मौजूदा परिस्थिति में लिक्विडिटी की कमी है, यील्ड घट रहे हैं और मध्यावधि में बाजार परिस्थितियों के सुधरने की संभावना है, ऐसे में म्यूचुअल फंडों के फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) और शॉर्ट टर्म बांड फंड को निवेश के अच्छे अवसर के तौर पर देखा जाना चाहिए।
एफएमपी में ब्याज दरों का जोखिम कम हो जाता है क्योंकि एफएमपी जिन परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं उनकी मैच्योरिटी स्कीम के मैच्योरिटी से मेल खाती है। एफएमपी ऋण म्यूचुअल फंडों का ही एक प्रकार है। आम तौर पर यह 3 माह से 36 माह की अवधि के लिए क्लोज-एंडेड होता है।
अपने देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ब्याज दर और लिक्विडिटी के चक्र में भारी बदलाव देखा गया है। ब्याज दर कम होने से ग्रोथ को रफ्तार मिली और उसके बाद ब्याज दरें बढ़ती चली गईं। इसके अलावा अब अतिरिक्त लिक्विडिटी वाली परिस्थिति नहीं रह गई है और भारत की बैंकिंग प्रणाली नकारात्मक लिक्विडिटी परिस्थितियों से जूझ रही है जो लगभग 2,00,000 करोड़ रुपये का है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले 20 महीने के दौरान महंगाई को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दरों में कई बार बढ़ोतरी की है और इससे आर्थिक ग्रोथ भी प्रभावित हुआ है। इस प्रक्रिया में सिस्टम को सरप्लस लिक्विडिटी मोड में नहीं रखा जा सकता था इसलिए बेंचमार्क नीतिगत दरों में बढ़ोतरी के साथ-साथ कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में भी बढ़ोतरी की गई।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में लिक्विडिटी की कमी के कई कारक हैं। सबसे पहले तो वर्तमान वित्त वर्ष में सरकार द्वारा 53,000 करोड़ रुपये की उधारी से सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। इसके अलावा नकदी की सीजनल मांग के कारण भी सिस्टम से निकासी की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक का रुपये की मजबूती के लिए फॉरेक्स बाजार में संभावित हस्तक्षेप की वजह से भी सर्कुलेशन से मुद्रा कम हो सकती है।
यह कमी हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक के औसत स्तर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है और इससे बैंकिंग प्रणाली पर महत्वपूर्ण रूप से असर पड़ सकता है। इस परिस्थिति से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस के जरिये गिल्ट की पुनर्खरीद शुरू की है ताकि बाजार में लिक्विडिटी के हालात सुधर सकें और शायद बांड का यील्ड भी सुधर सके।
बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक यह प्रक्रिया जारी रखेगा और दिसंबर-जनवरी की अवधि के दौरान ओपन मार्केट ऑपरेशंस में पुनर्खरीद के जरिये बाजार में 40,000-50,000 करोड़ रुपये की नकदी प्रवाहित करेगा। इसके जरिये लिक्विडिटी की स्थिति सुधारने में लंबा वक्त लगेगा।
अभी एक अतिरिक्त घटनाक्रम देखने को मिल रहा है कि महंगाई दर में तेजी से गिरावट आ रही है वह भी प्राथमिक जरूरत की वस्तुओं की कीमतें घट रही हैं।
महंगाई के नवीनतम आंकड़े सालाना आधार पर (12 दिसंबर 2011 के अनुसार) 9.08 प्रतिशत रहे। इससे ठीक पिछले हफ्ते प्राथमिक जरूरत की श्रेणी वाली महंगाई सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत (17 दिसंबर 2011 के अनुसार) रही। ऐसा अनुमान है कि प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर में गिरावट जारी रह सकती है और भारतीय रिजर्व बैंक की महंगाई से जुड़ी चिंताएं कम हो सकती हैं।
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के सात प्रतिशत रहने के अनुमान और सरकार के कर राजस्व पर पडऩे वाले इसके प्रभाव से वित्त वर्ष 2012 के वित्तीय लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए, संभवत: जल्द ही मौद्रिक नीति में कुछ बदलाव देखने को मिले।
इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी संस्थागत निवेशकों के कॉरपोरेट बांड और गिल्ट सेगमेंट में निवेश की सीमा बढ़ाई है (निवेश की नई सीमाओं की घोषणा की गई है), निवेश प्रवाह के अनुमानों से मौजूदा यील्ड कर्व में नरमी आएगी और लिक्विडिटी की चिंता भी घटेगी।
मौजूदा परिस्थिति में जहां लिक्विडिटी की कमी है, यील्ड घट रहे हैं और मध्यावधि में बाजार परिस्थितियों में सुधार की संभावना है, हमारी सलाह है कि म्यूचुअल फंडों के फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) और शॉर्ट टर्म बांड फंड को निवेश के अच्छे अवसर के तौर पर देखा जाना चाहिए।
हमारा नजरिया है कि नीतिगत स्तर पर ब्याज दरें शीर्ष स्तर पर हैं और भारतीय रिजर्व बैंक नरमी लाने की प्रक्रिया से पहले मौन की अवस्था में है।
16 दिसंबर की मौद्रिक नीतियों की समीक्षा में इस बात के संकेत भी दिए गए थे। ऐसी परिस्थिति में यील्ड कर्व को देखते हुए एफएमपी में निवेश करना सार्थक नजर आता है। एफएमपी में ब्याज दरों का जोखिम कम हो जाता है क्योंकि एफएमपी जिन परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं उनकी मैच्योरिटी स्कीम के मैच्योरिटी से मेल खाती है। ऐसे हालात में निवेशकों को अपने फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो की अवधि बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।
क्या हैं एफएमपी?
एफएमपी ऋण म्यूचुअल फंडों का ही एक प्रकार है। आम तौर पर यह 3 माह से 36 माह की अवधि के लिए क्लोज-एंडेड होता है। निवेशक महज मैच्योरिटी पर ही इस योजना से पैसों की निकासी कर सकते हैं। लेकिन, निवेशक स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध एफएमपी को मैच्योरिटी से पहले भी बेच सकते हैं। इन्हें एफटीपी (फिक्स्ड टर्म फंड) और एफएचएफ (फिक्स्ड हॉरिजन फंड) के नाम से भी जाना जाता है। आम म्यूचुअल फंडों की भांति ही इनका भी नया फंड ऑफर आता है।
ब्याज दरें अभी अधिक हैं, खास तौर से सोवरेन सेगमेंट जी-सेक की आपूर्ति की अनिश्चितता को देखते हुए वर्तमान में एक दायरे में हैं। इसलिए हमें नहीं लगता कि 10 साल के जी-सेक में लगातार गिरावट आएगी। रुपये में कमजोरी के साथ कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी एक जोखिम रहेगा क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक दरों में कटौती करने में विलंब करना चाहता है।
सारांश यह है कि फिक्स्ड इनकम कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध कराता है जो ब्याज दर के विभिन्न चक्रों में उपलब्ध होते हैं। निवेशकों के लिए यह अच्छा रहेगा कि वह सही समय पर सही अवसर की पहचान करें और अपने लाभ के लिए इसका इस्तेमाल करें।
लक्ष्मी अय्यर- लेखिका कोटक म्यूचुअल फंड के फिक्स्ड इनकम एंड प्रोडक्ट की हेड हैं।