Home » Personal Finances » Loan » It Is Possible To Get Cheap Car Loan

संभव है सस्ता कार लोन पाना

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Feb 01, 2013, 15:33PM IST
संभव है सस्ता कार लोन पाना

कार खरीदारी में नकद डिस्काउंट को सबसे ज्यादा
तवज्जो दी जानी चाहिए। यह देखना चाहिए कि डीलर गाड़ी की कीमतों में कितनी कमी कर सकता है। इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि कहीं नकद में मिला डिस्काउंट किसी और तरीके से उनके हाथों से निकल तो नहीं रहा

जब आप कार लोन के लिए बैंक या फाइनेंस कंपनियों से बातचीत कर रहे होते हैं, उस समय आपकी कोशिश यही रहती है कि आपको सबसे सस्ता कार लोन मिले। सस्ता कार लोन पाने के कई तरीके हैं। हो सकता है कि इसमें आपका कुछ वक्त लगे लेकिन आपको अच्छे सौदे के लिए थोड़ा धैर्य रखना ही चाहिए। हालांकि, लोन लेने की प्रक्रिया उतनी जटिल भी नहीं होती है, खास तौर से तब जब आपके पिछले पुनर्भुगतान का रिकॉर्ड बढिय़ा हो और आपकी वित्तीय स्थिति आपके ऋण की पात्रता साबित करता हो। बेदाग क्रेडिट रिकॉर्ड का लाभ
बैंक अपने विभिन्न तरह के ग्राहकों को कार लोन पर कई अतिरिक्त सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं अगर  वह कुछ खास शर्तों को पूरी करता है। जैसे अगर किसी ग्राहक के पास किसी खास बैंक का क्रेडिट कार्ड है तो उसे कुछ लाभ मिलता है। एक न्यूनतम निर्धारित अवधि तक के क्रेडिट कार्डधारक, जो लगातार अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें लोन की प्रोसेसिंग में दिक्कतें नहीं आती हैं। इस प्रक्रिया में आम ग्राहकों की तुलना में क्रेडिट कार्डधारकों को कम वक्त लगता है। दूसरा लाभ, यह है कि बैंक कार के मूल्य के एक खास प्रतिशत का ऋण देने के लिए तत्पर भी रहते हैं। आपके पास जिस बैंक का क्रेडिट कार्ड है, हो सकता है वह बैंक आपको अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराए। हालांकि, कार लोन को अंतिम रूप देने से पहले अन्य बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के ब्याज दरों की तुलना कर लेनी चाहिए। क्रेडिट स्कोर
कोई भी बैंक या फाइनेंस कंपनी ऋण देने से पहले आपकी पात्रता को परखती है। क्रेडिट स्कोर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर आपने पिछले किसी लोन या क्रेडिट कार्ड के बिल के पुनर्भुगतान में कोताही बरती है तो पहले अपनी क्रेडिट रेटिंग को दुरूस्त करने के उपाय करें। अन्यथा, बैंक या फाइनेंस कंपनी आपको ज्यादा जोखिम वाले ग्राहक की श्रेणी में रखते हुए आपको अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरों पर ऋण की पेशकश करेंगे। कार फाइनेंस कंपनियों के सस्ते लोन
टाटा, फॉक्सवैगन, महिंद्रा, टोयोटा, ऑडी आदि जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों की अपनी एक फाइनेंस इकाई भी है। ऑटोमोबाइल कंपनियों की फाइनेंस इकाई द्वारा पेश की जाने वाली ब्याज दरें अपेक्षाकृत कम होती हैं और उसी कंपनी की कुछ खास मॉडल वाली कारों के लिए ज्यादा सस्ती होती है जिसकी इन्वेंट्री अधिक होती है। अगर बैंकों के ऑटो लोन से इसकी तुलना की जाए तो ब्याज दरें भी इनकी अपेक्षाकृत कम होती है, डॉक्यूमेंटेशन की प्रकिया भी सरल होती है और ग्राहकों को लोन भी कम समय में मिल जाता है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि ऑटोमोबाइल कंपनियों की फाइनेंस इकाई अपनी ही कंपनी के कुछ खास मॉडल के लिए रियायती ब्याज दरों पर लोन उपलब्ध कराते हैं। अगर आपको ऐसी किसी कंपनी की कार लेनी है जिसकी अपनी फाइनेंस इकाई भी है तब तो ठीक है अन्यथा केवल सस्ती ब्याज दरों के चक्कर में कर्ज का बोझ लेना सही निर्णय नहीं होगा। सस्ते कर्ज के अलावा क्या देखें
