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कॉमर्शियल से ज्यादा रही रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी की मांग

संतोष कुमार | Dec 19, 2012, 00:38AM IST
कॉमर्शियल से ज्यादा रही रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी की मांग

साल 2012 में दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी का लेख-जोखा
सोहना रोड पर कॉमर्शियल स्पेस की मांग बढी
दिल्ली के साकेत में ऑफिस स्पेस की मांग में आया उछाल
ग्रेटर नोएडा के कॉमर्शियल रियल एस्टेट में नहीं दिखी निवेशकों की दिलचस्पी
नोएडा एक्सटेंशन और नोएडा एक्सप्रेस वे में निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई
नोएडा एक्सटेंशन के किफायती दामों की वजह से निवेशकों ने यहां प्रॉपर्टी की खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई

रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में फरीदाबाद का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। नहरपार का इलाका अपने पिछले रिकॉर्ड को पूरा नहीं कर पाया और साल 2012 के दौरान इसकी कीमतों में मामूली इजाफा हुआ

साल 2012 की बात करें तो गुडग़ांव की सोहना रोड पर किफायती ऑफिस स्पेस होने की वजह से इसकी खपत में काफी इजाफा हुआ है। गुडग़ांव में ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं जो काफी महंगे थे और इनका किराया प्रति वर्गफुट 70 रुपये था। इसके मुकाबले सोहना में काफी अच्छी ऑफिस प्रॉपर्टी 30 से 40 रुपये प्रति वर्ग फुट पर उपलब्ध है। किफायती दामों और रेडी टू मूव रेजीडेंशियल विकल्पों के चलते यह इलाका पसंदीदा बिजनेस डेस्टिनेशन के तौर पर उभरा।


कॉमर्शियल स्पेस-डीएलएफ साइबर सिटी
डीएलएफ साइबर सिटी ने एनसीआर बेल्ट में पसंदीदा कारोबारी ठिकाने के तौर पर अपनी साख बनाए रखी। इस इलाके की खास बात है कि यहां कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां मौजूद हैं। साथ ही यहां काफी सुविधाएं भी हैं तो ऐसे में ऑफिस प्रॉपर्टी के लिए यह लोकेशन उपयुक्त है। हालांकि डीएलएफ साइबर सिटी में ढांचागत सुविधाओं को सुधारने की काफी संभावनाएं मौजूद है। जहां तक दिल्ली की बात है तो निश्चित तौर पर लीज पर ऑफिस स्पेस देने के मामले में साकेत सबसे आगे रहा है। इस इलाके  में भी ऑफिस रियल एस्टेट की सप्लाई और खपत में काफी इजाफा हुआ है। साकेत को कुछ चीजों से काफी फायदा मिला।
* यह दिल्ली का सबसे हैपेनिंग ठिकाना माना जाता है
* दिल्ली के अन्य इलाकों से और गुडग़ांव,नोएडा से इसकी कनेक्टिविटी काफी अच्छी है
* यहां काफी अच्छी प्रॉपर्टी की सप्लाई मौजूद है


बुरे प्रदर्शन वाले इलाके
ऑफिस स्पेस की खपत के मामले में कुछ इलाकों का प्रदर्शन साल 2012 के दौरान काफी बुरा रहा है
एनएच-8 (गुडग़ांव राजीव चौक के बाद)
इस इलाके में ऑफिस स्पेस की सप्लाई और दामों में कोई दिक्कत नहीं थी। यहां खपत न होने की प्रमुख वजह रही कनेक्टिविटी। साथ ही घटिया रोड, ट्रैफिक जाम और पानी के जमाव ने स्थिति को बदतर बना दिया।


गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन
इस इलाके में सप्लाई काफी सीमित है। यहां खपत कम होने की प्रमुख वजह रही रेडी टू मूव रेजीडेंशियल विकल्पों की कमी रही। साल 2012 के दौरान इस इलाके के ज्यादातर रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट निर्माणाधीन रहे।  ऐसे में कॉरपोरेट ने यहां ऑफिस स्पेस खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई ।


ग्रेटर नोएडा और सेक्टर-62
साल 2012 के दौरान ऑफिस स्पेस की खपत की बात करें तो नोएडा काफी पीछे रहा। कारण यह है कि नोएडा के अन्य इलाकों में किफायती दामों में रेंटल प्रॉपर्टी के विकल्प मौजूद हैं। ग्रेटर नोएडा के मौजूदा कॉमर्शियल प्रॉपर्टी वाले इलाकों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, जिसका प्रमुख कारण है कि नोएडा एक्सप्रेस वे में अच्छी क्वालिटी की ऑफिस प्रॉपर्टी की सप्लाई है।


साल 2012 के दौरान दिल्ली एनसीआर की रीटेल रियल एस्टेट की सप्लाई प्रभावित रही। साथ ही जो सप्लाई मौजूद है उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है। दिल्ली एनसीआर में जो भी मॉल मौजूद हैं, आधे दशक पुराने हैं। इसके बावजूद कुछ प्रीमियम मॉल का प्रदर्शन साल 2011 की तुलना में काफी अच्छा रहा है।


रेजीडेंशियल रियल एस्टेट का प्रदर्शन
साल 2012 के दौरान रेजीडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। हालांकि गुडग़ांव के हर इलाके का प्रदर्शन ऐसा नहीं रहा है। कुछ प्रोजेक्ट में बिक्री कम होने की वजह इनवेंट्री काफी ज्यादा हो गई। गोल्फ कोर्स रोड, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड की तुलना में दाम कम होने की वजह से सोहना रोड की प्रॉपर्टी के दामों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। गुडग़ांव के इन इलाकों में प्रदर्शन अच्छा इसलिए रहा क्योंकि एनएच 8 और एमजी रोड के जरिए दिल्ली से इनकी कनेक्टिविटी काफी अच्छी है। यहां से नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचना आसान है।


इसके अलावा 2012 के दौरान दिल्ली एनसीआर में द्वारका एक्सप्रेस वे का प्रदर्शन जबरदस्त रहा। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से इसकी कनेक्टिविटी और प्रस्तावित डिप्लोमेटिक एनक्लेव, ढांचागत सुविधाएं और पश्चिमी दिल्ली और गुडग़ांव से अच्छी कनेक्टिविटी के चलते यह इलाका काफी रफ्तार से विकसित हो रहा है। इस इलाके में निवेशकों की बढ़ रही दिलचस्पी के चलते यहां रियल एस्टेट प्रॉपर्टी की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। मौजूदा साल की शुरुआत में यहां प्रॉपर्टी की कीमतें 4,000 रुपये प्रति वर्ग फुट थी हालांकि साल के अंत तक इसकी कीमतें 7,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई।


सोहना रोड
गोल्फ कोर्स रोड और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड से ज्यादा किफायती होने की वजह से सोहना की प्रॉपर्टी दामों में संतोषजनक इजाफा दर्ज किया गया। इसका एक कारण यह भी था कि यहां रेडी टू मूव यूनिट की सप्लाई अच्छी रही। ऐसे में यह इलाका निवेशकों को काफी पसंद आया। सोहना रोड के प्रोजेक्ट में 1,500 से 2,000 रुपये प्रति वर्ग फुट का इजाफा दर्ज किया गया। फिलहाल इसके दाम बढ़कर 8,000 से 9500 रुपये प्रति वर्ग फुट पर पहुंच गए हैं।


साल 2012 के दौरान रेजीडेंशियल रियल एस्टेट के मामले में नोएडा का प्रदर्शन भी काफी अच्छा रहा है। खासतौर पर नोएडा एक्सटेंशन और नोएडा एक्सप्रेस वे में निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई। नोएडा एक्सटेंशन के किफायती दामों की वजह से निवेशकों ने यहां प्रॉपर्टी की खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई। इस इलाके के कुछ प्रोजेक्ट के दामों में 25 फीसदी से ज्यादा इजाफा हुआ।


इसके अलावा नोएडा एक्सप्रेस वे कॉमर्शियल हब के तौर पर निवेशकों को लुभाता रहा । प्रमुख वजह है कि यह इलाका गुडग़ांव और दिल्ली से ज्यादा किफायती है। कुल मिलाकर साल 2012 के दौरान नोएडा के रेजीडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में 20 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया।


हालांकि इस अवधि में दिल्ली के प्रॉपर्टी मार्केट में ज्यादा इजाफा दर्ज नहीं किया गया। आसमान छूती कीमतें और सीमित सप्लाई इसकी प्रमुख वजह रही। प्रॉपर्टी के दामों के खास चमक नहीं देखी गई। जहां तक कीमतों की बात है तो दक्षिणी दिल्ली की रियल एस्टेट प्रॉपर्टी के दामों में खास इजाफा नहीं हुआ, इसके उलट दामों में मामूली गिरावट ही दर्ज की गई।


दिल्ली एनसीआर के रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में फरीदाबाद का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। नहरपार का इलाका अपने पिछले रिकॉर्ड को पूरा नहीं कर पाया और साल 2012 के दौरान इसकी कीमतों में मामूली इजाफा हुआ। मौजूदा साल फरीदाबाद के प्रॉपर्टी बाजार में औसतन 10 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया।
- लेखक रियल एस्टेट रिसर्च कंपनी जोंस लैंग लासाल इंडिया के सीईओ-ऑपरेशंस हैं।

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