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बिना तहकीकात न खरीदें प्रॉपर्टी

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Jan 02, 2013, 02:00AM IST
बिना तहकीकात न खरीदें प्रॉपर्टी

अगर डेवलपर या बिल्डर ने विभिन्न प्राधिकरणों से आवश्यक मंजूरी नहीं ली है तो न केवल प्रोजक्ट में विलंब हो सकता है बल्कि प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट भी आ सकती है

अपना घर, भले वह छोटा हो, एक सुकून देता है। लेकिन प्रॉपर्टी की दिन दूनी, रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ती कीमतों के कारण मध्यम वर्गीय के लिए मुख्य शहर में अपना घर खरीदने की बात एक सपना बनता जा रहा है। डेवलपर भी बड़े खरीदारों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर प्रोजेक्ट लांच करते हैं जिनसे वह मोटा मुनाफा कमाते हैं। शहर के आस-पास बनने वाले मकान भी सस्ते नहीं रहे लेकिन ज्यादातर लोगों के पास इसके अलावा कोई विकल्प बच भी नहीं रहा। बड़े-छोटे शहरों में आपको विभिन्न डेवलपरों और बिल्डरों की होर्डिंग और अखबारों में विभिन्न प्रोजेक्ट के विज्ञापन जरूर दिख जाएंगे।


बिना तहकीकात किए इन हाउसिंग प्रोजेक्ट में अपने लिए फ्लैट या मकान बुक कराना बुद्धिमानी नहीं कही जा सकती। बिल्डरों और डेवलपरों को परियोजना शुरू करने से पहले विभिन्न प्राधिकरणों से तमाम तरह की अनुमति लेनी होती हैं। अगर, बिल्डर ने किसी संबंधित प्राधिकरण से परियोजना के लिए अनुमति नहीं ली है तो परियोजना विलंबित हो सकती है और बाद में न केवल प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट आ सकती है बल्कि खरीदार को लोन लेने और उस प्रॉपर्टी को बेचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अपनी मेहनत की कमाई को डूबने से बचाने के लिए प्रॉपर्टी की खरीदारी से पहले कुछ जरूरी तहकीकात कर यह सुनिश्चित कर लें कि बिल्डर के पास परियोजना को सफल बनाने से संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी हासिल है।


जमीन की हकीकत
सबसे बड़ा मसला जमीन का होता है। जिस तेजी से रियल एस्टेट परियोजनाएं पांव पसार रही हैं उसमें यह देखना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि निर्माण के लिए प्रस्तावित जमीन आवासीय निर्माण के लिए प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत है या नहीं। सरकार खास जमीनों के विशेष इस्तेमाल के लिए ही मंजूरी देती है। अगर, खेती वाली जमीन पर हाउसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है तो बाद में खरीदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यह अवैध माना जाता है। इसलिए, यह सुनिश्चित कर लें कि आपके बिल्डर ने खेती के जमीन पर हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कन्वर्जन की आवश्यक मंजूरी ली हुई है।


विभिन्न प्राधिकरणों की मंजूरी
विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्राधिकरणों से अनुमति लेनी होती है। जिसमें, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, पॉल्यूशन बोर्ड, टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट और कई अन्य स्थानीय प्राधिकरणों की मंजूरी शामिल है है। स्थानीय नगर निगम प्राधिकरण से बिल्डिंग प्लान की मंजूरी लेना जरूरी होता है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले बिल्डर को संबंधित प्राधिकरण के पास बिल्डिंग प्लान जमा कराना होता है।


प्राधिकरण की स्वीकृति यह सुनिश्चित करती है कि डेवलपर का बिल्डिंग प्लान शहर के बिल्डिंग नियमों के उप-नियमों के अनुरूप है। जैसे दिल्ली में बिल्डिंग प्लान की अनुमति दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) देता है, वहीं गुडग़ांव में इसके लिए  हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की अनुमति लेनी होती है।


प्रॉपर्टी की बुकिंग से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि बिल्डर विभिन्न नागरिक प्राधिकरणों जैसे प्रदूषण बोर्ड, जलापूर्ति विभाग आदि से अनापत्ति प्रमाणपत्र या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) ले चुका है। इसके अतिरिक्त पड़ोस के जायदाद मालिक से भी अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है ताकि यह साबित हो सके बिल्डर अपने ही जमीन पर निर्माण करने जा रहा है। किसी भी तरह का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभिन्न विभागों से  एनओसी लेना जरूरी होता है।


जमीन का मालिकाना हक
जमीन के मालिकाना हक को लेकर किसी तरह का विवाद तो नहीं है? यह देखा जाना भी जरूरी है। अगर जमीन विवादास्पद है और मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों के बीच मुकदमा चल रहा है तो एक खरीदार के तौर पर आपको ऐसी प्रॉपर्टी से दूर ही रहना चाहिए। विवादित जमीन के मामले में खरीदार को होम लोन लेने में परेशानी हो सकती है। जमीन विवादास्पद होने से निर्माण-कार्य भी विलंबित हो सकता है। निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद सबसे अंत में बिल्डरों को ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट लेना होता है। इसके बाद ही आप उस प्रॉपर्टी में रहने जा सकते हैं।


रेडी टु मूव प्रॉपर्टी को दें तरजीह
किसी निर्माणाधीन या हाल में शुरू हुए प्रोजेक्ट में अपने लिए घर खरीदना न केवल महंगा पड़ता है बल्कि इस बात की भी कोई गारंटी नहीं होती कि उसका पजेशन निर्धारित समय पर मिल ही जाएगा। इसलिए हमेशा रेडी टु मूव मकान यानी जो मकान तैयार है उसकी खरीदारी करना ज्यादा अच्छा विकल्प है। यह देखा जाना चाहिए कि मकान में पानी, बिजली आदि की वैध सुविधा है और दस्तावेज देख कर यह तस्दीक कर लें कि जमीन या नक्शे से जुड़ा कोई विवाद नहीं है।


उद्देश्य के अनुसार करें प्रॉपर्टी का चयन
प्रॉपर्टी का चयन इस बात पर निर्भर करता है कि आप घर अपने इस्तेमाल के लिए खरीद रहे हैं या फिर इंवेस्टमेंट के लिए। इसी के मुताबिक उचित कीमत पर मिलने वाली प्रॉपर्टी का चयन किया जाना चाहिए। रहने के इरादे से खरीदे गए घर दीर्घावधि के निवेश के समान हैं। भले ही घर की कीमत में बढ़ोतरी हो लेकिन आप उसका इस्तेमाल स्वयं ही कर रहे होते हैं।


ऐसे में प्रॉपर्टी के रेट बढऩे या घटने की दशा में कोई फर्क नहीं पड़ता। लंबी समयावधि में प्रॉपर्टी के मूल्य में बढ़ोतरी होगी, यह बात तो तय है। अगर निवेश के लिहाज से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो उसकी असली कीमत उसे बेचने पर ही मिलेगी। अगर मूल्य के हिसाब से प्रॉपर्टी अच्छी है और अन्य सुविधाओं के लिहाज से भी वह दुरूस्त है तो फिर उसकी खरीदारी में विलंब न करें।

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