प्लॉट को तब्दील किए जाने के मौके पर प्लॉट मालिक को मंजूर किया गया बिल्डिंग प्लान, नियमित बिजली के बिल कनेक्शन का प्रूफ और बिल्डिंग बनने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स का सबूत होना चाहिए। लीज फोल्ड से फ्री होल्ड कॉमर्शियल प्लॉट को तब्दील करने के लिए बंधक रखे प्लॉट को सभी संबंधित बैंकों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी लेना होगा। लीज होल्ड पर जिस प्रॉपर्टी धारक का नाम होगा, उसी के नाम पर प्रॉपर्टी को लीज होल्ड से फ्री होल्ड में तब्दील किया जाएगा। प्रॉपर्टी को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करवाने के लिए डीएसआईआईडीसी के द्वारा समय-समय पर रेट में तब्दीली की जाती रहेगी।



 



अपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स ऑफ एनसीटी के चेयरमैन रघुवंश अरोड़ा ने कहा कि डीएसआईआईडीसी के तरफ से लिया गया, यह निर्णय सराहनीय है। इससे औद्योगिक इलाकों का डेवलपमेंट तेज होगा। साथ ही, पीपीपी मोड पर काम को आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि हम पहले ही यह राय डीएसआईआईडीसी को दे चुके हैं कि कॉमर्शियल प्लॉटों को बेचकर जितना भी पैसा डीएसआईआईडीसी के पास आता है। उस पैसे को औद्योगिक इलाकों के डेवलपमेंट पर खर्च करना चाहिए। इसके अलावा, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का निर्माण भी किया जा सकेगा।



 



अब औद्योगिक इलाकों का डेवलपमेंट तेज होगा

मंजूरी

मंजूरी मिलने के बाद औद्योगिक इलाकों में विकास कार्य को और अधिक तेजी मिलने की उम्मीद
साथ ही पीपीपी मॉडल के तहत विकास में निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ सकती है
बिजली बिल कनेक्शन का प्रूफ और बिल्डिंग बनने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स का सबूत देना होगा



 
 
 

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