विज्ञापन
 
 
 
 

एनएचएआई चेयरमैन की गुत्थी सुलझेगी

 
Source: बिजनेस भास्कर   |   Last Updated 01:35(01/02/12)
 
 
 

हालात
पूर्णकालिक चेयरमैन का मुद्दा लटका हुआ था
अब निजी सेक्टर के एक्सपर्ट इस पद पर होंगे
राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए लड़ी लंबी लड़ाई
बाजी अब सीपी जोशी के हाथ में जाती दिख रही
डीओपीटी ने काफी दिनों तक लगाया था अड़ंगा

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई के स्थायी चेयरमैन पर नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता के बादल अब धीरे-धीरे छंटने लगे हैं। दिसंबर, 2010 में पूर्णकालिक चेयरमैन बृजेश्वर सिंह रिटायर हो गए थे। उसके बाद से अब तक कोई पूर्णकालिक चेयरमैन नहीं बनाया जा सका है। इस समय सड़क सचिव ए.के. उपाध्याय चेयरमैन का पद संभाल रहे हैं।



दरअसल पूर्णकालिक चेयरमैन नियुक्त क रने का मुद्दा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री सी.पी. जोशी और डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के बीच काफी लंबे समय तक विवाद की वजह रहा है। जोशी इसके लिए प्राइवेट सेक्टर के लोगों को लाने के हिमायती रहे हैं। लेकिन डीओपीटी इसमें अड़ंगे लगाता रहा है। डीओपीटी अब तक इस प्रस्ताव को रोकने के लिए काफी कोशिश कर चुका है।


सड़क परिवहन मंत्रालय के एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि डीओपीटी इस तरह के प्रस्ताव को रोकने की कोशिश करता है क्योंकि वह अपने हित चाहता है। अगर विभाग के लोगों को सीधे फायदा नहीं मिलता तो भी वे चाहते हैं कि इस तरह के पद सरकारी नौकरशाही के खाते में ही जाने चाहिए। हालांकि , अब एनएचएआई के चेयरमैन पद के लिए निजी सेक्टर की उम्मीदवारी का रास्ता खुलता हुआ नजर आने लगा है।


अब ऐसी खबरें आ रही हैं, जिससे लगता है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने यह जंग जीत ली है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एनएचएआई के स्थायी चेयरमैन पद के लिए अब निजी सेक्टर की इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शीर्ष लोगों की तलाश की जा रही है। सरकार का मानना है कि निजी सेक्टर के लोगों को लाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर इस सेक्टर की दिक्कतों की समझ बढ़ेगी और नीतियां बनाने में आसानी होगी। नीतिगत खामियों की वजह से ही वित्त वर्ष के दौरान 7,300 किलोमीटर सड़क निर्माण के लक्ष्य के बावजूद 5000 किलोमीटर के लिए ही ठेके अवार्ड हुए हैं।


सरकार के नए निर्देश के मुताबिक एनएचएआई चेयरमैन पद के लिए सार्वजनिक या निजी सेक्टर की इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के सीईओ, निदेशकों और ऐसे ही समान पद पर काम कर रहे लोगों की उम्मीदवारी पर विचार किया जाएगा। इन्फ्रास्ट्र्क्चर फाइनेंस कंपनियों में भी ऐसे ही पदों के लिए काम करने वालों पर विचार हो सकता है, बशर्ते कंपनी का नेटवर्थ 2000 करोड़ रुपये का हो।



उम्मीदवार को इन्फ्रास्ट्र्क्चर फाइनेंशिंग का पेशेवर अनुभव भी होना चाहिए। हालांकि इसमें एक अहम शर्त भी जुड़ी है। चेयरमैन पद के उम्मीदवारों के लिए दो साल कूलिंग ऑफ पीरियड रखा गया है। मतलब एनएचएआई से कारोबार करने वाली निजी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी में काम करने वाला व्यक्ति इस पद के लिए आवेदन करने के दो साल पहले कंपनी छोड़ चुका हो।


एनएचएआई के चेयरमैन का पद सेक्रेट्री स्तर का होता है। कमलनाथ के सड़क परविहन और राजमार्ग मंत्री रहते समय इस पद पर रहने वाले का कार्यकाल तीन से पांच साल तक का होता था। ऐसे में सेक्रेट्री स्तर के वे आईएएस जिनके रिटायरमेंट में दो-तीन साल बचे हों, उन्हें एनएचएआई का चेयरमैन बना दिया जाता था।


ऐसे में उन्हें पांच साल तक सेक्रेट्री स्तर की सुविधाएं और मिल जाती थीं। इस वजह से चेयरमैन पद के लिए आईएएस बिरादरी की इतनी लंबी-चौड़ी लॉबिंग चल रही थी। जबकि जोशी इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की परियोजनाओं में रफ्तार लाने के लिए निजी सेक्टर के एक्सपर्ट प्रोफेशनल को लाने के हिमायती रहे हैं। आखिरकार बाजी उनके हाथ में जाती दिखने लगी है।

 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
4 + 1

 

 
 
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Amazing Body Paintings
Controversies that rocked B-town
Just Added

करियर कॉलेज में फेयरवेल पार्टी के दौरान स्टूडेंट्स ने बिखेरे रंग
Bollywood Stars at Cannes
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment