अभी किसे फायदा
'मनरेगा' स्कीम से लाभान्वित होने वाले लोग, रेहड़ी वाले, घरेलू कामगार, बीड़ी बनाने वाले लोग और भवन निर्माण से जुड़े कामगार अब क्या है इरादा
इसी तरह के अन्य कामगारों के सेगमेंटों को भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाए जाने के आसार कैसी है यह स्कीम
हर साल प्रति परिवार को 30 हजार रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर मुहैया कराया जाता है इस योजना के तहत
इस स्कीम से लाभान्वित होने वाले परिवारों को हर साल केवल 30 रुपये पंजीकरण व नवीकरण शुल्क के तौर पर देने पड़ते हैं
इस स्कीम के सालाना प्रीमियम का 75 फीसदी केंद्र सरकार और 25 फीसदी राज्य सरकारें करती हैं वहन
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा बढ़ाने पर विचार
देश में आर्थिक दृष्टि से काफी कमजोर माने जाने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। दरअसल, इस वर्ग से जुड़े लाखों और लोगों को निकट भविष्य में बीमा सुविधा दिए जाने का इरादा है। सरकार इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है। गुरुवार को यहां कैबिनेट बैठक में इस स्कीम की समीक्षा की गई।
गौरतलब है कि असंगठित कामगारों के कुछ सेगमेंटों को पहले ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में ला दिया गया है। 'मनरेगाÓ स्कीम से लाभान्वित होने वाले लोगों के साथ-साथ रेहड़ी वाले, घरेलू कामगार, बीड़ी बनाने वाले लोग और भवन निर्माण से जुड़े कामगार भी अब तक इस स्कीम के दायरे में आ चुके हैं।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि अब इसी तरह के अन्य कामगारों के सेगमेंटों को भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाए जाने की संभावना है। इस स्कीम को 1 अक्टूबर, 2007 को लांच किया गया था। गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों को बीमा सुविधा मुहैया कराने के लिए ही यह स्कीम लांच की गई है।
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की समीक्षा के दौरान सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया गया कि यह स्कीम सफल साबित हुई है। इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और विश्व बैंक जैसे आर्गेनाइजेशंस ने इस स्कीम की काफी सराहना की है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत हर साल प्रति परिवार को 30 हजार रुपये तक का स्मार्ट कार्ड आधारित कैशलेस (नकद रहित) स्वास्थ्य बीमा कवर मुहैया कराया जाता है। इस स्कीम के सालाना प्रीमियम का 75' केंद्र सरकार और 25' राज्य सरकारें वहन करती हैं। वहीं, इस स्कीम से लाभान्वित होने वाले परिवारों को हर साल 30 रुपये पंजीकरण एवं नवीकरण शुल्क के तौर पर देने पड़ते हैं।