छोटी गोल्ड लोन एनबीएफसी पर छाये संकट के बादल

समस्या
आरबीआई के नए दिशानिर्देशों के अनुपालन से बढ़ेंगी मुश्किलें
डिपॉजिट न लेने की बाध्यता के चलते कंपनियां पहले ही परेशान
बैंकों से कर्ज जुटाने में भी एनबीएफसी की दिक्कतें और बढ़ेंगी
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में जारी गोल्ड आधारित रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें अगर प्रभावी होती हैं तो छोटी सोने के बदले कर्ज देने वाली कंपनियों का भविष्य अधर में लटक सकता है। ऐसे में कंपनियों के पास कारोबार को सीमित करने या कारोबार समेटने का ही रास्ता बच जाएगा।
एसोसिएशन ऑफ गोल्ड लोन एनबीएफसी इंडिया के सह अध्यक्ष के. आर. बिजिमन ने बिजनेस भास्कर को बताया कि यदि कंपनियां आरबीआई के नियमों पर खरी नहीं उतरती हैं तो बिल्कुल उनके लिए कारोबार को आगे चलाना मुश्किल है। आज देश भर में सोने के बदले कर्ज देने का कारोबार कई कंपनियां कर रही हैं, जो अब भी आरबीआई के नियमों पर खरी नहीं उतर रही हैं।
छोटी कंपनियों के लिए फंड जुटाने के स्रोतों में कमी आ सकती है, क्योंकि कंपनियां धन डिपॉजिट नहीं कर सकती हैं। साथ ही, उन्हें बैंकों से फंड लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। बैंक भी क्रेडिट रेटिंग और कुल परिसंपत्ति के आधार पर ही फंड की मंजूरी दे रहे हैं। मण्णपुरम फाइनेंस के मुताबिक, शाखाओं विस्तार के लिए प्राथमिक मंजूरी लेने वाली सिफारिश गोल्ड लोन एनबीएफसी से पैठ को कम करना है। साथ ही, आरबीआई की सिफारिशें मजबूत हो रहे असंगठित क्षेत्र पर लगाम कसने के लिए हैं।
आरबीआई की रिपोर्ट में एनबीएफसी की ब्याज दरों को कम करने या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो जितनी ब्याज पर आने वाली सिफारिश पर बिजिमन ने कहा कि फिलहाल बाजार में 24 से 30 फीसदी तक की ब्याज दर वसूली जाती है। मुथूट फाइनेंस 24 फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज मुहैया करा रही है, जोकि ठीक है। हम इस विषय पर अन्य सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श करेंगे।
ब्याज दर में कमी होने से कंपनियों की परिचालन लागत एवं अन्य खर्चों में इजाफा होगा। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि शाखा विस्तार की सीमा तय करने वाले सुझाव पर भी चर्चा की जाएगी।







