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पहचानें प्रॉपर्टी की बिक्री से मुनाफा लेने का सही वक्त

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Dec 19, 2012, 00:38AM IST
पहचानें प्रॉपर्टी की बिक्री से मुनाफा लेने का सही वक्त

अगर आप रियल एस्टेट में निवेश करना चाहते हैं तो आपको रियल एस्टेट बाजार के हर पहलू से पूरी तरह परिचित होना होगा साथ ही यह भी जानना होगा कि फायदे का सबसे उपयुक्त समय कब आता है, ताकि आप प्रॉपर्टी बेच कर अधिकतम मुनाफा अर्जित कर सकें। प्रॉपर्टी की बिक्री से पहले किसी भी निवेशक को निम्नलिखित बातों पर गौर जरूर करना चाहिए-


* रियल एस्टेट में निवेश करने वाले निवेशकों को इंवेस्टमेंट होराइजन-यानी कि खरीदारी और दोबारा बेचने के बीच की अवधि का अवश्य फैसला करना चाहिए।
* दोबारा बिक्री के समय टैक्स का क्या प्रभाव पड़ेगा, इस बारे में भी विस्तृत विश्लेषण करना जरूरी है।
* कानूनी फीस व दलाली जैसे खर्चे का भी पहले ही आकलन कर लेना चाहिए।
* समय से पहले लोन चुकाने पर प्री-पेमेंट पेनाल्टी और स्टांप ड्यूटी का खरीदार पर क्या असर पड़ेगा, इसका पता कर लेना चाहिए।
* निवेशक को यह भी आकलन करना चाहिए कि संपत्ति की दोबारा बिक्री करने से पहले इसकी साज-सज्जा या विस्तार कराना फायदेमंद होगा, कि उसे जैसा है वैसी ही स्थिति में बेच देना ठीक रहेगा।
* निवेश की अनुमानित अवधि तक संभावित रेंटल इनकम और प्रॉपर्टी की बिक्री से प्राप्त होने वाली रकम की गणना भी की जाए।
* टाइमिंग चाहे जो भी हो, प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले निवेशक को सर्वोच्च गुणवत्ता वाले संपत्ति आधार पर हमेशा फोकस करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि बिल्डिंग की खासियत व गुणवत्ता, उसकी लोकेशन व इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान दें।


बाजार के चुनौतीपूर्ण हालातों में हड़बड़ा कर, जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी संपति को बेचना एक गलत निवेश रणनीति है। दरअसल यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि वर्तमान रियल एस्टेट के चक्र में बाजार आखिर स्थिर कब होगा। जब आप इसका आकलन करने में सक्षम हो जाएंगे तो आप रियल एस्टेट निवेश से कामयाब व फायदेमंद एक्जिट कर सकते हैं।


यह ध्यान रहे कि सभी उद्योगों का एक चक्र होता है, कारोबार हो या डेमोग्राफिक चक्र यह दोनों पर लागू होता है। ठीक इसी तरह से रियल एस्टेट का भी एक चक्र होता है। इस दुनिया में सबसे ज्यादा लाभ तब कमाया जा सकता है जब खरीदारी ऐसे समय में और सस्ती दरों पर की जाए, जब कोई इसे खरीदना नहीं चाहता हो और इसे ऊंची कीमत पर तब बेचें जब मांग में मजबूती दिखाई दे रही हो।


ध्यान रहे कि रियल एस्टेट के चक्र में ऐसे वक्त भी लगातार आते रहते हैं जब कि ग्रोथ ही ग्रोथ दिखे। ऐसे समय में भी प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले को खास सावधानियां बरतनी हैं। यह भी एक प्रकार का कारोबार है लिहाजा आपको जोखिम पर भी ध्यान रखना होगा। खास तौर से तब तो और ज्यादा जब रियल एस्टेट चक्र में मंदी का माहौल चल रहा हो।


इसके अलावा निवेशकों को यह भी ध्यान देना है कि वे संभावित मांग को बढ़ा-चढ़ाकर न आकलित करें। या फिर वे मौजूदा रुझानों को भविष्य की अनिश्चितता का जामा भी न पहनाएं। वे बाजार में बढ़ोतरी को सावधानी से देखें और गिरावट को एक अवसर के रूप में समझें।


अगर आप मैक्रो व माइक्रो मार्केट चक्र तथा मार्केट की टाइमिंग को भली-भांति समझ जाएं तो लंबे समय में बाजार के अमूमन रिटर्न से ज्यादा रकम हासिल कर सकते हैं, यही कामयाब निवेशक की रणनीति होती है।


इसमें निजी अनुभव, सुपरिचित ज्ञान व सही फैसले का भी काफी बड़ा हाथ होता है। इसे अमली जामा पहनाने का एकमात्र तरीका शोध है, गहन शोध। हालांकि भारत में यह बहुत ज्यादा संभव नहीं हैं फिर भी आप रियल एस्टेट बाजार की हर प्रकार की चीजों व रुझानों की गहराई से जानकारी प्राप्त करें।

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