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फंड ऑफ फंड्स से करें निवेश की शुरुआत

 
Source: बिजनेस भास्कर मुंबई/दिल्ली   |   Last Updated 03:34(13/01/12)
 
 
 

फंड ऑफ फंड्स या एफओएफ ऐसे म्यूचुअल फंड हैं जो अन्य फंडों में निवेश करते हैं। इनका प्रदर्शन उन फंडों के रिटर्न का औसत होता है जिनमें यह निवेश करते हैं।

अन्य श्रेणी के फंडों के रिटर्न
फंड    रिटर्न (' में)
इक्विटी लार्ज कैप    -14.74
इक्विटी लार्ज एंड मिड कैप    -15.18
इक्विटी मिड एंड स्मॉल कैप    -16.27
बीएसई सेंसेक्स    -15.73

फंड ऑफ फंड्स के रिटर्न (एक साल में)
फंड     रिटर्न (' में)
आईएनजी ऑप्टिमिक्स एक्टिव डेट
मल्टी मैनेजर एफओएफ    8.53
आईएनजी ग्लोबल रियल एस्टेट फंड    7.66
आईडीएफसी ऑल सीजंस बांड फंड प्लान ए    7.57
डीएसपी ब्लैक रॉक वल्र्ड गोल्ड फंड    7.08
आईसीआईसीआई प्रू वेरी कॉसस प्लान    6.63
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल कॉसस प्लान    5.93
आईडीएफसी एसेट एलोकेशन एफओएफ
कंजरवेटिव    5.70
एआईजी वल्र्ड गोल्ड फंड    5.50
फिडेलिटी वेल्थ बिल्डर फंड प्लान ए    3.92

जब शेयर बाजार की दशा और दिशा साल 2011 जैसा ही रहे तो जिस निवेशक को सबसे कम नुकसान होता है उसे विजेता समझा जाएगा। म्यूचुअल फंडों में फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) कुछ इसी श्रेणी में आते हैं। दरअसल एफओएफ की जैसी डिजाइन है, उसमें यह ध्यान रखा गया है कि नुकसान कम से कम हो। इसके बावजूद अभी तक भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति (एयूएम) का मात्र एक फीसदी हिस्सा ही इस एफओएफ के तहत है।



क्या होते हैं फंड ऑफ फंड्स?
एकदम सरल भाषा में कहा जाए तो फंड ऑफ फंड्स ऐसे म्यूचुअल फंड हैं जो अन्य फंडों में निवेश करते हैं। अपनी परिकल्पना के अनुसार यह वही करता है जो कि आपको करना चाहिए यानी कि फंडों का यह एक पोर्टफोलियो तैयार करता है। फर्क सिर्फ यह है कि जब आप खुद कोई फंड या एक साथ कई कई फंड खरीदते हैं तो उसे आप निजी रूप में खरीदते हैं, उसे अपने पास रखते हैं तथा उन पर अलग-अलग नजर रखते हैं पर म्यूचुअल फंड में एफओएफ में निवेश करने का मतलब यह है कि आपके पास सिर्फ एक ही फंड रहता है पर उस एक ही फंड के अंदर कई फंड होते हैं।



रिटर्न के नजरिये से फंड ऑफ फंड्स
यहां पर यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि चूंकि एफओएफ में कई फंड शामिल होते हैं लिहाजा इसका निवेश जिन फंडों में है, उनमें सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड की तुलना में एफओएफ का प्रदर्शन अच्छा नहीं हो सकता है। एफओएफ का रिटर्न लगभग हमेशा उन फंडों के औसत रिटर्न के बराबर होता है जिनमें एफओएफ ने निवेश किया है। यानी कि फंडों के आपके अपने पोर्टफोलियो के समान ही एफओएफ का रिटर्न होता है। और इसी तर्क के अनुसार इसने जिन फंडों में निवेश किया है उनमें से सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले फंड की तुलना में यह नीचे भी नहीं जाएगा। और इसी वजह से एफओएफ अच्छा रिस्क एडजस्टेड (जोखिम समायोजित) रिटर्न देने वाले के रूप में जाने जाते हैं। 


