क्या है मौजूदा व्यवस्था
जो ग्राहक 'अपने स्रोत' की बदौलत समय से पहले कर्ज चुका देते हैं, उनसे पेनाल्टी नहीं लेती हैं हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां
जो ग्राहक 'अन्य स्रोतों' की बदौलत समय से पहले होम लोन चुकाते हैं, उन्हें देनी होती है एक से चार फीसदी तक पेनाल्टी
विरोध भी है जारी
होम लोन के मामले में प्री-पेमेंट पेनाल्टी को पूरी तरह से हटाए जाने के खिलाफ हैं देश की प्रमुख हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां कंपनियों का मत, यदि कोई ग्राहक दूसरी कंपनी से कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुकाता है, तो यह पुरानी कंपनी के लिए कारोबारी लिहाज से बेहतर नहीं है
आने वाले दिनों में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां होम लोन पर प्री-पेमेंट पेनाल्टी देने में आपको ढेर सारी रियायतें दे सकती हैं। ऐसा नेशनल हाउसिंंग बैंक (एनएचबी) की उस तैयारी से हो सकता है, जिसमें वह होम लोन पर ली जाने वाली प्री-पेमेंट पेनाल्टी में ग्राहकों को मिलने वाली छूट का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
इसके तहत ग्राहकों को समय से पहले होम लोन चुकाने पर पूरी तरह से प्री-पेमेंट पेनाल्टी न देने की भी सुविधा मिल सकती है। एनएचबी के मौजूदा नियमों के तहत हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां ऐसे ग्राहकों से पेनाल्टी नहीं लेती हैं जो अपने स्रोत से समय से पहले कर्ज चुका देते हैं। वहीं, अगर कोई ग्राहक बाकी स्रोतों से समय से पहले होम लोन चुकाता है तो उसे एक से चार फीसदी तक पेनाल्टी देनी होती है।
नेशनल हाउसिंग बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'बिजनेस भास्कर' को बताया कि एनएचबी इस सिलसिले में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के साथ बैठक कर रहा है। हम यह चाहते हैं कि ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले। हालांकि इसमें कंपनियों के हितों को भी पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में हम यह देख रहे हैं कि प्री-पेमेंट पेनाल्टी के मौजूदा नियमों के अलावा ग्राहकों को किस तरह की सहूलियत दी जा सकती है। प्री-पेमेंट पेनाल्टी से पूरी तरह छूट आदि का भी एक विकल्प है। हालांकि, इसमें कंपनियों का भी रुख अहम रहेगा।
इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इस तरह के सुझाव दिए हैं कि बैंकों को फ्लोटिंग रेट पर लिए जाने वाले कर्ज पर ग्राहकों से किसी तरह का प्री-पेमेंट चार्ज नहीं लेना चाहिए। इसके बाद से ही नेशनल हाउसिंग बैंक भी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए ऐसे ही प्रावधान करने पर विचार कर रहा है।
हालांकि, देश की प्रमुख हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां प्री-पेमेंट पेनाल्टी को पूरी तरह से हटाए जाने के खिलाफ हैं। कंपनियों के अनुसार यदि कोई ग्राहक दूसरी कंपनी से कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुकाता है, तो यह पुरानी कंपनी के लिए कारोबारी लिहाज से बेहतर नहीं है।