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आसान नहीं कांग्रेस की डगर

राय तपन भारती नई दिल्ली | Jan 01, 2013, 03:39AM IST
 
 


मुकदमों के शिकंजे में राजनेता
>> भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण (72) को 11 साल पहले एक रक्षा सौदे में घूस लेने के जुर्म में चार साल की जेल की सजा मिली
>> 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन केस में जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी की अर्जी सीबीआई कोर्ट में खारिज होने से वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को बड़ी राहत
>> पूर्व संचार मंत्री ए. राजा को 2जी केस में 15 महीनों तक जेल में रहने के बाद कोर्ट से जमानत मंजूर होने पर फिलहाल राहत मिली
>> कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े रिश्वत कांड में सरकारी खजाने को 90 करोड़ रुपये का चूना लगाने के आरोप में कांग्रेस सांसद व गेम्स आयोजन कमेटी के पूर्व चेयरमैन सुरेश कलमाडी पर कोर्ट में आरोप तय
>> भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी की मानहानि के मामले में कोर्ट से सम्मन जारी होने पर वरिष्ठ नेता कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कोर्ट से ली जमानत
>> पूर्व एयर होस्टेस गीतिका शर्मा की आत्महत्या वाले केस में हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल गोयल कांडा और उनकी एक महिला सहयोगी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की ओर से चार्जशीट
>> मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को अपनी ओर से दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता के खिलाफ मानहानि के केस में बयान दर्ज करने के लिए कोर्ट में हाजिर होना पड़ा
>> शीला दीक्षित ने वीरेंद्र गुप्ता पर एमसीडी चुनावों के दौरान असभ्य भाषा का इस्तेमाल करने पर मानहानि का केस दायर कर रखा है
>> बिहार के लोगों को मुंबई में घुसपैठिया कहने और उन्हें राज्य से बाहर फेंकने की धमकी देने पर एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को केस दर्ज करने को कहा
>> पर्याप्त एकेडमिक ढांचा न होने पर भी इंदौर के एक मेडिकल कॉलेज में छात्रों को एडमिशन की इजाजत देने पर पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ए. रामदौस के खिलाफ सीबी आईने चार्जशीट दाखिल की
>> साल के अंत में 27 साल पुराने सिख विरोधी दंगे में वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार और पांच अन्य के खिलाफ केस दो कदम आगे बढ़ा

अगले लोकसभा चुनाव के लिए एक साल से थोड़ा ही अधिक समय बचा है मगर कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियां बेहतर राजनीतिक दल बनने के बजाय पूरे साल रक्षात्मक मुद्रा में रहीं। गुजरात में नरेंद्र मोदी की हैट्रिक और हिमाचल प्रदेश की सत्ता भाजपा की झोली से निकलकर कांग्रेस के खाते में जाने से राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी 2014 की भविष्यवाणी मुश्किल लग रही है।


वर्ष 2012 कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के लिए एक और मुश्किल भरा साल रहा क्योंकि इसी वर्ष तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय सत्ता का साथ छोड़ दिया मगर बाहर से समर्थन दे रहीं दो मुख्य दल- सपा और बसपा ने उसका रास्ता आसान कर दिया। रिटेल कारोबार में एफडीआई को इजाजत देने के मसले पर यूपी की यही दो पार्टियां मनमोहन सरकार के बचाव में आगे आईं।  


बहरहाल, कांग्रेस के लिए बीता साल बहुत अच्छा नहीं रहा। उसे चौतरफा संकटों से जूझना पड़ा। रेल का किराया बढ़ाने का मामला हो या कोई अन्य आर्थिक मामला केंद्र की यूपीए सरकार के लिए बेहद मुश्किल भरा समय रहा। रेल किराये में इजाफे के विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने अपने एक कैबिनेट मंत्री को यूपीए सरकार से हटा लिया।


कांग्रेस को मौजूदा सरकार बचाने के अलावा राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के अगले उम्मीदवार के रूप में चमकाना बेहद कठिन फैसला था। इसी कड़ी में संसद के शीत सत्र के पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में सचिन पायलट, आरपीएन सिंह जैसे युवाओं को महती जिम्मेवारी दी गई। फिर भी राहुल अब तक पीएम के प्रबल उम्मीदवार नहीं बन पाए हैं। वैसे कांग्रेस का कहना है कि राहुल को पार्टी में बड़ी जिम्मेवारी जल्द सौंपी जाएगी। 


कांग्रेस में एक खेमे का सोचना है कि भाजपा में नरेंद्र मोदी पीएम पद के उम्मीदवार के रूप में उभरते हैं तो लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोट का ध्रुवीकरण होगा जिसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है। भाजपा के लिए यह चुनौती भरा विषय है कि मोदी के पीछे पार्टी में कितने नेता खड़े रहते हैं। अगले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पार्टियां केंद्र में गैर-कांग्रेस या गैर-भाजपा की सरकार बनाने की जुगत में हैं। अभी तक भाजपा का साथ दे रहे जद-यू ने पहले से ही संकेत दे रखा है कि वह मोदी को पीएम के रूप में नहीं देखना चाहता। बहरहाल, बहुत सारे लोगों का ख्याल है कि अगला संसदीय चुनाव राहुल बनाम मोदी होगा। 


आने वाले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, कर्नाटक, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस का एक खेमा अगले लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में यूनाइटेड फ्रंट जैसी सरकार का प्रयोग होने की संभावना है। यह खेमा यह भी सोचता है कि कांग्रेस को तब भी सरकार में रहना चाहिए और पहले की तरह बाहर से समर्थन नहीं करना चाहिए।


राजनीतिक हालात विश्लेषण में दक्ष कांग्रेस सांसद मणिशंकर अय्यर सोचते हैं कि आगे कुछ साल में तमाम धर्मनिरपेक्ष ताकतें एकजुट होंगी और वामपंथी दल और जद-यू अंदर या बाहर से सरकार का समर्थन करेंगे। उनकी भी राय है कि गुजरात में मोदी के हैट्रिक से 2014 में यूपीए को फायदा होगा क्योंकि पीएम पद की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा और एनडीए में फूट गहरी होगी।  


यह विडंबना ही रही कि केंद्र की सत्ता पर कई घोटाले, भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर काबू न पाने के आरोप लगे मगर 2012 में भाजपा इसे अपने पक्ष में नहीं भुना पाई बल्कि आंतरिक लड़ाई में ही उलझी रही। पार्टी को अपने अध्यक्ष नितिन गडकरी पर महाराष्ट्र में मंत्री रहने के दौरान घपले करने आदि के कई आरोप लगने से भ्रष्टाचार मामले में कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन ठीक से नहीं चला सकी।


राम जेठमलानी, यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े नेता भी गडकरी के खिलाफ सामने आ गए। गडकरी को दूसरा कार्यकाल मिलने पर संदेह खड़ा हो गया था मगर अब पार्टी ने संकेत दिया है कि उन्हें ही दोबारा पार्टी की कमान मिलेगी। आडवानी जैसे नेताओं के अलावा आरएसएस भी उनके पीछे है। बहरहाल, गडकरी का मौजूदा कार्यकाल इसी महीने खत्म हो रहा है।

 
 
 

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