महंगाई पर अंकुश लगाने के उपायों के तहत मार्च 2010 से महत्वपूर्ण दरों में 13 बार बढ़ोतरी करने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों को पूर्ववत रखा था। महंगाई में भी अब नरमी का रुख दिखने लगा है।
नवंबर में प्रमुख महंगाई दर जहां 9.1 प्रतिशत रही वहीं इसके पिछले महीने यह 9.73 प्रतिशत थी। खाद्य महंगाई भी घट कर 0.42 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। हाल ही में आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने यह संकेत दिया कि मौद्रिक नीतियों अब नरमी आने की संभावना है।
अर्थशास्त्रियों का भी अनुमान है कि 24 जनवरी को पेश की जाने वाली मौद्रिक नीति में आरबीआई दरों में कुछ कटौती कर सकता है। संभावना इस बात की भी बनती है कि अगर आरबीआई बैंक ग्रोथ को बढ़ावा देने के ख्याल से दरों में कटौती करता है तो विभिन्न बैंक देर-सवेर ब्याज दरों के साथ-साथ जमा दरों में भी धीरे-धीरे कटौती की शुरुआत करेंगे।
यूको बैंक के सेवानिवृत्त एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर वी. के ढींगरा कहते हैं कि अगर भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीतियों में नरमी लाता है तो ब्याज दरों में गिरावट की शुरुआत होगी और जहां तक जमा दरों में कमी की बात है तो बैंक अपनी जरूरत के मुताबिक इसमें कमी लाएंगे। लेकिन, कम से कम मार्च तक अधिकांश बैंकों की जमा दरों (फिक्स्ड डिपॉजिट पर) में शायद ही कमी देखने को मिले। बैंकों का ज्यादा जोर क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा देना होगा।
महाराष्ट्र बैंक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ए. एस. भट्टाचार्य कहते हैं कि अगर रिजर्व बैंक दरों में कटौती करता है तो शॉर्ट टर्म डिपॉजिट की जमा दरें कुछ घट सकती हैं लेकिन दीर्घावधि की जमा दरों में इतनी जल्दी बदलाव नहीं आएगा।
अपनापैसा डॉट कॉम के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर हर्ष रूंगटा कहते हैं कि अगर आरबीआई द्वारा उठाए गए कदमों से जमा दरों में कमी आती है तो यह बैंक और कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट दोनों पर समान रूप से लागू होगा। हां, अपवाद के तौर पर कुछ ऐसी कंपनियां अपने फिक्स्ड डिपॉजिट की दरों में कटौती नहीं भी कर सकती हैं जिन्हें नकदी की सख्त जरूरत है। इस नजरिये से देखा जाए तो आने वाले कुछ महीने उन निवेशकों के लिए एक अवसर की तरह है जो फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश करते हैं।
दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होने के बाद बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट हों या कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट सभी की जमा दरें कम होनी शुरू हो जाएंगी। वर्तमान में एक से दो साल के फिक्स्ड डिपॉजिट पर अभ्युदय को-ऑपरेटिव बैंक 10.35 प्रतिशत, सारस्वत बैंक 10.25 प्रतिशत, करूर वैश्य बैंक 10 प्रतिशत और सिंडिकेट बैंक 9.50 प्रतिशत की जमा दरों की पेशकश कर रह हैं।
लंबे समय के लिए करें फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश
ढींगरा कहते हैं कि जमा दरों की यह स्थिति ज्यादा समय तक बरकरार नहीं रहेगी। इसलिए, अगर निवेशकों के पास निवेश के लिए अतिरिक्त राशि है तो उन्हें अल्पावधि की जगह लंबे समय के लिए निवेश करना चाहिए। मान लीजिए अगर 1-2 साल की अवधि के लिए निवेशकों को 10 प्रतिशत का ब्याज मिलता है और 3 साल के फिक्स्ड डिपॉजिट पर उन्हें 9.50 प्रतिशत का ब्याज मिलता है तो उन्हें तीन साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट करना चाहिए क्योंकि 1 साल वाले फिक्स्ड डिपॉजिट के मैच्योर होने के बाद संभव है उन्हें ऐसी आकर्षक दरें बाजार में फिर न मिलें।
कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट भी हैं आकर्षक
ब्याज दरों में लगातार हुई बढ़ोतरी के कारण कंपनियों के लिए फंड जुटाना महंगा हो गया। यही वजह है कि कंपनियां फिक्स्ड डिपॉजिट पर आकर्षक जमा दरों की पेशकश कर रहे हैं। अभी एक से दो साल के फिक्स्ड डिपॉजिट पर नीसा लीजर लिमिटेड 11.75 और जेपी इंफ्राटेक 11 प्रतिशत की जमा दरों की पेशकश कर रही हैं।
कॉरपोरेट एफडी बनाम बैंक एफडी
कंपनी को पूंजी की जितनी ज्यादा जरूरत होती है, वह उतनी ही अधिक ब्याज दर की पेशकश करती है। वहीं यह निवेशकों पर भी निर्भर करता है कि वे कितनी राशि निवेश कर रहे हैं और कितना जोखिम ले सकते हैं। यदि राशि छोटी है, तो बैंक एफडी और कॉरपोरेट एफडी के रिटर्न में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता। बैंकों में एक लाख रुपये तक की एफडी पर तो सरकार भी गारंटी देती है।
फिर भी यदि कॉरपोरेट एफडी में निवेश करना चाहते हैं तो निवेशक सिर्फ ब्याज दरों पर ध्यान न दें और निवेश से पहले कंपनी की प्रोफाइल और रेटिंग जांच ले। एएए रेटिंग वाली कंपनियां अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं। वहीं यदि कंपनी की बैलेंस शीट घाटा दर्शा रही है तो उसमें निवेश से बचना चाहिए।
कंपनी एफडी की जमा दरें
| कंपनी | अवधि 1-2 साल |
| नीसा लीजर लिमिटेड | 11.75 प्रतिशत |
| डी. एस. कुलकर्णी डेव. लिमिटेड | 11.50 प्रतिशत |
| जेपी इंफ्राटेक | 11.00 प्रतिशत |
| दीवान हाउसिंग फाइनेंस | 11.00 प्रतिशत |
| बिड़ला पावर सॉल्यूशन लि. | 11.00 प्रतिशत |