कमजोर आउटलुक से कड़के हुए बाजार

बैंकिंग में कंसोलिडेशन - आरबीआई की पॉलिसी बैठक से पहले बाजारों में थोड़ी घबराहट थी। बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी कंसोलिडेशन हो रहा था। - किशोर ओस्तवाल, सीएमडी, सीएनआई रिसर्च
सतर्कता भरा मूड - आरबीआई द्वारा कल उठाए जाने वाले कदमों के इंतजार में बाजारों का मूड सतर्कता भरा रहा। ज्यादा संभावना इसी बात की है कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, कुछ लोग आरबीआई द्वारा आश्चर्यचकित करने वाली घोषणा की उम्मीद कर रहे हैं। - अमर अंबानी,
रिसर्च प्रमुख, आईआईएफएल
सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास दर का आउटलुक घटाए जाने से दिग्गज शेयरों में बढ़ी बिकवाली के चलते घरेलू बाजार दबाव में रहे। साथ ही, अमेरिका में राजकोषीय स्थिति को सुधारने के मुद्दे पर अभी तक कोई सहमति न बन पाने के चलते आईटी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनियों के शेयरों में बिकवाली बढ़ गई। इसके चलते, बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक 72.83 अंक की गिरावट के साथ 19,244.42 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी में भी 21.70 अंक की कमजोरी रही और यह 5,857.90 अंक पर रहा।
ब्रोकरों के मुताबिक, सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़ोतरी का अनुमान पूर्व के 7.6 फीसदी से घटाकर 5.7-5.9 फीसदी कर दिए जाने से बाजारों पर दबाव बन गया। संसद में पेश मध्यावधि आर्थिक समीक्षा में सरकार ने कहा है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जीडीपी ग्रोथ छह फीसदी पर रहेगी।
पहली छमाही में यह आंकड़ा 5.4 फीसदी पर रहा था। समूचे साल की ग्रोथ बीते वित्त वर्ष की 6.5 फीसदी से भी कम रहने की आशंका में निवेशकों की धारणा पर भारी विपरीत प्रभाव पड़ा। इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज व आईटीसी जैसे दिग्गज शेयरों में 0.6-0.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
उधर, अमेरिका में तथाकथित 600 अरब डॉलर के फिस्कल क्लिफ पर डेमोक्रेट व रिपब्लिकन पार्टी के बीच अभी तक किसी तरह की सहमति न बन पाने के चलते आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली रही। घरेलू आईटी कंपनियों की अधिकांश आय यूरोप व अमेरिका से ही आती है। टीसीएस व विप्रो में 1.4-2.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। साथ ही, इंफोसिस का शेयर भी 0.56 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ।इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मंगलवार को होने वाली चालू तिमाही की मध्यावधि समीक्षा बैठक को लेकर भी बाजार पशोपेश में थे।
हालांकि, अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक में मुख्य पॉलिसी दरों में कटौती नहीं होने जा रही है। लेकिन, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में चौथाई फीसदी तक की कटौती की संभावना जताई जा रही थी। सीएनआई रिसर्च के सीएमडी किशोर ओस्तवाल ने कहा कि आरबीआई की पॉलिसी बैठक से पहले बाजारों में थोड़ी घबराहट थी।
बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी कंसोलिडेशन हो रहा था। आईआईएफएल के रिसर्च प्रमुख अमर अंबानी ने कहा कि आरबीआई द्वारा कल उठाए जाने वाले कदमों के इंतजार में बाजारों का मूड सतर्कता भरा रहा। ज्यादा संभावना इसी बात की है कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, कुछ लोग आरबीआई द्वारा आश्चर्यचकित करने वाली घोषणा की उम्मीद कर रहे हैं।
ग्लोबल स्तर पर देखें तो एशिया में हांगकांग, इंडोनेशिया, ताइवान व सिंगापुर के मुख्य इंडेक्स 0.31-0.88 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.45 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। उधर, जापान में स्टिमुलस की पक्षधर पार्टी के सत्ता में वापस लौटने से निक्केई 0.94 फीसदी उछल गया। लेकिन, यूरोपीय बाजारों में दोपहर बाद कमजोरी देखी जा रही थी। खबर लिखे जाते समय ब्रिटेन के एफटीएसई में 0.54 फीसदी, जर्मनी के डेक्स में 0.06 फीसदी और फ्रांस के सीएसी में 0.44 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा था।
घरेलू स्तर पर, बीएसई सेंसेक्स में शामिल 30 में से 14 कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही। भारती एयरटेल का शेयर 3.69 फीसदी, एचडीएफसी का 1.85 फीसदी, भेल का 1.76 फीसदी व एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.60 फीसदी टूट गया। स्टरलाइट में 4.06 फीसदी, हिंडाल्को में 3.46 फीसदी और एसबीआई में 1.01 फीसदी की बढ़त रही।
ग्लोबल हालात - ग्लोबल स्तर पर देखें तो एशिया में हांगकांग, इंडोनेशिया, ताइवान व सिंगापुर के मुख्य इंडेक्स 0.31-0.88 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.45 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। उधर, जापान में स्टिमुलस की पक्षधर पार्टी के सत्ता में वापस लौटने से निक्केई 0.94 फीसदी उछल गया। लेकिन, यूरोपीय बाजारों में दोपहर बाद कमजोरी देखी जा रही थी। खबर लिखे जाते समय ब्रिटेन के एफटीएसई में 0.54 फीसदी, जर्मनी के डेक्स में 0.06 फीसदी और फ्रांस के सीएसी में 0.44 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा था।