दूसरी बात एफओएफ को कुछ ही समय पहले तक वितरकों में स्पर्धा के रूप में जाना जाता था। अगर एक सिंगल एफओएफ खुद ही खरीद, होल्ड, बिक्री, ओवर-वेट, अंडर-वेट कर सकता है तो एक वितरक कैसे निवेशकों में वैल्यू एड करेगा? पर अब यह गलतफहमी पिछले एक साल से म्यूचुअल फंड के निवेशकों के बीच से दूर हो रही है। पिछले 15 महीनों में अक्टूबर 2011 तक एफओएफ की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति दुगुनी हो कर 8,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का आंकड़ा पार कर चुकी है।



अपने ही फंडों में निवेश करने वाले एफओएफ की भरमार तीसरी बात यह कि वर्तमान में देश में एफओएफ का उपलब्ध बड़ा हिस्सा वास्तविक रूप से ऐसे फंडों का है जिन्होंने अपने निजी फंड हाउस में निवेश किया है। इससे उन निवेशकों का यह ध्येय पूरा नहीं होता जो कि उन्हें खुद विभिन्न फं ड हाउसों के अलग-अलग म्यूचुअल फंड खरीदने से मिलता है यानी कि निवेशकों को डाइवर्सिफिकेशन का लाभ नहीं मिल पाता है।


वैसे वैश्विक स्तर पर अधिकांश एफओएफ विभिन्न फंड हाउसों के अलग-अलग सर्वोत्तम फंड खरीद कर उन्हें एक में समाहित करते हैं। इन्हें मल्टी मैनेजर एफओएफ कहा जाता है। यह उसी प्रकार होता है जैसे कि दुनिया भर से सर्वोत्तम क्रिकेटरों को चुनकर एक वैश्विक टीम बनाई जाए।


क्या हैं फंड ऑफ फंड्स के फायदे?
एफओएफ के कई फायदे भी हैं। संक्षेप में म्यूचुअल फंड में पहली बार निवेश करना शुरू करने वाले निवेशकों के लिए यह खूब मुफीद होता है। उसे फंड चुनने, रखे रहने या बदलने की चिंता नहीं करनी पड़ती। अगर आप सिप निवेशक हैं तो सिर्फ 1,000 रुपये के सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (सिप) से आप चार या पांच अच्छे फंडों में नियमित निवेश करने लगते हैं। एफओएफ का यह फायदा सबसे बड़ा है। अन्यथा आपको प्रत्येक फंड के लिए अलग-अलग 1,000 रुपये का सिप करना पड़ता ताकि उसमें आप अपने स्तर पर नियमित निवेश कर सकें।


और म्युचुअल फंड के जो निवेशक एक साथ कई फंड रख कर उनके प्रबंधन में तकलीफों का सामना करते हैं वे भी इस तरह की तमाम चिंताओं से एफओएफ के सौजन्य से मुक्त हो जाते हैं। वे जब चाहें तक एक्जिट भी कर सकते हैं। एफओएफ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें आप शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स की बचत कर सकते हैं। पर कुछ हालातों में इसमें आपको टैक्स चुकाना भी रहता है। 


अब अगर आप इन सभी फायदों को जोड़ दें तो आपको यह पता चल जाएगा कि क्यों पिछले कुछ दिनों में भारत में एफओएफ में तेज बढ़ोतरी हुई है। अब तो एफओएफ सिंगल एसेट क्लास के साथ मल्टीपल एसेट क्लास में भी उपलब्ध हैं। वैश्विक स्तर पर एफओएफ को सुपर एचएनआई सिर्फ  दो वजहों से पसंद करते हैं-एक तो उनका सुपीरियर रिस्क एडजस्टेड रिटर्न और दूसरे उनकी सरलता।

 
 
 
 
 
 
 
 
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