मिस्टर चीकू अपने बर्थडे की पार्टी करने अपने दोस्तों के साथ एक रेस्टोरेंट में गए। वहां, मीनू में लिखे रेट को देखते हुए मीडियम रेंज का डिनर ऑर्डर किया, जो कि मीनू रेट के मुताबिक करीब 1000 रुपये का था। लेकिन जब चीकू के पास बिल आया तो उसमें 1480 रुपये पेड करने को लिखा था। चीकू ने एक्स्ट्रा 480 रुपये के बारे में पूछा तो मैनेजर ने सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज बताकर उसे टाल दिया। जैसे-तैसे चीकू को बिल चुकाना पड़ा। लेकिन सच यह है कि रेस्टोरेंट मालिक ने सर्विस टैक्स के नाम पर चीकू से अतिरिक्त पैसे ले लिए।
चीकू की तरह ही हर दिन हमारे देश में लाखों लोग सर्विस टैक्स के नाम पर ज्यादा पैसा चुका कर घर वापस आ जाते हैं। और उनको पता भी नहीं होता है कि ज्यादा पैसे के नाम पर चूना लगा दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ये ज्यादा पैसे और चूने का माजरा क्या है? तो जनाब इसका जवाब है सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज की थ्योरी में। अब आप सोच रहे होंगे कि अब ये सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज क्या है? इनमें क्या अंतर है और इन दोनों के संबंध में आपके क्या अधिकार हैं? आप के इन सारे सवालों का जवाब देते हुए दैनिकभास्कर डॉट कॉम आपको सतर्क करना चाहता है कि सर्विस चार्ज, सर्विस टैक्स नहीं है।
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