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छोटे कारोबारियों को बढ़ेगा कर्ज का प्रवाह

महेंद्र सिंह नई दिल्ली | Jan 07, 2013, 00:45AM IST
छोटे कारोबारियों को बढ़ेगा कर्ज का प्रवाह

क्या फर्क
निवेश सीमा बढऩे से ज्यादा कारोबारी अब आएंगे माइक्रो सेक्टर के दायरे में
बैंकों को इससे छोटे कारोबारियों को कर्ज देने का लक्ष्य पूरा करने में मिलेगी मदद
लक्ष्य से पीछे - माइक्रो सेक्टर को कर्ज देने के लक्ष्य से फिलहाल काफी पीछे चल रहे हैं बैंक

छोटे कारोबारियों को अब बैंकों से कर्ज के प्रवाह में तेजी आएगी। माइक्रो सेक्टर के वास्ते मशीनरी और प्लांट के लिए निवेश सीमा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। इससे ज्यादा कारोबारी माइक्रो सेक्टर के दायरे में आएंगे। इससे बैंकों को छोटे कारोबारियों को कर्ज देने का अपना लक्ष्य पूरा करने में मदद मिलेगी। छोटे बैंकों को कर्ज देने के लक्ष्य से पिछड़ रहे बैंकों का कहना था कि मौजूदा निवेश सीमा में उन्हें ज्यादा छोटे कारोबारी नहीं मिलते हैं।


रिजर्व बैंक ने हाल ही में सभी वाणिज्यिक बैंकों के प्रमुखों को सर्कुलर जारी कर कहा है कि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों को दिए जाने वाले कर्ज का कुल 40 फीसदी सूक्ष्म कारोबारियों (मैन्युफैक्चरिंग) को जाना चाहिए। इसके लिए निवेश की सीमा 10 लाख रुपये होगी। वहीं, सूक्ष्म कारोबारी (सेवा) के लिए उपकरणों पर निवेश की सीमा चार लाख रुपये होगी। पहले सूक्ष्म कारोबारियों (मैन्युफैक्चरिंग) के लिए मशीनरी और प्लांट पर निवेश की सीमा पांच लाख रुपये थी और सूक्ष्म कारोबारियों (सेवा) के लिए उपकरणों पर निवेश की सीमा 2 लाख रुपये थी।


फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के सेक्रेटरी जनरल अनिल कुमार ने 'बिजनेस भास्कर' को बताया कि इस कदम से बैंकों को माइक्रो सेक्टर को कर्ज देने का अपना लक्ष्य पूरा करने में जरूर मदद मिलेगी। हालांकि इससे माइक्रो सेक्टर की कर्ज की जरूरतें पूरी होंगी, इसमें संदेह है।


अनिल कुमार का कहना है कि महंगाई बढऩे के साथ ही मशीनरी और उपकरणों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में अगर किसी सूक्ष्म कारोबारी को अपने प्लांट का अपग्रेडेशन करना है तो इसके लिए 10 लाख रुपये पर्याप्त नहीं हैं।


गौरतलब है कि बैंक माइक्रो सेक्टर को कर्ज देने के लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे हैं। बैंकों का कहना था कि माइक्रो सेक्टर के लिए मशीनरी और प्लांट पर निवेश की मौजूदा सीमा के तहत उनको कर्ज देने के लिए पर्याप्त संख्या में कारोबारी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक ने निवेश की सीमा बढ़ाकर बैंकों के लिए कर्ज का प्रवाह बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है।

  
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