कार खरीदारी में सबसे ज्यादा तरजीह नकद डिस्काउंट को दी जानी चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि डीलर गाड़ी की कीमतों में कितनी कमी कर सकता है। फिर, लोन की बात करनी चाहिए। ग्राहकों को इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि कहीं नकद में मिला डिस्काउंट किसी और तरीके से उनके हाथों से निकल तो नहीं रहा? आम तौर पर ऐसे में प्रोसेसिंग शुल्क आदि पर गौर करना चाहिए। ऑटोमोबाइल कंपनियों के सस्ते लोन के कुल लागत यानी की लोन की अवधि के दौरान देय कुल राशि की गणना करने के बाद उसकी तुलना बैंकों के ऑटो लोन की लागत से जरूर कर लेनी चाहिए ताकि आप एक सोचा-समझा निर्णय ले सकें। किन बातों पर करें गौर
कार लोन के मामले में, खास तौर से जब यह ऑटोमोबाइल कंपनियों की फाइनेंसिंग इकाई से लिया जा रहा हो तो, नियम एवं शर्तों पर गौर करना जरूरी होता है। ग्राहक को यह देखना चाहिए कि प्री-पेमेंट शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क आदि क्या हैं। कहीं कोई छुपा हुआ शुल्क तो नहीं है। ग्राहकों को एक बार बैंकों के कार लोन से इसकी तुलना जरूर कर लेनी चाहिए। डिफॉल्ट से बचें
परेशानी तब शुरू होती है जब आपको लगता है कि किन्हीं कारणों से आप कार लोन की मासिक किस्त समय पर नहीं दे पाएंगे। इसके चलते आप कर्जदाता को नजरअंदाज करना शुरू कर देते हैं। ज्यादातर बैंक और कर्जदाता पेमेंट संबंधी समस्याओं का समाधान परिस्थितियों के हिसाब से निकालते हैं। ऐसे में जब आपको यह महसूस होने लगे कि पेमेंट करने में आपको दिक्कत आ सकती है तो आप ईमानदारी से अपने कर्जदाता या फिर बैंक से संपर्क कर उसे पेमेंट में देरी की वजह साफ-साफ बता दें। वैसे उन्होंने पेमेंट में देरी की वजह तो हजारों बार सुनी होंगी लेकिन आपको ईमानदार रहने का फायदा मिल सकता है। ऐसे में आप उनके साथ मिलकर सहमति से  कोई और रास्ता खोज निकालेंगे। इन सबके अलावा भी आपके पास कई विकल्प मौजूद हैं। कार हाथ से तब तक मत जाने दीजिए जब तक कि आप इन विकल्पों को आजमा न लें। * अपने कर्जदाता या बैंक से अपने लोन की अवधि बढ़ाने को कहें। उदाहरण के तौर पर अगर आपके लोन की अवधि 36 माह की है तो इसे 48 माह करने का अनुरोध करें। इससे हर महीने आपको कम ईएमआई देनी पड़ेगी।
* अपनेकर्जदाता/बैंक से डेफर्ड पेमेंट करने को कहें। इससे आपको मौजूदा माह की ईएमआई बाद में देने की अनुमति मिल सकती है। आप उन्हें समझाएं कि मौजूदा माह की ईएमआई का भुगतान बाद में करने से आपको बाकी का भुगतान करने में काफी सुविधा होगी।
*  कोशिशकरें कि आपका कर्जदाता/बैंक ईएमआई के भुगतान की तिथि को हमेशा के लिए बदल दे।
* पेमेंट का भुगतान देरी से करने पर लेट चार्ज देना पड़ता है। अगर आपको लगता है कि पेमेंट में देरी की वजह से आपका लेट चार्ज इकट्ठा हो गया है तो आप अपने कर्जदाता को इसे माफ करने को कहें। इससे आपको समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी और बैंक ऐसा करने के लिए तैयार हो सकता है।



आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
4 + 6

 
विज्ञापन
 

मार्केट

Ethical voting

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

स्पोर्ट्स

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment