सोने पर आयात शुल्क बढ़ा तो घट सकती है मांग

चिंता
सोने के कारण आयात बिल पर बोझ, सरकार शुल्क बढ़ाने की तैयारी में
बढ़ सकती हैं सोने की कीमतें, मांग घटने से कारोबार हो सकता है प्रभावित
ज्वैलरी उद्योग को डर है कि इससे देश में सोने की तस्करी भी बढ़ सकती है
घरेलू बाजार में सोने की मांग और उसके आयात में कमी लाने के लिए सरकार सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके बाद ज्वैलर्स और ज्वैलरी उद्योग का कहना है कि सोने पर आयात शुल्क बढऩे से जहां एक ओर सोने की कीमतें बढ़ेंगी वहीं, इसकी मांग कम होने के चलते कारोबार प्रभावित हो सकता है। साथ ही तस्करी के जरिए सोने की देश में आवक रफ्तार तेज हो जाएगी।
अस्मी, नक्षत्र और अग्नि जैसे ब्रांड बनाने वाली गीतांजलि के सीईओ संजीव अग्रवाल ने बिजनेस भास्कर को बताया कि सोने पर यदि सरकार आयात शुल्क बढ़ाती है तो इससे सोना महंगा तो होगा ही दूसरी ओर इसकी तस्करी भी बढ़ सकती है। सोना महंगा होने से खरीदारी में कमी अवश्य दिखाई देगी। जिसका प्रभाव कारोबार पर भी पड़ेगा।
ज्वैलरी कंपनियां अब हल्के वजन के गहनों की ओर फोकस कर रही हैं। साथ ही कस्टमाइज गहनों की मांग भी ऐसे में बढ़ सकती है। हमारे विचार से सरकार को गोल्ड सेविंग स्कीम को और आसान और सुविधाजनक बनाने की आवश्यकता है। इससे इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
जैम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व चेयरमैन राजीव जैन कहते हैं कि सोने के आयात का बजट अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में इस पर आयात शुल्क बढ़ाना आवश्यक है, लेकिन इससे सोने की तस्करी को भी बढ़ावा मिलेगा। ज्वैलर्स का कारोबार प्रभावित हो सकता है। तस्कर गलत तरीके से सोने की बिक्री करेंगे जो बाजार मे कारोबार को प्रभावित करेगी, जबकि अतंरराष्ट्रीय स्तर पर इसका कोई खासा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका अधिक असर घरेलू बाजार पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सोने के सिक्के, बिस्कुट और छड़ आदि की खरीद पर रोक लगानी चाहिए। गहनों की खरीदारी रोजगार को बढ़ावा देगी और सरकार को टैक्स भी। मेरे विचार से गोल्ड सेविंग स्कीम को आकर्षक बनाने की आवश्यकता है। रिद्धि-सिद्धि बुलियन के अनुसार आयात पर शुल्क यदि 4 फीसदी तक बढ़ता है तो घरेलू कारोबार पर असर पड़ेगा। वहीं, गलत तरीके से गोल्ड बाजार में आने लगेगा।
जैम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष संजय कोठारी के अनुसार आयात शुल्क बढ़ाने से सोने के कीमतें बढ़ सकती हैं। जिसके बाद खरीदारी कम होगी और इसका प्रभाव कारोबार पर देखने को मिलेगा। इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए काफी परेशानी हो सकती हैं। पहले की तरह मांग कम होने से उनके रोजगार कम हो सकते हैं।
कोटक महिंद्रा ने एक अनुसंधान रिपोर्ट जारी कर कहा है कि चालू वित्त वर्ष में सोने का आयात अक्टूबर-दिसम्बर तिमाही में बढ़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष की तिमाही में अक्टूबर-दिसम्बर में सोने का आयात अधिक रहने की संभावना है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में नरमी बनी हुई है। देश में शादी-ब्याह और त्यौहारों के चलते मांग बढ़ेगी।
जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें कम और रुपये की स्थिरता के चलते बाजार में सोना 31,000 रुपये प्रति दस ग्राम के नीचे बना हुआ है।
गौरतलब है कि देश में लगातार सोने की बढ़ती मांग के कारण आयात बिल बढ़ रहा है, इसलिए सरकार सोने की मांग को कम करने के लिए सोने के आयात पर शुल्क बढ़ाने पर विचार कर रही है।









