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बुवाई जारी लेकिन मूंगफली का रकबा बढ़कर फिर घटा!

आर.एस. राणा नई दिल्ली | Jan 07, 2013, 00:10AM IST
बुवाई जारी लेकिन मूंगफली का रकबा बढ़कर फिर घटा!

दो हफ्तों में मूंगफली का रकबा 5.31 लाख हैक्टेयर से घटाकर 4.84 लाख हैक्टेयर दर्शाया

आंकड़ों का खेल
१३ दिसंबर को मूंगफली का रकबा 3.52 लाख हेक्टेयर
२१ दिसंबर को रकबा बढ़कर 5.31 लाख हैक्टेयर हो गया
२८ दिसंबर घटकर 4.02 लाख हैक्टेयर रह गया रकबा
४ जनवरी को बुवाई का आंकड़ा 4.84 लाख हैक्टेयर पर


फसलों के बुवाई आंकड़ो में हेरफेर करना कृषि मंत्रालय की आदत सी बन गई है। पिछले साल रबी सीजन में सरसों के बुवाई आंकड़ों में हेराफेरी की गई थी जबकि इस बार कृषि मंत्रालय ने मूंगफली के बुवाई आंकड़ों में यही खेल खेला है। इसका असर तिलहन के कुल बुवाई आंकड़ों पर भी देखने को मिला।


कृषि मंत्रालय द्वारा 21 दिसंबर 2012 को जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन वर्ष 2012-13 में मूंगफली की बुवाई 5.31 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी लेकिन 4 जनवरी 2013 को जारी किए गए आंकड़ों में इसे घटाकर 4.84 लाख हैक्टेयर दर्शाया गया है। दिसंबर के मुकाबले जनवरी में बुवाई बढ़ तो सकती है लेकिन घटने का माजरा समझ से परे है।


मंत्रालय हर सप्ताह शुक्रवार को फसलों के बुवाई आंकड़े जारी करता है।
कृषि मंत्रालय द्वारा 13 दिसंबर 2012 को जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार रबी सीजन वर्ष 2012-13 में मूंगफली की बुवाई 3.52 लाख हेक्टेयर में हुई थी। यहां तक तो सब ठीक था लेकिन खेल इसके बाद शुरू हुआ। मंत्रालय द्वारा 21 दिसंबर 2012 को जो बुवाई आंकड़े जारी किए गए, उसमें बुवाई रकबा बढ़ाकर 5.31 लाख हैक्टेयर दिखाया गया।


उसके बाद मंत्रालय ने 28 दिसंबर 2012 को जो बुवाई के आंकड़े जारी किए, उसमें मूंगफली की बुवाई घटाकर 4.02 लाख हैक्टेयर कर दी गई। मंत्रालय द्वारा 4 जनवरी 2013 को ताजा जारी किए गए आंकड़ों में मूंगफली की बुवाई 4.84 लाख हैक्टेयर में हुई है। आगामी सप्ताह या महीने में बुवाई आंकड़ों में बढ़ोतरी नहीं हो, यह बात तो समझ में आती है लेकिन दिसंबर के मुकाबले जनवरी में बुवाई आंकड़े कम हो जाए। ऐसा खेल तो कृषि मंत्रालय में ही हो सकता है।


मूंगफली के कुल बुवाई आंकड़ों में हेराफेरी का असर तिलहनों के कुल बुवाई आकड़ों में भी देखने को मिला। कृषि मंत्रालय द्वारा 14 दिसंबर 2012 को जारी बुवाई आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2012-13 में तिलहनों की कुल बुवाई 78.99 लाख हैक्टेयर में दिखाई गई।


उसके बाद 21 दिसंबर को जारी किए आंकड़ों में वर्ष 2012-13 में तिलहनों की बुवाई बढ़कर 79.58 लाख हैक्टेयर में हो गई लेकिन 28 दिसंबर 2012 को जो आंकड़े जारी किए गए उसमें तिलहनों की कुल बुवाई घटाकर 78.85 लाख हैक्टेयर में कर दी गई।


ऐसे में कृषि मंत्रालय द्वारा जारी फसलों के बुवाई आंकड़ों पर कैसे भरोसा किया, यह कहने की आवश्यकता नहीं है। कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2012-13 खरीफ में मूंगफली की पैदावार घटकर 38.22 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि वर्ष 2011-12 में 50.97 लाख टन की पैदावार हुई थी। पैदावार में कमी के कारण मूंगफली तेल की कीमतें बढ़कर 2,200 से 2,225 रुपये प्रति 15 किलो हो गई है।

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