निवेश के लिए एलआईसी बनाएगी आंतरिक नियम

तैयारी
इरडा द्वारा आलोचना किए जाने के मद्देनजर हो रही है तैयारी
एलआईसी की निवेश कमेटी बना रही है इस बारे में अपनी योजना
एलआईसी एक्ट, 1956 के हिसाब से होता है इसका परिचालन
देश की सबसे बड़ी वित्तीय संस्था और निवेशक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बाजार में अपने निवेश को लेकर आंतरिक नियमों की स्थापना करने की योजना बना रही है। निगम की निवेश कमेटी इस बारे में योजना तैयार कर रही है। वैसे भी, एलआईसी की निवेश कमेटी के जरिए और उसके 150 मजबूत विश्लेषकों के आधार पर ही इक्विटी बाजार या कहीं भी निवेश किया जाता है।
निगम के सूत्रों के मुताबिक, जिस तरह से हाल में बीमा नियामक इरडा ने एलआईसी के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की हैं, उसे देखते हुए एलआईसी अब अपने आंतरिक नियमों के तहत निवेश करेगी। इसके लिए, इसकी निवेश कमेटी एक आंतरिक नियम की स्थापना करेगी।
इस नियम में निवेश कमेटी के ही अधिकारी होंगे। एलआईसी केंद्र और राज्य सरकारों की प्रतिभूतियों में 50 फीसदी, इंफ्रा सेक्टर में 15 फीसदी तथा बाकी की राशि इक्विटी बाजार और अन्य माध्यमों में निवेश करती है। सालाना एलआईसी 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निवेश करती है, जिसमें से 40 हजार करोड़ रुपये के करीब इक्विटी बाजार में निवेश होता है।
वैसे, एलआईसी इरडा के नियमों के तहत नहीं परिचालित होती है और इसका परिचालन एलआईसी एक्ट, 1956 के तहत किया जाता है। इस कारण इरडा की जो इक्विटी बाजार में बीमा कंपनियों की 10 फीसदी की निवेश सीमा है, वह इस पर लागू नहीं होती है।
दरअसल, इस समय भले ही यह कहा जा रहा है कि वित्त मंत्रालय ने एलआईसी को इक्विटी बाजार में किसी कंपनी में 30 फीसदी निवेश की मंजूरी दी है, पर एलआईसी एक्ट बताता है कि यह अनुमति शुरू से ही है। क्योंकि इरडा का गठन ही साल 2000 में किया गया था और इस कारण जो पुराना नोटिफिकेशन है, वही अब भी लागू है।
एलआईसी एक्ट के नोटिफिकेशन में सीधे-सीधे 30 फीसदी का जिक्र किया गया है और उसी नोटिफिकेशन को इस बार वित्त मंत्रालय ने पिछले दिनों स्पष्ट कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि वित्त मंत्रालय ने कोई अनुमति नहीं दी है, पर उसने पुराने नोटिफिकेशन को स्पष्ट करके इस पूरे मामले को बंद कर दिया है।







