जल्द बढ़ सकती है आयकर की छूट सीमा, रंगराजन भी पक्ष में

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन का कहना है कि राजस्व जुटाने के लिए सरकार एक सीमा से ज्यादा आमदनी अर्जित करने वालों (सुपर रिच) पर और सरचार्ज लगा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि निम्न-मध्यम वर्ग को दो लाख रुपये की मौजूदा आयकर छूट सीमा में थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।
उनका यह भी कहना है कि चार साल में हमें राजकोषीय घाटे को कम करके जीडीपी के 3 फीसदी तक लाना है, इसलिए आमदनी बढ़ाने के लिए नए कदम उठाने होंगे। इसके अलावा खर्चों को नियंत्रण में रखने के विशेष उपाय भी करने होंगे। वर्ष 2012-13 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के आउटलुक के बारे में उनका कहना है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 5.5 से 6 फीसदी के बीच रहेगी, जबकि अगले वित्त वर्ष में यह बढ़कर यह 7 फीसदी के आसपास पहुंच जाएगी। अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न मसलों पर 'बिजनेस भास्कर'केशिशिर चौरसिया ने सी.रंगराजन से संक्षिप्त बातचीत की।
पेश है इस बातचीत के संपादित अंश।
प्रश्न- चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य था, लेकिन ऐसा संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे में सरकार को क्या करना चाहिए?
उत्तर- राजकोषीय घाटे को काबू में रखना हमारे लिए जरूरी है क्योंकि ऐसा न होने की स्थिति में अर्थव्यवस्था पर इसके ढेरों दुष्परिणाम दिखेंगे। वर्ष 2012-13 में इसके बढ़कर 5.3 फीसदी तक पहुंच जाने की बात कही जा रही है। इस पर नियंत्रण के लिए कुछ कड़े कदम उठाने होंगे। इसके तहत न सिर्फ खर्चों को काबू में रखना है, बल्कि राजस्व को भी बढ़ाने पर जोर देना होगा। साथ ही राजस्व की स्थिति बेहतर करने के लिए अनावश्यक सब्सिडी को खत्म करना हेागा। मेरा मानना है कि वर्तमान टैक्स स्ट्रक्चर में किसी तरह की छेड़छाड़ किए बगैर अत्यधिक आमदनी वालों (सुपर रिच) पर और अधिभार (सरचार्ज) लगाया जा सकता है। जो ज्यादा कमा रहे हैं, उन्हें ज्यादा टैक्स तो देना ही चाहिए।
प्रश्न- इस समय व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा दो लाख रुपये है। महंगाई जिस तरह से बढ़ती जा रही है, उसे देखते हुए निम्न-मध्यम आय वर्ग के लिए यह छूट काफी कम पड़ रही है। डायरेक्ट टैक्स कोड में भी इस सीमा को बढ़़ाने की सिफारिश है। आपका इस बारे में क्या ख्याल है?
उत्तर- मैं इससे सहमत हूं कि यदि इसमें बढ़ोतरी होती है तो व्यक्तिगत करदाताओं को राहत मिलेगी।
प्रश्न- आप राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की बात करते हैं। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 16 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, लेकिन घरेलू बाजार में पेट्रो उत्पादों की कीमत में कोई इजाफा नहीं हो रहा है। इस दिशा में क्या होना चाहिए?
उत्तर- मेरे विचार से डीजल, एलपीजी सिलेंडर आदि के मूल्यों में बढ़ोतरी होनी चाहिए। जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है, घरेलू बाजार में उसी हिसाब से पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो सरकार को सब्सिडी के मद में ज्यादा राशि आवंटित करनी होगी जो अंतत: घाटे को बढ़ाएगी। इस दिशा में जल्द कदम उठाना होगा क्योंकि इसमें जितनी देरी होगी, अर्थव्यवस्था पर उसके दुष्परिणाम उतने ही दिखेंगे।
सरकार ने गत 1 जनवरी से डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना शुरू कर दी है, इस योजना में आप क्या-क्या फायदे देखते हैं?
डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर एक बेहतरीन योजना है। इससे फाइनेंशियल इन्क्लूजन में मदद मिलेगी। योजना यह है कि केंद्र सरकार जितनी भी सब्सिडी देती है, उसे इससे लिंक किया जाएगा। इसका फायदा लेने के लिए लाभार्थियों को बैंक में खाता खुलवाना होगा और धीरे-धीरे देश फाइनेंशियल इन्क्लूजन की राह पर आगे बढ़ेगा। इससे सरकार की ओर से सहायता देने का बुनियादी उद्येश्य भी सधेगा क्योंकि डीबीटी से पूरी की पूरी सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचेगी। बीच में कहीं कोई बिचौलिया नहीं होगा, इसलिए लीकेज की संभावना है ही नहीं। कुछ जिलों में यह योजना 1 जनवरी 2013 से शुरू की गई है। इसमें दिनों-दिन और जिले जुड़ते जाएंगे। इसके लिए सिस्टम को दुरुस्त किया जा रहा है।
इस वर्ष अर्थव्यवस्था में क्या विकास दर देख रहे हैं?
चालू वित्त वर्ष में तो भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 5.5 से 6.0 फीसदी रहेगी, हो सकता है कि यह 6 फीसदी के ज्यादा करीब हो। लेकिन अगले साल इसमें निश्चित रूप से सुधार होगा और विकास दर 7 फीसदी तक पहुंच जाएगी। मेरे ख्याल से मानसून भी ठीक ही रहेगा। अगर देखें तो अगले साल निवेशकों की धारणा में परिवर्तन होगा।
पिछले महीने बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक पारित हो गया है और आरबीआई नए बैंक लाइसेंसों के बारे में दिशा-निर्देश बनाने में व्यस्त है। इसके लिए क्या होनी चाहिए प्राथमिकता?
आरबीआई को बैंक लाइसेंस देने में नॉन-कॉरपोरेट सेक्टर (एनबीएफसी या फाइनेंशियल कंपनी) को प्राथमिकता देनी चाहिए। उसके बाद ही कॉरपोरेट सेक्टर की तरफ देखें।
मौजूदा समय में व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा है दो लाख रुपयेरंगराजन का मत
राजस्व जुटाने के लिए सरकार सुपर रिच पर लगा सकती है और सरचार्ज
चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर रहेगी 5.5 से 6% के बीच
बैंक लाइसेंस देते वक्त नॉन-कॉरपोरेट सेक्टर को देनी चाहिए प्राथमिकता मौजूदा आयकर स्लैब
2 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं
2 लाख से 5 लाख रुपये तक 10%
5 लाख से दस लाख रुपये तक 20%
10 लाख रुपये से ऊपर 30%
वरिष्ठ नागरिकों के लिए 2.5 लाख और 80 साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए ५ लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं









